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बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने श्रीराम प्रतिमा का प्रोजेक्ट रुकवाया:मूर्ति के अपमान का आरोप, विरोध में हिंदुओं का प्रदर्शन, जय श्रीराम के नारे लगे

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार रात को हजारों हिंदुओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। भगवान राम की प्रतिमा निर्माण का प्रोजेक्ट को रोकने से गुस्साए हिंदू समाज के लोगों ने हाथों में मशाल लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उत्तरी बांग्लादेश के गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में एक मंदिर परियोजना के दौरान भगवान राम की तस्वीर को कट्‌टरपंथियों ने अपवित्र किया और निर्माण कार्य को जबरन रोक दिया। यह मार्च शाहबाग से शुरू होकर नेशनल प्रेस क्लब तक पहुंचा। पूरे रास्ते जय श्री राम के नारे गूंजते रहे। इसमें अलग-अलग हिंदू संगठनों के सदस्य और छात्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की गिरफ्तारी और तुरंत कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि घटना को लेकर मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। रंगपुर में एक छोटे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प की भी जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन से जुड़ी 3 तस्वीरें… भगवान कृष्ण और भगवान शिव की प्रतिमाएं भी बननी थी गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी में एक प्रस्तावित मंदिर परिसर में भगवान राम की 81 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण चल रहा था। इसके साथ 53 फुट की भगवान कृष्ण और 30 फुट की भगवान शिव की प्रतिमा भी बनाई जा रही थी। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका यानी 16.9 करोड़ रुपए बताई गई है। यह निर्माण 2025 की शुरुआत में निजी फंडिंग से शुरू हुआ था। श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के मुताबिक निर्माण कार्य के दौरान कुछ कथित इस्लामिक समूहों ने धमकियां दीं, जिसके बाद काम रोकना पड़ा। समिति ने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और सुरक्षा कारणों से निर्माण अस्थायी रूप से बंद किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसी दौरान एक प्रदर्शन में भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया और उसे नुकसान पहुंचाया गया। अल्टीमेटम और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी हिंदू संगठनों ने सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठनों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात और औपचारिक ज्ञापन देने की भी घोषणा की है। यह ज्ञापन शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही देशभर में रैलियों और विरोध कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। कुछ संगठनों ने 64 जिलों में राम मंदिर निर्माण अभियान शुरू करने की बात भी कही है। हिंदू संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रही है। कट्टरपंथियों ने फंडिंग-खातों की खुफिया जांच की मांग की कट्टरपंथी संगठन इमाम-उलमा परिषद और अन्य ने इस प्रोजेक्ट की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि खुफिया एजेंसियां जांच करें कि क्या किसी विदेशी सरकार या संगठन से पैसा आया है। इस मांग में परोक्ष रूप से भारत की ओर इशारा माना जा रहा है। विरोधियों ने इस पहल से जुड़े लोगों के बैंक खातों व संपत्तियों की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट का हमारी संप्रभुता पर असर होगा। बीते दो साल में दो और प्रोजेक्ट पर लग चुकी है रोक राम प्रतिमा प्रोजेक्ट से पहले भी दो साल में हिंदू आस्था से जुड़े 2 प्रोजेक्ट पर रोक लग चुकी है। 2025 में कट्टपरंथियों के विरोध पर ढाका में दुर्गा मंदिर प्रशासन ने गिराई। 2024 में ढाका के उत्तरा में दुर्गा पूजा मूर्ति स्थापना पर आपत्ति के बाद उसकी जगह बदलनी पड़ी। दो साल में हिंदुओं पर 2,839 हमले व 100 हत्याएं अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर 2,839 हमले हुए हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, 4-20 अगस्त 2024 के बीच 2,010 घटनाएं हुईं। 2025 में 522 तो 2026 के पहले 3 महीनों में 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 100 से ज्यादा हत्याएं, यौन हिंसा, घर-दुकान पर हमला, मंदिरों-प्रतिमाओं की तोड़फोड़, लूट, आगजनी और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं। —————
बांग्लादेश से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के दबाव में राम-प्रतिमा का प्रोजेक्ट रुका: फंडिंग की जांच व अधूरा निर्माण गिराने की मांग, 2025 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट बांग्लादेश के गैबांधा जिले में 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा का प्रोजेक्ट कट्टरपंथी दबाव के बाद रोक दिया गया है। यह प्रतिमा श्री श्री राधा गोबिंद और काली मंदिर परिसर में बन रही थी। मंदिर समिति ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अस्थायी रोक बताया है, लेकिन इसकी असली वजह कट्टरपंथी संगठनों का दबाव बताया जा रहा है। प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे कट्टरपंथी संगठनों ने अधूरी संरचना गिराने तक की मांग की है। इमाम-उलमा परिषद ने प्रोजेक्ट पूरी तरह रद्द करने, भविष्य में ऐसी किसी पहल पर रोक लगाने और फंडिंग की जांच कराने की मांग रखी है। पूरी खबर पढ़ें… बांग्लादेश लौटने के लिए खुद सामने आ रहे अवैध प्रवासी:बंगाल में रोज 200-300 लोगों का वेरिफिकेशन पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की हकीमपुर चेकपोस्ट पर इन दिनों अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की भीड़ जुट रही है। ये लोग खुद अपनी पहचान बताकर बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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