उज्जैन में महाकाल क्षेत्र से देर रात 11 संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया है। हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने इन लोगों को चिह्नित कर पुलिस के हवाले किया। इनमें से कुछ को मौके से पकड़कर थाने भेजा गया, जबकि अन्य के संबंध में भी पुलिस को जानकारी दी गई है। संगठन के पदाधिकारी अर्जुन प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि पकड़े गए लोगों के पास पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के आधार कार्ड मिले हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी जिन संदिग्धों को पुलिस को सौंपा था, उनके दस्तावेज भी मुर्शिदाबाद से जुड़े पाए गए थे। सिंह ने सभी मामलों की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर नागरिकता मान लेना उचित नहीं है। कार्यकर्ताओं के अनुसार, ये लोग शहर में साड़ी बेचने का काम कर रहे थे। पूछताछ के दौरान उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और मार्कशीट सहित कई दस्तावेज मिले। संगठन ने इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच की मांग की है। संगठन ने यह भी दावा किया है कि कुछ संदिग्धों के मोबाइल फोन में महाकाल मंदिर और महाकाल लोक परिसर के वीडियो मिले हैं। इसे लेकर उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि महाकाल क्षेत्र एक संवेदनशील इलाका है और यहां आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान और सत्यापन आवश्यक है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ये लोग शहर के एक होटल में ठहरे हुए थे। उन्होंने पुलिस से होटल, उनके ठहरने की व्यवस्था और स्थानीय संपर्कों की भी जांच करने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि उन्हें शहर में किसने ठहराया और वे कब से यहां रह रहे थे। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं। कई राज्यों में पहचान और सत्यापन अभियान भी चलाए गए हैं।
