फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर गेट के पास खड़ा एक यात्री विमान अचानक आगे की तरफ झुक गया। विमान का अगला पहिया टूटने से उसका सामने वाला हिस्सा सीधे जमीन पर जा गिरा। हादसे में कई कर्मचारी घायल हो गए। यह घटना तब हुई, जब जर्मन एयरलाइंस लुफ्थांसा के बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान की तैयारी में था। उस समय यात्री विमान में सवार नहीं हुए थे, लेकिन क्रू मेंबर और ग्राउंड स्टाफ अंदर मौजूद थे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में विमान का अगला हिस्सा तेजी से नीचे गिरता दिखा। घटना के तुरंत बाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी टीमें पहुंचीं। लुफ्थांसा ने बताया कि घायलों का इलाज चल रहा है। यह विमान फ्रैंकफर्ट से लॉस एंजिलिस जाने वाला था। जिस विमान के साथ हादसा हुआ, वह नया बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर था और जनवरी 2026 से ही नियमित सेवा में शामिल हुआ था। फिलहाल हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… नेपाल के विदेश मंत्री आज दिल्ली पहुंचेंगे, बालेन शाह सरकार बनने के बाद पहली बड़ी भारत यात्रा नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल आज दोपहर भारत पहुंचे। यह यात्रा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर हो रही है। वे शनिवार शाम को जयशंकर के साथ औपचारिक बैठक करेंगे और रविवार दोपहर नेपाल लौट जाएंगे। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के मार्च में सत्ता में आने के बाद यह भारत के साथ सबसे उच्च स्तरीय सरकारी संपर्क माना जा रहा है। इसलिए इस यात्रा पर दोनों देशों की खास नजर है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने भी भारत में हैं। उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। ऐसे में नेपाल से लगातार हो रहे उच्च स्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के रिश्तों में नई सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प बोले- PM मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत के साथ जल्द ट्रेड डील होगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता हो सकता है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे संबंध अच्छे हैं और हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि भारत ने कई सालों तक अमेरिका का फायदा उठाया। उन्होंने कहा- भारत अमेरिका पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाता था, जबकि अमेरिका को उससे ज्यादा फायदा नहीं मिलता था। ट्रम्प ने दावा किया कि अब स्थिति बदल गई है और अमेरिका भारत के साथ व्यापार से अच्छा पैसा कमा रहा है। उन्होंने कहा- हमें एक समझौते तक पहुंचना है क्योंकि मैं PM मोदी को बहुत पसंद करता हूं। ट्रम्प के बयान के बीच अमेरिका ने भारत सहित 54 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन देशों में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक नहीं है। पूरी खबर पढ़ें… भारतीय मूल की महिला को 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ₹85 करोड़ मिले ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय मूल की वर्षा गोहिल ने 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 7.5 लाख पाउंड (लगभग 85 करोड़ रुपए) जीते हैं। मामला तलाक केस का है। कोर्ट ने वर्षा को उनके पूर्व पति भद्रेश गोहिल की संपत्ति में हिस्सेदारी देने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा ने 2002 में पति से तलाक के लिए अर्जी दी थी। उस समय कपल के बीच एग्रीमेंट हुआ, जिसके तहत वर्षा को लगभग 270,000 पाउंड (लगभग 3.5 करोड़ रुपये) और परिवार की प्यूजो कार मिली। वर्षा को शक था कि पति ने अपनी सारी संपत्ति का खुलासा नहीं किया है। सच तब सामने आया जब नाइजीरिया के पूर्व गवर्नर जेम्स इबोरी के सहयोगियों से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भद्रेश गोहिल मुख्य आरोपी बन गए। अधिकारियों ने उन पर ऑफशोर स्ट्रक्चर और ग्राहक खातों से लाखों पाउंड ट्रांसफर करने में मदद करने का आरोप लगाया। लंबी जांच के बाद, उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, जालसाजी और धोखाधड़ी की साजिश का दोषी पाया गया। 2011 में, उन्हें 10 साल जेल की सजा सुनाई गई। जांच के दौरान भद्रेश की करोड़ों रुपए की संपत्तियां का खुलासा हुआ, जिनकी जानकारी तलाक के समय नहीं दी गई थी। इसके बाद वर्षा ने पुराने तलाक एग्रीमेंट को चुनौती दी। मामला ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई पति या पत्नी अपनी संपत्ति छिपाता है, तो उसे इसका फायदा नहीं मिल सकता। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने माना कि संपत्ति का एक हिस्सा वैध कारोबार से कमाया गया था और वह वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा है। कोर्ट ने वर्षा गोहिल को 85 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया। जज ने भद्रेश गोहिल को बेईमान बताते हुए उनकी दलीलों को खारिज कर दिया। हाल ही में कोर्ट ऑफ अपील ने आगे इस केस में किसी अपील पर रोक लगा दी, जिससे 23 साल पुराना यह विवाद आखिरकार खत्म हो गया।
