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ट्रिपल मर्डर केस…सीसीटीवी से खुला साइको किलर का राज:पहले दोस्ती करता फिर मर्डर; तत्कालीन सीएम शिवराज ने कहा-नरपिशाच को समाज में नहीं रहने देंगे

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 26 नवंबर 2020 की सुबह रतलाम में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक फ्लैट में एक ही परिवार के तीन लोगों की लाशें मिलीं। सलून संचालक गोविंदराम सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और 20 वर्षीय बेटी दिव्या की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। देव दीपावली की रात पटाखों के शोर में गोलियों की आवाज किसी ने नहीं सुनी। घर का सामान बिखरा था, स्कूटी गायब थी। पुलिस के सामने सवाल था कि यह सिर्फ लूट थी या किसी बेहद खतरनाक दिमाग की साजिश? पढ़िए आगे क्या हुआ… करीब 20 हजार मोबाइल नंबरों की जांच और 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। इनमें से एक की पहचान होते ही जांच की दिशा बदल गई। वह कोई सामान्य अपराधी नहीं था, बल्कि हत्या, अपहरण और लूट जैसे कई गंभीर मामलों में शामिल दिलीप देवल था। गुजरात के दाहोद का रहने वाला दिलीप पहले से हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट चुका था। पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया था और फर्जी आधार कार्ड बनवाकर अलग-अलग नामों से रतलाम में रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में वह बेहद चालाक और हिंसक अपराधी माना जाता था। कैसे बना सोलंकी परिवार उसका निशाना जांच में पता चला कि लॉकडाउन के दौरान दिलीप का गोविंदराम सोलंकी के घर आना-जाना शुरू हुआ था। गोविंदराम घर पर ही लोगों के बाल काटते थे और दिलीप भी वहीं पहुंचता था। धीरे-धीरे उसने परिवार का भरोसा जीत लिया। इसी दौरान उसे पता चला कि गोविंदराम ने हाल ही में जमीन बेची है और उनके पास बड़ी रकम आने वाली है। बस यहीं से लूट की साजिश तैयार हुई। दिलीप ने अपने साथ अनुराग बॉबी, गोलू और लाला भाभोर को शामिल किया।
देव दीपावली की रात… और तीन हत्याएं 25 नवंबर 2020 की रात करीब साढ़े सात बजे चारों आरोपी राजीव नगर पहुंचे। गोलू बाहर निगरानी के लिए खड़ा रहा, जबकि दिलीप, अनुराग और लाला घर में घुस गए।
उस वक्त शारदा सोलंकी कमरे में टीवी देख रही थीं। दिलीप ने अंदर घुसते ही उनके सिर में गोली मार दी। आवाज सुनकर दिव्या कमरे से बाहर आई। सामने हथियारबंद बदमाशों को देखकर वह कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उसे भी गोली मार दी गई। इसके बाद आरोपी घर में नकदी और जेवर तलाशने लगे। लेकिन तभी रात करीब 9 बजे गोविंदराम दुकान से वापस लौट आए। जैसे ही उन्होंने दरवाजे के भीतर कदम रखा, दिलीप ने उन पर भी फायर कर दिया। स्कूटी से भागे, लेकिन कैमरे से नहीं बच सके हत्या के बाद आरोपी घर से नकदी और जेवर लेकर निकले। जाते समय वे दिव्या की स्कूटी की चाबी भी साथ ले गए। थोड़ी दूरी पर गोलू स्कूटी स्टार्ट कर इंतजार कर रहा था। आरोपी वहां पहुंचे, कपड़े बदले और अलग-अलग रास्तों से फरार हो गए। उन्हें लगा कि उन्होंने कोई सबूत नहीं छोड़ा, लेकिन इलाके के सीसीटीवी कैमरे उनकी पूरी मूवमेंट रिकॉर्ड कर चुके थे। पुलिस ने भी चालाकी दिखाई। उसने आरोपियों के चेहरे सार्वजनिक करने के बजाय सिर्फ स्कूटी की तस्वीरें जारी कीं। इससे आरोपी निश्चिंत हो गए। अनुराग तो दोबारा गांधी नगर इलाके में घूमने भी लगा। पुलिस पहले से निगरानी कर रही थी। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और जल्द ही पूरी साजिश सामने आ गई।
