सागर में मयंक साहू हत्याकांड के मुख्य आरोपी यश सोनी और मनु सोनी की गिरफ्तारी के बाद उनकी एक महीने की फरारी से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। हत्या के बाद दोनों आरोपी साथी ओम अहिरवार के साथ 7 राज्यों में घूमते रहे। तिरुपति बालाजी और मथुरा-वृंदावन में लंगर का सहारा लेकर गुजारा किया। पैसे खत्म होने पर आरोपियों ने लूट की वारदातें कीं। पुलिस ने उनके 32 मददगारों को जेल भेजकर सप्लाई लाइन तोड़ी और गर्लफ्रेंडों के मोबाइल नंबरों के जरिए उनकी लोकेशन तक पहुंची। एक महीने तक पुलिस को चकमा देने वाले दोनों आरोपी सागर लौटते ही गिरफ्तार हो गए, जबकि तीसरा आरोपी ओम अहिरवार अब भी फरार है। पुलिस जांच और आरोपियों से पूछताछ में फरारी के दौरान की गई गतिविधियों की अहम जानकारी सामने आई है। हत्या के बाद आरोपी किन राज्यों में छिपे, खर्च चलाने के लिए क्या किया, कब लंगर में खाना खाया और पुलिस उन तक कैसे पहुंची, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… दोस्ती टूटी, फिर दुश्मनी ने ली जान 21 मई की रात मोतीनगर थाना क्षेत्र के विवेकानंद वार्ड स्थित गोंड बब्बा चबूतरा इलाके में पुरानी रंजिश के चलते मयंक साहू और उसके भाई ओम साहू का यश सोनी और उसके साथियों से विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपियों ने अवैध हथियार से फायरिंग की। गोली लगने से मयंक साहू की मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात में कुल आठ आरोपी शामिल थे। शुरुआती कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, लेकिन मुख्य आरोपी यश सोनी, मनु सोनी और ओम अहिरवार फरार हो गए थे। मृतक मयंक साहू और आरोपी यश-मनु कभी करीबी दोस्त थे। तीनों साथ रहते थे और इलाके में दबदबा बनाने की कोशिश करते थे। कुछ साल पहले एक युवती को लेकर विवाद हुआ और उनके रास्ते अलग हो गए। इसके बाद रंजिश बढ़ती गई। इसी बीच यश के भाई जय सोनी की हत्या हो गई, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया। पुलिस जांच के अनुसार, इसी पुरानी दुश्मनी का अंत 21 मई की रात मयंक साहू की हत्या के रूप में हुआ। दो तस्वीरें देखिए… तिरुपति से मथुरा तक लंगर के सहारे काटी फरारी हत्या के बाद तीनों आरोपी मध्यप्रदेश से बाहर निकल गए। जांच में सामने आया कि फरारी के दौरान वे दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में घूमते रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के पास शुरुआत में कुछ नकदी थी, लेकिन लगातार ठिकाने बदलने से पैसा तेजी से खत्म हो गया। इसके बाद वे आंध्रप्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी पहुंचे, जहां कई दिन रुके। यहां उन्होंने लंगर में भोजन कर खर्च बचाया। तिरुपति के बाद आरोपी मथुरा-वृंदावन पहुंचे। वहां भी उन्होंने धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले भोजन का सहारा लिया। जांच में सामने आया कि फरारी के दौरान वे इंदौर, पीथमपुर, अशोकनगर और कटनी में भी रुके थे। जब पैसे खत्म हुए तो फिर अपराध का रास्ता चुना फरारी के दौरान आरोपियों के सामने सबसे बड़ी समस्या पैसों की थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खर्च चलाने के लिए उन्होंने दोबारा अपराध का रास्ता चुना। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अशोकनगर में लूट की वारदात की। इसके अलावा आष्टा और पीथमपुर क्षेत्रों में भी आपराधिक घटनाओं में उनकी संलिप्तता सामने आई। गिरफ्तारी के बाद सागर पुलिस ने संबंधित जिलों की पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिस पहुंचती उससे पहले बदल देते थे लोकेशन आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए आसान नहीं थी। पुलिस को कई बार उनकी लोकेशन मिली, लेकिन हर बार वे बच निकले। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को सबसे पहले उनकी लोकेशन दिल्ली में मिली थी। टीम दिल्ली पहुंची, लेकिन उससे पहले ही आरोपियों को पुलिस की गतिविधियों की सूचना मिल गई और वे वहां से निकल गए। यही सिलसिला कई बार दोहराया गया। इससे पुलिस को शक हुआ कि सागर के कुछ लोग लगातार आरोपियों तक जानकारी पहुंचा रहे हैं। 