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भारतवंशी बिजनेसमैन ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से 425 करोड़ ठगे:CIA एजेंट बताकर प्रेसिडेंट का भरोसा जीता, बोला- 36 फाइटर प्लेन, मिलिट्री सिस्टम दिला दूंगा

अमेरिका में धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। OCCRP और इंडोनेशियाई मैगजीन टेम्पो की रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव ने खुद को CIA एजेंट बताकर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (तब रक्षा मंत्री) का भरोसा जीता और रक्षा सौदों के नाम पर 425 करोड़ रुपए का फर्जी कर्ज मंजूर करा लिया। रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने 36 F-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और मिलिट्री कमांड सिस्टम दिलाने का दावा किया। जांच में पता चला कि जिन चार कंपनियों के जरिए उसने पांच रक्षा सौदे हासिल किए, वे सभी शेल कंपनियां थीं। बाद में टैक्स नहीं चुकाने पर इन्हें बंद कर दिया गया। सिर्फ 36 F-15 लड़ाकू विमानों की संभावित डील ही करीब 1.32 लाख करोड़ रुपए की थी। बताया गया है कि यह कथित फर्जीवाड़ा 2020 से 2022 के बीच हुआ। आरोप है कि इसी रकम से गौरव ने लॉस एंजिलिस में करीब 208 करोड़ रुपए का आलीशान बंगला खरीदा। अमेरिका में उसके खिलाफ 2024 से धोखाधड़ी समेत कई मामले दर्ज हैं। प्रबोवो गौरव को ‘मिस्टर G’ बुलाते कहते थे रिपोर्ट के मुताबिक गौरव ने प्रबोवो का इतना भरोसा जीत लिया था कि वे उसे ‘मिस्टर G’ कहकर बुलाते थे। उसने राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारियों का भी इस्तेमाल किया, जो केवल उनके करीबी लोगों को पता थीं। इनमें यह बात भी शामिल थी कि प्रबोवो अपने घर के मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें साफ नहीं कराते। गौरव ने यह भी दावा किया कि उसने 2002 के बाली बम धमाकों के आतंकियों को पकड़वाने और प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे आखिरी समझौते तक नहीं पहुंचे थे। इसलिए सरकार को कोई सीधा आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। खुद को बाइडेन का करीबी बताता था गौरव अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और अदालत में दायर मुकदमे के मुताबिक गौरव श्रीवास्तव खुद को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन, सीनेटर चक शूमर और कई सैन्य अधिकारियों का करीबी बताता था। वह इन नेताओं और अधिकारियों के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर लोगों को यकीन दिलाता था कि उसकी पहुंच अमेरिकी सत्ता और सुरक्षा तंत्र के टॉप तक है। हालांकि, बाद में आईं रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इन नेताओं तक उसकी पहुंच किसी सरकारी भूमिका की वजह से नहीं, बल्कि राजनीतिक चंदे, सार्वजनिक कार्यक्रमों और आयोजनों के जरिए बनी थी। मुकदमे में आरोप है कि गौरव ने इसी छवि का इस्तेमाल कर कई कारोबारियों और विदेशी अधिकारियों का भरोसा जीता। CIA एजेंट बताकर सुनाता था जेम्स बॉन्ड जैसी कहानियां अमेरिका में दायर केस के मुताबिक गौरव श्रीवास्तव खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का ‘नॉन-ऑफिशियल कवर (NOC)’ एजेंट बताता था। लोगों का भरोसा जीतने के लिए वह जासूसी मिशनों से जुड़ी कई कहानियां सुनाता था। गौरव दावा करता था कि उसने CIA के ट्रेनिंग सेंटर ‘द फार्म’ में विशेष प्रशिक्षण लिया है। वह अपने शरीर पर मौजूद निशानों को गुप्त ऑपरेशन के दौरान लगी चोट बताता था। इसके अलावा वह कहता था कि 2008 में कांगो में एक मिशन के दौरान ISIS ने उसे बंधक बना लिया था, जहां से वह किसी तरह बच निकला। हालांकि, मुकदमे में कहा गया कि ये सभी दावे झूठे थे। जांच में सामने आया कि उसके शरीर पर मौजूद निशान किसी गुप्त मिशन के नहीं, बल्कि बचपन में हुई किडनी की सर्जरी के थे।

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