प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र मंडीदीप इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। यहां की वायु गुणवत्ता (AQI) लगातार ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सुस्ती के कारण स्थानीय निवासियों और श्रमिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। दिल्ली से भी बदतर हालात, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता मंडीदीप में प्रदूषण की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 25 मई को AQI 152 और 26 मई को 196 दर्ज किया गया, जबकि आज यह 155 पर रहा। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में यहां का सूचकांक 393 तक पहुंच गया था, जो उस समय दिल्ली के प्रदूषण स्तर से भी अधिक था। नियमों के मुताबिक, चिमनियों की ऊंचाई बढ़ाने और उन पर कंपनी का नाम लिखने का निर्णय लिया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस काम नहीं हुआ है। कैंसर और फेफड़ों की बीमारियाें का खतरा सिविल अस्पताल के डॉ. विवेक नागर ने चेतावनी दी है कि यह जहरीला धुआं जानलेवा साबित हो रहा है। चिमनियों के आसपास काम करने वाले मजदूरों में नोजल कैविटी (नाक और दिमाग का कैंसर) होने की आशंका रहती है। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्र के पास रहने वाले नागरिकों में फेफड़ों और आंतों के कैंसर सहित सांस संबंधी गंभीर बीमारियां तेजी से पनप रही हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लापरवाह कारखाना संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न किए जाने से लोगों में आक्रोश है। वहीं चिकित्सा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोग मास्क का उपयोग करें और सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत जांच कराएं। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा ने बताया- अब एनजीटी के आदेशानुसार चिमनियों में ‘कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग सिस्टम’ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे निकलने वाले धुएं की चौबीसों घंटे निगरानी और रिकॉर्डिंग हो सकेगी।
