मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। कमेटी के मुख्य संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि संगठन ने दोनों संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को पत्र लिखकर वर्तमान आदेश को तत्काल वापस लेने और मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनव्वर पटेल या अन्य मुस्लिम सदस्यों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने का फैसला स्वीकार्य नहीं है। शमशुल हसन ने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में वर्तमान वक्फ बोर्ड समिति को भंग कर नए सिरे से बोर्ड गठित करने की मांग की गई है। उनका कहना था कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस मुद्दे की गंभीरता को समझेंगे और मुस्लिम समाज की भावनाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में भी जनभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने फैसलों पर पुनर्विचार किया है, इसलिए इस मामले में भी सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। इन दो हिंदू सदस्यों की वक्फ बोर्ड में नियुक्ति हमें अध्यक्ष या मुस्लिम सदस्यों से कोई शिकायत नहीं हसन ने स्पष्ट किया कि ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी का विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है। उनके अनुसार वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनव्वर पटेल पहले भी मस्जिदों और कब्रिस्तानों से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे हैं और उन्हें उनके कामकाज पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि विवाद केवल दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर है, क्योंकि वक्फ इस्लाम से जुड़ा धार्मिक और सामाजिक संस्थान है तथा उसके प्रबंधन में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को ही स्थान मिलना चाहिए। स्वागत करने वाले उलेमाओं पर बिना नाम लिए निशाना शमशुल हसन ने बिना किसी का नाम लिए उन उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर भी निशाना साधा, जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड और उसके अध्यक्ष का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग कुरान और हदीस की शिक्षाओं से परिचित होने के बावजूद इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, जो मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे रुख को लेकर नाराजगी है और धार्मिक नेतृत्व को समुदाय की भावनाओं के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि विवादित फैसलों का स्वागत करना चाहिए। बता दें कि बीते दिन भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने वक्फ के दोबारा से बने अध्यक्ष सनव्वर पटेल का स्वागत किया था। ‘उलेमाओं को इतिहास से सीख लेनी चाहिए’ हसन ने कहा कि मुस्लिम समाज के धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी है। शमशुल हसन ने कहा कि इतिहास में मुस्लिम उलेमाओं ने समाज और देश के लिए बड़े संघर्ष किए हैं, इसलिए आज के धार्मिक नेतृत्व को भी उन्हीं परंपराओं से प्रेरणा लेकर समाज के हित में आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर मौन हैं या स्वागत कर रहे हैं, उन्हें अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए। ‘मुस्लिम समाज में नाराजगी, आंदोलन जारी रहेगा’ शमशुल हसन ने दावा किया कि वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर देशभर के मुस्लिम समाज में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक ऐसे फैसले के खिलाफ है जिसे समुदाय अपनी धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया तो ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगी। ये खबर भी पढ़ें… वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्य, मुस्लिमों का प्रदर्शन देश में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति हुई है। मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के विरोध में सोमवार को भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। पूरी खबर पढ़ें…
