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मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम हो सकता है लागू:अयोध्या राम मंदिर में आर्थिक गड़बड़ी के आरोपों के बाद एमपी में बनेगी एक्सपर्ट कमेटी

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रमुख देवस्थानों की प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने में जुट गई है। श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर के खजाने की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब राज्य के बड़े मंदिरों में नकद दान के बजाय डिजिटल डोनेशन (क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था) को अनिवार्य या व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। ​धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और खंडवा के ओंकारेश्वर सहित प्रदेश के सभी प्रमुख देवस्थानों में डिजिटल दान प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए सरकार एक विशेषज्ञ समिति (एक्सपर्ट कमेटी) का गठन करेगी। यह कमेटी देश के उन प्रमुख और आधुनिक प्रबंधन वाले मंदिरों का दौरा करेगी, जहां पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था लागू है, और उसके बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। मंदिरों की दान व्यवस्था में पारदर्शिता की यह कवायद इसलिए भी जरूरी मानी जा रही है क्योंकि मध्य प्रदेश के अपने ही प्रसिद्ध मंदिरों में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2017 में (निवाड़ी जिला बनने से पहले, जब यह क्षेत्र अविभाजित टीकमगढ़ जिले में था) रामराजा मंदिर के खजाने, दान राशि, आभूषणों, नकद बही-खातों और स्टॉक रजिस्टर में भारी वित्तीय अनियमितताएं और हेरफेरी उजागर हुई थी। तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच के बाद सितंबर 2017 में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ धारा 420 व अन्य के तहत एफआईआर (अपराध क्रमांक 258/2017) दर्ज की गई थी। हैरानी की बात यह है कि मंदिर से गायब हुए कैश और गहनों का 9 साल बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका और पुलिस की जांच अधूरी ही रही। लंबी खिंची इस जांच के कारण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) की एकल पीठ ने हाल ही में लिपिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि एक दशक तक विवेचना लंबित रखना नागरिक के त्वरित न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। हालांकि, निवाड़ी एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया का कहना है कि पुलिस इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील करेगी क्योंकि जांच में विलंब के पीछे गंभीर प्रशासनिक कारण रहे हैं।

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