बालाघाट में एथेनॉल प्लांट के नाम पर हुए फोर्टिफाइड चावल घोटाले को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने अपनी ही विधायक पत्नी अनुभा मुंजारे सहित कांग्रेस और भाजपा नेताओं पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। विपक्षी विधायकों की चुप्पी पर उठाए सवाल पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने कहा कि जिले में कांग्रेस के चार विधायक होने के बाद भी सभी इस बड़े घोटाले पर चुप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बालाघाट और वारासिवनी के विधायक केवल औपचारिकता निभाने के लिए प्लांट का दौरा करके आ गए, जबकि विधानसभा में इस मुद्दे को नहीं उठाया गया। पुलिस पर जांच कमजोर करने का आरोप कंकर मुंजारे ने आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही एसआईटी दबाव में काम कर रही है। पुलिस बड़े रसूखदारों को बचाने के लिए मामले को छोटा दिखा रही है और फरार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। चार आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी अब भी फरार यह घोटाला 3 जून को तब सामने आया था जब छिंदवाड़ा जा रहे सरकारी चावल से भरे ट्रक को एक राइस मिल में पकड़ा गया था। पुलिस ने अब तक ट्रक ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी एथेनॉल प्लांट के मालिक पिता-पुत्र अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। यह खबर भी पढ़ें… MP में 1160 करोड़ के फोर्टिफाइड चावल घोटाले में एक्शन:राइस मिलर, एथेनॉल प्लांट और ट्रांसपोर्टर्स सहित 13 नामजद, पूर्व सांसद बोले- सीबीआई जांच हो मध्यप्रदेश के बालाघाट में 1,160 करोड़ रुपए के फोर्टिफाइड चावल घोटाले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। अब तक 17 ट्रक जब्त किए जा चुके हैं। 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है। 13 से ज्यादा आरोपियों को नामजद कर लिया गया है। हालांकि कुछ नामों का खुलासा नहीं किया गया है। इसमें कई रसूखदार नाम भी शामिल है। दैनिक भास्कर ने खुलासा किया था कि एथेनॉल उत्पादन के नाम पर सरकारी फोर्टिफाइड चावल की खरीद-बिक्री में करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है। पढ़ें पूरी खबर —————————————– एथेनॉल के नाम पर 1160 करोड़ का चावल घोटाला:2320 में खरीदकर 2800 में बेच रहे, मुनाफे में सब हिस्सेदार…‘खुलासे’ से डर रही पुलिस देश में एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को पर्यावरण-अनुकूल नीति के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश में एथेनॉल प्रोडक्शन के नाम पर सरकारी चावल के घोटाले का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि 5 लाख मीट्रिक टन (50 लाख क्विंटल) सरकारी चावल में से ज्यादातर चावल का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हुआ ही नहीं। यह चावल दोबारा सरकारी गोदाम पहुंच गया। इसकी कीमत करीब 1160 करोड़ रुपए है। पढ़ें पूरी खबर
