भोपाल के ऐशबाग की आंबेडकर कॉलोनी सुदामा नगर में रिटायर्ड दंपती हेमंत फिलेमोन और शकुंतला बारीक की हत्या पहले एक ब्लाइंड मर्डर लग रही थी, लेकिन हत्या के 20 दिन बाद पुलिस जिस नतीजे तक पहुंची, उसके केंद्र में एक तीन लाख रुपए का कर्ज, मार्च 2025 में तैयार हुआ कथित दानपत्र और करोड़ों की संपत्ति है। जांच में सामने आया कि जिस दानपत्र के सहारे संपत्ति पर दावा करने की उम्मीद थी, वही दस्तावेज इस हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी बन गया। इसी के साथ पुलिस की जांच में शकुंतला को शराब और किटी पार्टी की शौकीन होने की पुष्टि भी हुई है। पेंशन से चलता था दोनों का गुजारा
शकुंतला बारीक आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं। पति से उनका मनमुटाव चलता था। दोनों ही अपनी-अपनी पेंशन से खुद का खर्च वहन करते थे। शकुंतला पर पहले से बैंक और निजी लोगों का कर्ज था। उन्हें पांच लाख रुपए की जरूरत भी थी। जिसका जिक्र उन्होंने अपनी भाभी शिवानी से किया। उनकी भाभी शिवानी बारीक कस्तूरबा अस्पताल में कार्यरत हैं। उसी ने उनकी मुलाकात प्रॉपर्टी कारोबारी श्रीकांत से कराई। पहली मुलाकात कस्तूरबा अस्पताल की कैंटीन में हुई थी। श्रीकांत ने शकुंतला को पांच तो नहीं लेकिन तीन लाख रुपए देने की सहमति दी और दो दिन बाद यह रकम दे भी दी। लेकिन, श्रीकांत ने शर्त रखी कि उसे गारंटी के तौर पर कुछ चाहिए। इसी गारंटी के तौर पर मार्च 2025 में सवा करोड़ रुपए के मकान का एक दानपत्र (गिफ्ट डीड) तैयार कराया गया। पति को भनक तक नहीं लगी
पूछताछ में सामने आया कि दानपत्र में यह उल्लेख किया गया कि पति हेमंत की मृत्यु के बाद मकान का स्वामित्व शकुंतला के पास आएगा और उसके बाद वह संपत्ति श्रीकांत के नाम दान कर देंगी। जांच में यह भी सामने आया कि इस दस्तावेज की जानकारी हेमंत फिलेमोन को अपनी मृत्यु तक नहीं थी। पुलिस के अनुसार दानपत्र में गवाह के रूप में शिवानी बारीक और उनके एक परिचित के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक शिवानी को आरोपी नहीं बनाया है। मकान बिकता देख बदल गया पूरा खेल
जांच में सामने आया कि सुदामा नगर स्थित करीब सवा करोड़ रुपए कीमत के मकान को दंपती बेचने की तैयारी कर रहे थे। उसका सौदा भी लगभग तय हो चुका था। पुलिस का मानना है कि यदि मकान बिक जाता तो कथित दानपत्र का कोई महत्व नहीं रह जाता। यहीं से पूरी साजिश की शुरुआत हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि संपत्ति हाथ से निकलती देख दंपती को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। योजना के तहत श्रीकांत ने भाई शशिकांत की मदद से दंपती को मौत के घाट उतारा। इसके लिए दो देसी पिस्टलों का इंतजाम किया गया। दोनों देसी पिस्टल श्रीकांत मालवा से खरीदकर लाया था। श्रीकांत ने शकुंतला को दो गोली मारीं और शशिकांत ने हेमंत की हत्या की। सीसीटीवी ने खोला ब्लाइंड मर्डर का राज
24 जून 2026 की रात तेज बारिश में दो आरोपी रेनकोट पहनकर पैदल कॉलोनी पहुंचे। हत्या के बाद दोनों पैदल ही निकले और सुभाष नगर अंडरब्रिज तक पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, रास्ते भर दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत तक नहीं की, ताकि कोई संदेह न हो। वहां पहुंचकर दोनों अलग-अलग हो गए। श्रीकांत ऑटो से और शशिकांत कार से कजलीखेड़ा स्थित अपने घर पहुंचे। पहचान छिपाने के लिए श्रीकांत ने अपना रेनकोट ऑटो में ही छोड़ दिया था। पहले ऑटो से वह चेतक ब्रिज तक गया, यहां से उसने ऑटो बदला और घर पहुंचा। पुलिस ने सीडीआर के आधार पर श्रीकांत को चिन्हित किया। केस सामने आने के आठवे दिन उसे पूछताछ के लिए पहली बार तलब किया गया। तब वह रसूख दिखाने एक एडवोकेट के साथ थाने पहुंचा। हालांकि, सीसीटीवी में दिख रहे एक आरोपी के हुलिए का मिलान श्रीकांत से हो रहा था। लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी न करते हुए श्रीकांत को पूछताछ के बाद छोड़ दिया। गुपचुप तरीके से उसकी निगरानी की जाती रही। दर्जनों वाहन चालकों से की गई पूछताछ
जांच टीम ने सुभाष नगर अंडरब्रिज से घटना के पांच मिनट पहले और पांच मिनट बाद गुजरने वाले 22 कार चालकों और 58 बाइक, ऑटो व ई-रिक्शा चालकों से पूछताछ की। इसी तकनीकी जांच और फुटेज के विश्लेषण से पुलिस संदिग्धों तक पहुंचने में सफल रही। दूसरी शादी, पुराना अपराधी और कई सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि हेमंत और शकुंतला दोनों की यह दूसरी शादी थी। शकुंतला अपने पहले पति से अलग हो चुकी थीं, जबकि हेमंत का भी पहले तलाक हो चुका था। दोनों ने करीब 18 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। वहीं, हिरासत में लिया गया श्रीकांत पहले से आपराधिक रिकॉर्ड वाला आरोपी है। उसके खिलाफ भोपाल के विभिन्न थानों में लूट, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे कई मामले दर्ज हैं। हालांकि वह स्वयं को प्रॉपर्टी डीलर बताता है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले भी इसी तरह की संपत्ति से जुड़ी साजिशों या वारदातों में शामिल रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया मामले की जांच अभी जारी है। तकनीकी, वित्तीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे षड्यंत्र की परतें खुल रही हैं। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें
