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टीकमगढ़ जिला अस्पताल में महिला दलाल कैमरे में कैद:सोनोग्राफी, डिलीवरी के लिए मरीजों से वसूली, डॉक्टर भी शामिल

टीकमगढ़ जिला अस्पताल में शनिवार को डिलीवरी के नाम पर पैसों के लेनदेन का मामला सामने आया है। अस्पताल में सक्रिय महिला डॉक्टरों के कई दलाल मरीजों से अवैध वसूली कर रहे हैं। इस पूरे मामले का खुलासा अस्पताल में सक्रिय एक महिला दलाल ने खुद किया है। दलाल महिलाओं को सोनोग्राफी कराने के बहाने निजी क्लीनिक पर ले जाते हैं। इसके बाद उन्हें संबंधित महिला डॉक्टर के सरकारी बंगले या निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया जाता है। इसके बदले में महिला डॉक्टरों द्वारा दलालों को मोटी रकम दी जाती है। हर सोनोग्राफी पर 30 रुपए मिलते हैं दलाल ने बताया कि प्रत्येक सोनोग्राफी पर 30 रुपए, बंगले पर मरीज ले जाने पर 100 रुपए और नर्सिंग होम में भर्ती कराने पर 500 से 1000 रुपए तक कमीशन मिलता है। इसके अतिरिक्त, दलालों को महिला डॉक्टर की ओर से 5 हजार रुपए मासिक वेतन भी दिया जाता है। महिला दलाल ने खुद को टीकमगढ़ के लुकमान चौराहे का निवासी बताया है। इन डॉक्टरों के नाम आए सामने महिला एजेंट के अनुसार, वह जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. लता लक्ष्मी, डॉ. आभा सिंह, डॉ. रश्मि जैन और डॉ. शालू जौहरी सहित अन्य महिला डॉक्टरों के लिए काम करती है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध होने के बावजूद, गर्भवती महिलाओं को निजी क्लीनिक पर सोनोग्राफी के लिए भेजा जाता है, जिसमें एजेंट और डॉक्टर दोनों को कमीशन मिलता है। ऐसे चलता है वसूली का खेल दलाल ने यह भी बताया कि डॉ. लता लक्ष्मी जिला अस्पताल के अलावा अपने सरकारी बंगले पर भी मरीजों को देखती हैं। उन्होंने इंद्रपुरी कॉलोनी में एक निजी नर्सिंग होम भी खोल रखा है। इसी तरह डॉ. आभा सिंह, डॉ. शालू जौहरी और डॉ. रश्मि जैन भी अपने बंगलों पर मरीजों का इलाज करती हैं। इन बंगलों पर गर्भवती महिलाओं को ले जाने पर एजेंट को कमीशन दिया जाता है। 25 हजार तक का बिल बनाते हैं महिला एजेंट का दावा है कि डॉ. लता लक्ष्मी जिला अस्पताल में सामान्य डिलीवरी से सीधे मना कर देती हैं और ऑपरेशन कर देती हैं। सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला के ऑपरेशन के लिए 4 से 5 हजार रुपए वसूले जाते हैं, जबकि उनके निजी नर्सिंग होम में डिलीवरी कराने पर 20 से 25 हजार रुपए का बिल बनता है। पुलिस से सहयोग नहीं मिलता इस मामले में सिविल सर्जन डॉक्टर अमित शुक्ला का कहना है कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड को दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी खुली है, लेकिन कई मामलों में समय रहते पुलिस का सहयोग नहीं मिलता। डिलीवरी के लिए पैसे मांगने की शिकायत अगर कोई करता है तो डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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