32 मददगारों पर कार्रवाई, तब टूटा नेटवर्क जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि फरार आरोपियों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। उनके साथी और समर्थक उन्हें पैसे, ठिकाने और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध करा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के करीबियों की पहचान शुरू की। जांच के दौरान 32 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से फरार आरोपियों की मदद कर रहे थे। मददगारों पर कार्रवाई के बाद आरोपियों की सप्लाई लाइन लगभग बंद हो गई। उन्हें न पैसे मिल रहे थे, न सुरक्षित ठिकाने। गर्लफ्रेंडों के जरिए मिली सबसे बड़ी क्लू जब मददगारों के रास्ते बंद हुए तो आरोपी अपने परिचितों और गर्लफ्रेंडों के संपर्क में रहने लगे। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और उनसे जुड़े मोबाइल नंबर निगरानी पर लिए। जांच में कुछ नंबर सामने आए, जिन पर संदिग्ध बातचीत हो रही थी। पुलिस ने इन नंबरों की लोकेशन ट्रेस की और संबंधित युवतियों से पूछताछ की। इसी दौरान सूचना मिली कि एक युवती आरोपियों से मिलने जा रही है। पुलिस ने निगरानी बढ़ाई, लेकिन आरोपियों को भनक लग गई और उन्होंने फिर ठिकाना बदल लिया। हालांकि लगातार तकनीकी निगरानी के कारण पुलिस उनके करीब पहुंच चुकी थी। जेल पहुंचकर खंगाली अपराधियों की कुंडली फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने अलग रणनीति अपनाई। पुलिस टीम केंद्रीय जेल पहुंची और जानकारी जुटाई कि जेल में रहते समय यश और मनु किन लोगों के संपर्क में थे। जेल रिकॉर्ड और पूछताछ में कुछ नाम सामने आए, जिनके जरिए पुलिस भोपाल और इंदौर तक पहुंची। वहां भी कई संदिग्धों से पूछताछ की गई। इससे पुलिस को आरोपियों के नेटवर्क और संभावित ठिकानों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। सागर लौटे और जाल में फंस गए लगातार दबाव, आर्थिक संकट और मददगारों के नेटवर्क के टूटने के बाद आरोपी सागर लौटने की तैयारी करने लगे। पुलिस को उनके लौटने की सूचना मिल गई थी। इसी बीच खबर मिली कि बम्होरी रेगुवां क्षेत्र के पास रेलवे ट्रैक पर कुछ संदिग्ध युवक उतरे हैं। पुलिस ने घेराबंदी की। पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे। भागते समय मनु सोनी निर्माणाधीन करीब 50 फीट ऊंचे पुल से कूद गया, जिससे उसके हाथ-पैर में गंभीर चोटें आईं। इस दौरान यश और ओम वहां से निकल गए। इसके बाद पुलिस ने पीछा जारी रखा और रविवार को उत्तरप्रदेश के ललितपुर से यश सोनी को गिरफ्तार किया। ओम अहिरवार अब भी फरार है। मां और बहन की जमानत के लिए जुटा रहे थे पैसे पूछताछ में एक और अहम जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक फरारी के दौरान यश सोनी की सबसे बड़ी चिंता उसकी मां और मनु सोनी की बहन की जमानत थी। यश की मां हत्या के मामले में गिरफ्तार होकर जेल में है, जबकि मनु की बहन ड्रग्स प्रकरण में जेल भेजी जा चुकी है। आरोपियों ने बताया कि वे जमानत के लिए पैसे जुटाने की कोशिश कर रहे थे। इसी उद्देश्य से वे किसी फाइनेंस कंपनी में बड़ी लूट की वारदात की योजना बना रहे थे। इसके लिए सागर, इंदौर और उत्तरप्रदेश के कुछ अपराधियों से संपर्क किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यश सोनी और मनु सोनी आदतन अपराधी हैं। दोनों पर हत्या, हत्या के प्रयास, मारपीट और अन्य गंभीर अपराध दर्ज हैं। मनु सोनी के खिलाफ 25 और यश सोनी के खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों सागर में सक्रिय कटर गैंग से जुड़े रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने “0001” और “चूहा गैंग” जैसे नामों से युवकों का समूह बना रखा था, जिसमें कई नाबालिग भी शामिल थे। संबंधित खबरें भी पढ़ें… 1. सागर गोलीकांड में 2 और आरोपी गिरफ्तार सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने शनिवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पढ़ें पूरी खबर… 2. हत्याकांड का आरोपी सागर पुलिस घेराबंदी देख ब्रिज से कूदा सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र के विवेकानंद वार्ड में मछरयाई स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में गोली मारकर युवक की हत्या करने के मामले में पुलिस ने शनिवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी फरारी के दौरान सागर आया था। पढ़ें पूरी खबर…
