सूरत, दिल्ली, लखनऊ… इन शहरों के कोचिंग सेंटरों में आग लगी और दर्जनों छात्रों की मौत हुई। तो ग्वालियर में भी जिला प्रशासन,नगर निगम,पुलिस व दूसरे विभाग के अफसरों की नींद टूट जाती है और संयुक्त जांच दल कोचिंग सेंटरों की जांच-पड़ताल पर निकल पड़ता है। लेकिन जैसे ही कुछ दिन बीतते हैं इस दल के अफसर फिर सुकून की नींद सो जाते हैं। कोचिंग सेंटरों को हादसों के लिए यूं ही छोड़ देते हैं। हाल ही में लखनऊ की कोचिंग में हुए हादसे के बाद नगर निगम की टीम फिर से जांच के लिए निकली है। अब तक दो कोचिंग सेंटरों को सील भी कर दिया है। मगर, जिन सेंटरों की जांच 2019 में हुई और नोटिस दिए गए। वहां अब तक अव्यवस्थाएं जस की तस हैं। क्योंकि नोटिस जारी करने के बाद अफसरों ने वापस मुड़कर इन अवैध संचालन वाले सेंटरों की तरफ देखा ही नहीं। पहले की सर्वे रिपोर्ट मंगाकर दिखवाते हैं एडीएम सीबी प्रसाद का कहना है कि कोचिंग सेंटर्स व दूसरे संस्थानों में अग्नि सुरक्षा इंतजामों का सर्वे चल रहा है। पहले की सर्वे रिपोर्ट मंगाकर दिखवाते हैं। यदि उनको नोटिस दिया है और आगे इसमें क्या प्रक्रिया हुई, इसकी पड़ताल कराएंगे। बिना मानक के कोचिंग अब नहीं चल सकेंगी। 2019 में इन व्यवस्थाओं की हुई थी जांच, रिपोर्ट और कार्यवाही फाइलों में दफन फायर सेफ्टी ऑडिट: इसमें हर कोचिंग पर चेक किया गया कि सेंटर्स में आग बुझाने के सिलेंडर लगे हैं? क्या वे चालू हालत में हैं या एक्सपायर हो चुके हैं? संस्थान के पास नगर निगम के नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट है या नहीं। अधिकांश कोचिंग पर आग बुझाने की व्यवस्था नहीं मिली। जिसके लिए कोचिंग संचालकों को सिर्फ हिदायत देकर टीमें लौट गई थीं। इमरजेंसी गेट: कोचिंग क्लास या बिल्डिंग की सीढ़ियां कितनी चौड़ी हैं? क्या भगदड़ की स्थिति में बच्चे बाहर निकल सकते हैं? यदि मुख्य रास्ते पर आग लगती है, तो क्या इमारत में दूसरी तरफ कोई इमरजेंसी एग्जिट है। इन बिंदुओं की जांच में भी सैकड़ों कोचिंग सेंटर फेल साबित हुए थे। जिसके लिए नोटिस तो जारी हुए लेकिन कार्यवाही किसी पर नहीं हुई। बेसमेंट और रूफटॉप – क्या बिना वेंटिलेशन के बेसमेंट में अवैध रूप से क्लास या लाइब्रेरी चलाई जा रही है? क्या छत पर फाइबर शेड या टीन शेड डालकर अवैध क्लासरूम बनाए हैं, क्योंकि ऐसी जगहों पर आग फैलने का खतरा ज्यादा होता है। शहर में ऐसे प्वाइंट भी मिले थे लेकिन टीमों ने कार्यवाही न करते हुए इन्हें बंद करने की सिर्फ हिदायत देकर छोड़ दिया। क्षमता से अधिक बच्चे हॉल की क्षमता कितनी है और उसमें कितने छात्र बैठाए जा रहे हैं? जांच में 50 बच्चों की क्षमता वाले कमरों में 70-80 बच्चे पढ़ते मिले। तारों और पैनल की स्थिति बिल्डिंग में बिजली के तार खुले में, चेंजओवर या जनरेटर ऐसी जगह तो नहीं हैं जहां से छात्रों का आना-जाना हो। कुछ सेंटरों समस्याएं मिलीं, जिन्हें सही करने के निर्देश देकर छोड़ दिया। ये स्थिति… ऐसी कई बिल्डिंग, जिनमें आने-जाने का 1 गेट, लेकिन कोचिंग चल रहे आधा दर्जन
