स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक तबादला नीति शिक्षकों के लिए राहत के बजाय परेशानी बनती जा रही है। तबादले के लिए बनाए गए पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसके चलते हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पति-पत्नी के आधार पर तबादला चाहने वाले शिक्षकों को हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि तबादला नीति में कहीं भी यह नहीं लिखा था कि पति-पत्नी के आधार पर आवेदन करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट देना होगा। लेकिन पोर्टल पर आवेदन करते समय विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र अपलोड करने की शर्त आ रही है। कई शिक्षकों ने अब तक मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है, क्योंकि इसकी कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। अब आवेदन की आखिरी तारीख 24 जून है और वे समझ नहीं पा रहे कि इतने कम समय में यह दस्तावेज कहां से लाएं। पहले से ही कई शिक्षक बाहर हो चुके शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों पर रोक और तीन साल की सेवा अवधि जैसी शर्तों के कारण पहले ही बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। अब पोर्टल की तकनीकी समस्याओं ने बाकी शिक्षकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। ये हैं सबसे बड़ी दिक्कतें ऐसे समझिए समस्या रामप्रकाश सिंह और उनकी पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हैं। वे पति-पत्नी के आधार पर तबादला चाहते हैं। आवेदन भरते समय पोर्टल पर मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि सर्विस बुक में पति-पत्नी की पूरी जानकारी दर्ज रहती है, फिर अलग से विवाह प्रमाण पत्र मांगने का क्या मतलब है। वहीं जबलपुर के प्राथमिक शिक्षक दीपक शरणागत पारस्परिक तबादला करना चाहते हैं, लेकिन जिन शिक्षक के साथ वे तबादला करना चाहते हैं, उनका नाम ही पोर्टल पर नहीं आ रहा। इस कारण उनका आवेदन पूरा नहीं हो पा रहा। अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि पोर्टल में आ रही तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए। साथ ही आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए ताकि सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन करने का मौका मिल सके। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते समस्याएं नहीं सुलझीं तो बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे।
