छोटे भवनों के नक्शों को बिना दफ्तरों के चक्कर काटे 24 घंटे में मंजूरी देने के लिए शुरू की गई नगर निगम की डीम्ड अप्रूवल व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम की भवन शाखा ने जब पिछले एक महीने में पास हुए 300 नक्शों की स्क्रूटनी की, तो एक बड़ा मामला उजागर हुआ। जांच में 24 केस ऐसे मिले, जिनमें तय फीस से 8 से 10 हजार रुपए कम जमा करके नक्शे पास करवा लिए गए। मामला सामने आया तो मचा हड़कंप मामला पकड़ में आते ही निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। निगम ने तुरंत संबंधित भवन मालिकों और फर्जीवाड़ा करने वाले लाइसेंसधारी कंसल्टेंट्स को नोटिस थमा दिए। अब इस सिस्टम से पास हुए पुराने सभी नक्शों की जांच होगी। अधिकारियों की मैनुअल जांच नहीं होती अधिकारियों के मुताबिक, डीम्ड अप्रूवल व्यवस्था के तहत इसमें आवेदक अपने अधिकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर के जरिए नक्शा पोर्टल पर अपलोड करता है। सॉफ्टवेयर खुद ही नियमों के आधार पर तकनीकी टेस्ट करता है और तय समय में मंजूरी दे देता है। चूंकि इस पूरी प्रोसेस में निगम के अधिकारियों की मैनुअल जांच नहीं होती, संभवत: इसका फायदा उठाया गया। इस व्यवस्था में कुछ मामलों में तय शुल्क और पेमेंट में बीच अंतर मिला है।
एरिया बेस्ट डेवलपमेंट एरिया में भी हुआ था खेल यह पहली बार नहीं है जब इस सिस्टम का दुरुपयोग हुआ है। इससे पहले एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (एबीडी) यानी स्मार्ट सिटी क्षेत्र में भी ऐसा ही खेल सामने आया था। नियमों के मुताबिक, एबीडी क्षेत्र का भवन अनुमति शुल्क सामान्य इलाकों से ज्यादा है, इसलिए वहां डीम्ड अप्रूवल लागू ही नहीं होता। इसके बावजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर कई लोगों ने ऑनलाइन नक्शे पास करा लिए थे, जिसकी निगम को दोबारा समीक्षा करनी पड़ी थी। पुराने मामलों की होगी जांच मामले में भवन शाखा के अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने बताया कि समीक्षा के बाद कुछ मामलों में गड़बड़ी मिली है। निर्धारित शुल्क और जमा राशि में अंतर मिला है। इसे देखते हुए संबंधितों को नोटिस जारी किए है और पुराने मामलों की भी जांच कराएंगे।
