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वर्ल्ड अपडेट्स:एपस्टीन कनेक्शन की समीक्षा पूरी होने तक वॉरेन बफे ने गेट्स फाउंडेशन को दान रोका: रिपोर्ट

बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन वॉरेन बफे ने इस साल गेट्स फाउंडेशन को होने वाला अपना नियमित मध्य-वर्षीय अरबों डॉलर का दान फिलहाल रोक दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वे फाउंडेशन और दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के संबंधों की बाहरी समीक्षा पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स फाउंडेशन के CEO मार्क सुजमैन ने एपस्टीन से जुड़े फाउंडेशन के पुराने संपर्कों की स्वतंत्र जांच कराई है। इसकी रिपोर्ट गर्मियों में आने की उम्मीद है। बताया गया है कि बफेट दान पर अंतिम फैसला साल के आखिर में, संभवतः अपनी थैंक्सगिविंग चिट्ठी जारी करने के समय ले सकते हैं। 95 वर्षीय बफे पिछले दो दशकों में बर्कशायर हैथवे के 47 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के शेयर गेट्स फाउंडेशन को दान कर चुके हैं। गेट्स फाउंडेशन उस समय विवादों में आया था जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ ईमेल में एपस्टीन और फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच संवाद का जिक्र सामने आया। इसी के बाद फाउंडेशन ने पुराने संबंधों की स्वतंत्र समीक्षा शुरू कराई। रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर बर्कशायर हैथवे और गेट्स फाउंडेशन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एजेंसी स्वतंत्र रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि भी नहीं कर सकी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबर… चीनी उद्योगपति को अमेरिका में 30 साल की जेल; 1 अरब डॉलर की धोखाधड़ी का दोषी ठहराया गया
चीन के पूर्व अरबपति कारोबारी और सरकार के मुखर आलोचक गुओ वेनगुई को अमेरिका की एक अदालत ने 1 अरब डॉलर से अधिक की निवेश धोखाधड़ी के मामले में 30 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि गुओ ने लोकतंत्र समर्थक समर्थकों का भरोसा जीतकर उनसे धन जुटाया और उसका इस्तेमाल अपने आलीशान जीवन पर किया। न्यूयॉर्क की जज एनालिसा टोरेस ने कहा कि गुओ ने चीन में लोकतंत्र की उम्मीद रखने वाले लोगों का शोषण किया। उन्हें रैकेटियरिंग, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई आरोपों में दोषी ठहराया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गुओ ने 2018 से 2023 के बीच अपने ऑनलाइन समर्थकों से निवेश और क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं के जरिए 1 अरब डॉलर से अधिक जुटाए। आरोप है कि इस धन से उन्होंने 50 हजार वर्गफुट की हवेली, 10 लाख डॉलर की लेम्बोर्गिनी और 3.7 करोड़ डॉलर की यॉट जैसी महंगी संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, गुओ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह राशि उनके राजनीतिक अभियान और चीन में लोकतंत्र समर्थक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की गई। गुओ 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद चीन छोड़कर अमेरिका चले गए थे। वहां उन्होंने खुद को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आलोचक के रूप में स्थापित किया और बड़ी संख्या में ऑनलाइन समर्थक जुटाए। बांग्लादेश में खसरे के 1 लाख संदिग्ध मरीज मिले; 700 से ज्यादा मौतें बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। जनवरी 2026 से अब तक देश में 1 लाख से ज्यादा संदिग्ध मरीज सामने आए हैं, जबकि 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर है। बड़ी संख्या में संक्रमित और मौत का शिकार हुए बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, बांग्लादेश के 64 में से 58 जिलों तक संक्रमण फैल चुका है। 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच 19,161 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें 2,973 मामलों की लैब जांच में खसरे की पुष्टि हुई। इसी दौरान 166 संदिग्ध और 30 लैब कन्फर्म मरीजों की मौत दर्ज की गई। हजारों मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया।

सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले ढाका (8,263) में मिले। इसके बाद राजशाही (3,747), चटगांव (2,514) और खुलना (1,568) का स्थान रहा। ढाका में संक्रमण सबसे अधिक घनी आबादी वाली बस्तियों में फैला है।

रिपोर्ट के अनुसार, 79% संक्रमित बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं। इनमें 66% बच्चे 2 साल से कम और 33% बच्चे 9 महीने से भी छोटे हैं। अधिकांश मौतें ऐसे बच्चों की हुईं, जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा था।
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने 5 अप्रैल से खसरा-रूबेला (MR) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। साथ ही पूरे देश में निगरानी और जांच तेज कर दी गई है।

