मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में ससुर के नए मकान के सेप्टिक टैंक में दामाद और उसका छोटा भाई जहरीली गैस की चपेट में आ गए। हादसे में विजय पंवार (38) और उनके छोटे भाई संजय पंवार (30) की मौत हो गई। गुरुवार को दोनों का सिविल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम हुआ। गृहगांव डिवटिया में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार सुबह सिविल अस्पताल और घटनास्थल पहुंची। वहां मौजूद परिजन और प्रत्यक्षदर्शी अब भी सदमे में थे। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं रो रही थीं। मृतकों के चाचा जीवन पंवार ने नम आंखों से कहा- हमारा तो परिवार ही उजड़ गया। दोनों भतीजों के दो-दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब तक मेहनत-मजदूरी से घर चल रहा था। अब क्या होगा। दोनों बहुएं तो कभी घर से बाहर निकली ही नहीं हैं। जब से भतीजों के नहीं रहने की खबर मिली है, उनके माता-पिता सुधबुध खो बैठे हैं। ससुर के नए मकान का काम कर रहे थे दोनों भाई जिस मकान में हादसा हुआ, वह विजय के ससुर ओमप्रकाश पवार का है। दोनों भाई सेंट्रिंग और राजमिस्त्री ठेकेदार थे और उन्होंने ससुर के नए मकान का काम अपने जिम्मे लिया था। गांव में वे अपना मकान भी बनवा रहे थे, इसलिए दोनों जगह निर्माण सामग्री की अदला-बदली होती रहती थी। ससुर के मकान में करीब 20 बाय 10 फीट का सेप्टिक टैंक बनाया गया था। ऊपर दो बाय दो फीट का ढक्कन लगा था, जिसमें एक बार में सिर्फ एक व्यक्ति ही उतर सकता था। टैंक में करीब आधा फीट पानी भी भरा था और करीब एक महीने से वह बंद था। पहले संजय उतरा, फिर भाई को बचाने विजय भी टैंक में गया परिजन के मुताबिक, दोनों भाई जल्दी में थे, क्योंकि उन्हें अपने मकान के लिए सेंट्रिंग की जरूरत थी। आधी सेंट्रिंग निकालकर गाड़ी में रख भी दी गई थी। इसके बाद सबसे पहले संजय टैंक में उतरा, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आया। छोटे भाई की चिंता में विजय उसे देखने और बाहर निकालने के लिए नीचे उतरा, लेकिन वह भी वापस नहीं लौटा। मोबाइल की टॉर्च में दिखा दर्दनाक मंजर दोनों के बाहर नहीं आने पर उनके साथ काम कर रहे मुकेश परिहार ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर टैंक में झांका। अंदर का मंजर देखकर उसके होश उड़ गए। दोनों भाई बेहोश की हालत में पड़े थे। शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया, लेकिन इस दौरान वह खुद भी बेहोश हो गया। परिवार के लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पंखे से पहुंचाई हवा, लेकिन नहीं बच सकीं जानें मौके पर पहुंचे पिंकू पंवार ने बताया कि उन्हें तुरंत समझ में आ गया था कि मामला जहरीली गैस का है। उन्होंने लोगों से टेबल फैन मंगवाया और टैंक में ताजी हवा पहुंचाने की कोशिश की। मोबाइल की रोशनी में दोनों भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए दिखाई दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि विजय ने संजय को ऊपर निकालने की कोशिश की होगी, लेकिन वह खुद भी गैस की चपेट में आ गया। कुछ लोग टैंक में उतरने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। करीब 15 से 20 मिनट तक हवा पहुंचाने की कोशिश होती रही, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीसरे मजदूर की हालत गंभीर सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। तीनों मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने विजय और संजय को मृत घोषित कर दिया। मुकेश परिहार की हालत गंभीर होने पर उसे पहले जिला अस्पताल और बाद में भोपाल रेफर किया गया। एक साथ उठीं दोनों भाइयों की अर्थियां गुरुवार दोपहर दोनों भाइयों के शवों का एक साथ पोस्टमॉर्टम हुआ। जैसे ही शव गांव पहुंचे, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। पिता कुछ बोलने की हालत में नहीं थे। दोनों पत्नियां बेसुध थीं। बच्चे यह भी नहीं समझ पा रहे थे कि उनके पिता के साथ क्या हुआ है। परिजन और ग्रामीणों ने दोनों की अर्थियां तैयार कीं। जब एक साथ दोनों अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। इसके बाद दोनों भाइयों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक महीने से बंद था सेप्टिक टैंक, जांच जारी थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार ने बताया- सेप्टिक टैंक करीब एक महीने पहले बनाया गया था और किसी हादसे से बचने के लिए उसे ढक्कन लगाकर बंद कर दिया गया था।लंबे समय तक बंद रहने के कारण टैंक में जहरीली गैस जमा हो गई थी। दोनों भाई बिना किसी सुरक्षा किट के टैंक में उतरे थे। हादसे का शिकार हो गए। ……………………………………. यह भी पढ़ें- सेप्टिक टैंक में उतरे 2 भाई, जहरीली गैस से मौत मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई नगर में बुधवार शाम सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से दम घुटने पर 2 भाइयों की मौत हो गई। एक भाई को बचाने के लिए दूसरा टैंक में उतरा, लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सका। तीसरे मजदूर की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया है। पढ़ें पूरी खबर
