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भोजशाला में एक ही एंट्री गेट, फिर नमाज कैसे होगी?:सुप्रीम कोर्ट का आदेश, प्रशासन के सामने 5 चुनौतियां; बसंत-पंचमी पर जहां नमाज, वहां क्या दिक्कत

धार के भोजशाला मंदिर के बाहर कहीं मुस्लिमों को नमाज अदा करने शुक्रवार दोपहर 1 से 3 के बीच खुला स्थान दिया जाए… जब सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को यह कहा तो यह मामला फिर से चर्चा में आ गया। इससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पूर्व फैसले में भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूरे वर्ष पूजा-अर्चना का अधिकार दे चुका है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि एक ही परिसर में दोनों धार्मिक गतिविधियां कैसे संचालित होंगी? नमाज किस खुले स्थान पर होगी, नमाजी किस रास्ते से आएंगे, श्रद्धालुओं की आवाजाही कैसे जारी रहेगी और एक ही मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था कैसे संभाली जाएगी? फिलहाल प्रशासन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है और न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में पूरी स्थिति समझी। ऐसी स्थिति में प्रशासन के सामने आने वाले चुनौती, परिसर में प्रवेश की स्थिति और पहले कब-कब परिसर में अंदर जाने की व्यवस्थाएं बदली हैं पढ़िए रिपोर्ट… भोजशाला परिसर में जाने एक ही मुख्य द्वार
भोजशाला परिसर में वर्तमान में केवल एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। यहीं पर पुलिस की स्थायी चौकी स्थापित है, जहां सुरक्षा जांच के बाद श्रद्धालुओं को परिसर में प्रवेश दिया जाता है। सामान्य दिनों में दर्शन और पूजा के बाद श्रद्धालु इसी मार्ग से बाहर निकलते हैं। हालांकि, बसंत पंचमी जैसे बड़े आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन वैकल्पिक निकास व्यवस्था लागू करता है। ऐसे अवसरों पर भोजशाला परिसर के बाईं ओर बने छोटे निकास द्वार से श्रद्धालुओं को बाहर निकाला जाता है। वहां से श्रद्धालु सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए दाईं ओर बढ़ते हैं और मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित पुलिस चौकी के समीप से बाहर निकलते हैं, जिससे मुख्य प्रवेश मार्ग पर दबाव कम किया जा सके। बसंत पंचमी और शुक्रवार आने पर हमेशा चुनौती
भोजशाला के इतिहास में कई बार बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़े हैं। ऐसे अवसरों पर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ओर हजारों हिंदू श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना और दूसरी ओर मुस्लिम समाज की जुम्मे की नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना रही है। ऐसे संवेदनशील अवसरों पर जिला प्रशासन, पुलिस, एएसआई तथा दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित होती रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश-निकास, बैरिकेडिंग और समय निर्धारण को लेकर विस्तृत प्लान तैयार किए जाते रहे हैं। कब-कब बदला भोजशाला में जाने का रास्ता 2006 में पहली बार बनाई वैकल्पिक व्यवस्था 2013 में भी अपनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था
साल 2013 में भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़े। उस समय भी प्रशासन ने लगभग इसी प्रकार की व्यवस्था अपनाई। मुस्लिम नमाजियों को पीछे के मार्ग से परिसर तक पहुंचाया गया, जबकि दूसरी ओर हिंदू श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना निर्धारित समय के अनुसार जारी रही। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। जनवरी 2026: पीछे के खुले हिस्से में कराई गई नमाज
23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ होने पर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हिंदू पक्ष की पूजा पूरे दिन जारी रही। वहीं मुस्लिम समाज के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई। प्रशासन ने मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित अंदरूनी मार्ग से सीमित संख्या में नमाजियों को परिसर तक पहुंचाया। चूंकि पूजा लगातार चल रही थी, इसलिए भोजशाला के पीछे स्थित खुले हिस्से में अस्थायी टेंट लगाकर जुम्मे की नमाज अदा कराई गई थी। हालांकि, इस व्यवस्था का मुस्लिम समाज ने विरोध किया था। उनका कहना था कि उन्हें भोजशाला परिसर के भीतर निर्धारित स्थान पर नमाज नहीं कराई गई, बल्कि जिस स्थान पर नमाज कराई गई वह कब्रिस्तान का हिस्सा है, जहां धार्मिक मान्यता के अनुसार नमाज अदा नहीं की जाती। जहां पहले नमाज हुई वो एरिया कब्रिस्तान का हिस्सा
मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि पूर्व में पीछे के खुले हिस्से में कराई गई नमाज का उन्होंने विरोध किया था। उनका तर्क था कि वह स्थान कब्रिस्तान का हिस्सा है, जहां धार्मिक मान्यता के अनुसार नमाज अदा नहीं की जाती। यह खबर भी पढ़ें
धार भोजशाला परिसर के पास हर शुक्रवार नमाज होगी सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को धार भोजशाला मंदिर के पास नमाज के लिए कोई खुला स्थान देने को कहा है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए यह जगह दी जाए। पूरी खबर पढ़ें…

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