खसरा एक तेजी से फैलने वाला वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके संपर्क में आने से फैलता है। WHO के अनुसार, समय पर टीका लगवाकर इससे बचाव किया जा सकता है।
किंग चार्ल्स के आधिकारिक विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ उपाधि हटी
ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के आधिकारिक कार्य विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि हटा दी गई है। 2025-26 की सॉवरेन ग्रांट रिपोर्ट में अब उन्हें इंग्लैंड चर्च का सुप्रीम गवर्नर और ब्रिटेन के बहुधार्मिक समाज में आस्था के लिए स्थान की रक्षा करने वाला बताया गया है। नई रिपोर्ट की भाषा पिछले साल की रिपोर्ट से अलग है। पहले चार्ल्स को ‘हेड ऑफ द चर्च ऑफ इंग्लैंड एंड डिफेंडर ऑफ द फेथ” कहा जाता था। हालांकि, शाही परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर यह उपाधि अभी भी दर्ज है। ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि 1521 में पोप लियो दशम ने इंग्लैंड के राजा हेनरी अष्टम को दी थी। यह सम्मान उन्हें मार्टिन लूथर के धार्मिक सुधार आंदोलन का विरोध करने के बाद मिला था। यह बदलाव तीन दशक पुरानी बहस को फिर चर्चा में ले आया है। 1994 में प्रिंस ऑफ वेल्स रहते हुए चार्ल्स ने कहा था कि वे ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ कहलाना पसंद करेंगे, ताकि वे केवल ईसाई धर्म ही नहीं बल्कि सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व कर सकें। 2023 में राज्याभिषेक के दौरान उन्होंने पारंपरिक शपथ नहीं बदली थी, लेकिन प्रस्तावना में यह जोड़ा गया था कि इंग्लैंड चर्च ऐसा वातावरण बनाएगा, जहां सभी धर्मों और मान्यताओं के लोग स्वतंत्र रूप से रह सकें। अमेरिकी कैथोलिक आर्चडायसीज 500 से अधिक बाल यौन शोषण पीड़ितों को 39.5 करोड़ डॉलर देगा
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को कैथोलिक आर्चडायसीज ने 500 से अधिक बाल यौन शोषण मुकदमों के निपटारे के लिए 39.5 करोड़ डॉलर (395 मिलियन डॉलर) देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। समझौते के तहत आर्चबिशप साल्वातोरे जे. कॉर्डिलियोने प्रत्येक पीड़ित को व्यक्तिगत माफी पत्र लिखेंगे। साथ ही चर्च को बाल सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े कई सुधार भी लागू करने होंगे। आर्चबिशप कॉर्डिलियोने ने श्रद्धालुओं को लिखे पत्र में कहा कि कोई भी आर्थिक समझौता अतीत के दर्द को मिटा नहीं सकता, लेकिन इससे पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संस्थागत विफलताओं के कारण यह नुकसान हुआ और सभी पीड़ितों से ईमानदारी से माफी मांगी। समझौते के तहत चर्च को बाल यौन शोषण के आरोप झेल चुके पादरियों की सूची सार्वजनिक रखनी होगी, उसे नियमित रूप से प्रकाशित करना होगा और पीड़ितों को चुप कराने वाले गोपनीयता समझौतों पर रोक लगानी होगी। यह मामला अमेरिका में कैथोलिक चर्च से जुड़े बाल यौन शोषण मामलों में हुए बड़े मुआवजा समझौतों की श्रृंखला का नया उदाहरण है। अक्टूबर 2024 में लॉस एंजिलिस आर्चडायसीज ने 1,353 मामलों के निपटारे के लिए 88 करोड़ डॉलर (880 मिलियन डॉलर) के समझौते पर सहमति जताई थी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प की मेल-इन बैलेट चुनौती खारिज की
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प समर्थित उस याचिका को 5-4 के बहुमत से खारिज कर दिया, जिसमें मेल-इन बैलेट की गिनती के नियम सख्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने मिसिसिपी के उस कानून को बरकरार रखा, जिसके तहत चुनाव दिवस तक पोस्टमार्क किए गए मतपत्र पांच दिन के भीतर पहुंचने पर भी गिने जाएंगे। बहुमत की ओर से फैसला लिखते हुए जस्टिस एमी कोनी बैरेट ने कहा कि चुनाव संबंधी कानूनों के अनुसार मतदाता की पसंद चुनाव दिवस तक दर्ज हो जानी चाहिए। यदि मतदान की अंतिम समय-सीमा चुनाव दिवस है और मतपत्र उसी दिन तक पोस्टमार्क हो जाता है, तो बाद में उसके पहुंचने से कानून का उल्लंघन नहीं होता। फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर इसे मतदाताओं के अधिकारों के लिए “बड़ा नुकसान” बताया। उन्होंने कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की अपील दोहराई। इस प्रस्तावित कानून में मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने के साथ मेल-इन वोटिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।

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