सिवनी जिले के घंसौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के दौरान एक युवक की मौत के बाद शुक्रवार को दोपहर से शाम तक तनाव की स्थिति बन गई। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने मंडला-लखनादौन मुख्य मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया,जिससे यातायात बाधित हुआ। सूचना मिलने पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पुलिस अनुविभागीय अधिकारी नम्रता सिंधिया सहित राजस्व अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया,जिसके बाद चक्काजाम समाप्त हुआ और यातायात सामान्य हो सका। मृतक की पहचान ग्राम पटरी निवासी 24 वर्षीय रामशरण इरचाम के रूप में हुई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, लेकिन समय पर उचित उपचार नहीं मिला। परिजनों के अनुसार, अस्पताल के एक कर्मचारी ने प्राथमिक उपचार किया, जबकि चिकित्सक समय पर उपलब्ध नहीं थे। इस कारण युवक की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उन्होंने अस्पताल की एम्बुलेंस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया था, लेकिन अस्पताल की एम्बुलेंस लंबे समय से खराब होने के कारण उपलब्ध नहीं हो सकी। समय पर नहीं मिली एंबुलेंस सेवा समय पर परिवहन सुविधा न मिलने के कारण उपचार में देरी हुई, जिससे युवक की जान चली गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उपचार और एम्बुलेंस मिल जाती, तो युवक को बचाया जा सकता था। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी, संसाधनों का अभाव और एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सुविधाओं की खराब स्थिति के कारण मरीजों को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बीएमओ ने आरोप नकारे बीएमओ डॉ.भारती सोनकेशरिया ने लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मरीज का बीपी, एसपीओ-2 जांच कर ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई थी तथा गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया था। एसडीएम बिसन सिंह गोंड ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