अनुराग ने बताया कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड दिलीप देवल था। इसके बाद पुलिस ने गोलू और लाला को भी दाहोद से गिरफ्तार कर लिया। एक और हत्या से खुला साइको किलर का राज पूछताछ में पता चला कि दिलीप सिर्फ इसी ट्रिपल मर्डर का आरोपी नहीं था। पांच महीने पहले, 18 जून 2020 को रतलाम के कस्तूरबा नगर में हुई डॉ. प्रेमकुंवर सिसौदिया की हत्या के पीछे भी वही था। दिलीप की पहचान एक महिला विशाला सोलंकी से हुई थी, जिन्होंने अपना स्कूल करीब 70 लाख रुपए में बेचा था। डॉ. प्रेमकुंवर उनकी दोस्त थीं। मकान देखने के बहाने दिलीप उनके संपर्क में आया और बातचीत के दौरान उसने समझ लिया कि घर में नकदी और जेवर हैं। इसके बाद उसने साथियों के साथ मिलकर हत्या और लूट की योजना बनाई। घर में घुसकर डॉ. प्रेमकुंवर की हत्या कर दी गई और लाखों का सामान लूट लिया गया। उस वक्त पुलिस इस केस की गुत्थी नहीं सुलझा पाई थी। पहले भरोसा जीतता, फिर मर्डर करता था दिलीप देवल का अपराध करने का तरीका लगभग एक जैसा था। वह पहले लोगों से दोस्ती करता, घर आता-जाता, आर्थिक स्थिति की जानकारी निकालता और फिर लूट की योजना बनाता। अगर उसे लगता कि कोई उसे पहचान सकता है, तो वह हत्या करने से भी पीछे नहीं हटता था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह मोबाइल पर लूट और हत्या के वीडियो देखा करता था और उसी तर्ज पर वारदात की प्लानिंग करता था। उसके निशाने पर अक्सर छोटे परिवार, अकेली महिलाएं या ऐसे लोग होते थे, जिनके बारे में उसे लगता था कि वे आसानी से शिकार बन सकते हैं। 2020 तक उसके द्वारा की गई छह हत्याओं का खुलासा हो चुका था। इसी वजह से पुलिस ने उसे साइको किलर घोषित किया था। पुलिस के साथ आखिरी मुठभेड़, दहशत खत्म 3 दिसंबर 2020 को पुलिस को सूचना मिली कि दिलीप खाचरोद रोड इलाके में देखा गया है। तत्कालीन एसपी गौरव तिवारी के निर्देशन में पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी शुरू की। दिलीप एक किराए के मकान में पहुंचने वाला था। जैसे ही उसने पुलिस को देखा, उसने तुरंत रिवॉल्वर निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मुठभेड़ में दो सब इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद दिलीप देवल गोली लगने से मारा गया। केस अभी जारी है, फैसला आना बाकी दिलीप के मारे जाने के बाद भी रतलाम ट्रिपल मर्डर केस की कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई। मामले में कोर्ट में सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
लाला और गोलू के ऊपर अब भी मुकदमा चल रहा है। इस मामले में दोनों का अपराध सिद्ध होता है या नहीं अभी ये न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें… पटाखों के शोर में गोलियों से भून डाला, किसी ने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी रतलाम के उस तिहरे हत्याकांड की जिसने साल 2020 में पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। राजीव नगर के एक फ्लैट में एक ही परिवार के तीन लोगों की लाश मिली थी। इनमें 20 साल की युवती दिव्या सोलंकी भी शामिल थी। पढ़ें पूरी खबर…

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