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‘सपना’ की परीक्षा देने पहुंची ‘विशाखा’:3 हजार रुपए में हायर की गई, ग्रेजुएशन के पांच सेमेस्टर में भी सॉल्वर बैठाने का संदेह

बीकॉम ऑनर्स के छठवें सेमेस्टर की छात्रा सपना भदौरिया का जीएसटी का पेपर था। उसकी जगह इंजीनियरिंग कॉलेज की बीटेक छात्रा विशाखा माहेश्वरी परीक्षा देने पहुंच गई। एनएसयूआई नेता जयेश परिहार ने स्टाफ से शिकायत की। स्टाफ ने विशाखा से पूछताछ की तो वह घबरा गई और कबूल कर लिया कि वह सपना की जगह परीक्षा देने आई थी। इसके बदले उसे तीन हजार रुपए मिले थे। सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों में तीन दिन के भीतर ऐसे दो मामले सामने आए हैं जिसमें सॉल्वर से परीक्षा दिलाने की कोशिश की गई। इससे परीक्षा व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या है पूरा मामला पढ़िए ये रिपोर्ट… एनएसयूआई नेता जयेश का दावा है कि सपना की क्लास के छात्रों ने उन्हें पहले ही जानकारी दी थी कि वह कई सेमेस्टर से खुद परीक्षा देने नहीं आती और उसकी जगह दूसरी लड़कियां पेपर देती हैं। इसी सूचना के आधार पर एनएसयूआई कार्यकर्ता परीक्षा केंद्र पर नजर रखे हुए थे। पेपर शुरू होते ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद फर्जी परीक्षार्थी पकड़ी गई। पांच पुराने सेमेस्टर भी जांच के दायरे में पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या सपना पहले भी सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिलाती रही है। माधवनगर थाना टीआई गजेंद्र पचोरिया ने बताया कि विश्वविद्यालय से पुराने सेमेस्टर की उत्तरपुस्तिकाएं मांगी गई हैं। उनकी जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि पूर्व में भी किसी और ने परीक्षा दी थी या नहीं। एनएसयूआई का आरोप है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित रैकेट हो सकता है। जयेश परिहार के मुताबिक, ‘पिछले कई सेमेस्टर में सपना खुद परीक्षा देने नहीं आई। हर बार कोई दूसरी लड़की पेपर देकर चली जाती थी। अब विशाखा पकड़ी गई है, इसलिए मामला खुला।’ सॉल्वर गैंग की आशंका, तीसरा आरोपी हिरासत में पुलिस ने मामले में तीसरे आरोपी ऋषभ को भी हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि उसी ने विशाखा को सपना के लिए परीक्षा देने को तैयार किया था।
पैसे के लेनदेन में भी सावधानी बरती गई। सपना से सीधे पैसे न लेकर उसकी सहेली के खाते में राशि डलवाई गई और फिर वहां से रकम ऋषभ तक पहुंची। पुलिस ने ऋषभ का मोबाइल जब्त कर लिया है और उसके संपर्कों की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या उसने अन्य छात्रों के लिए भी सॉल्वर उपलब्ध कराए थे। विश्वविद्यालय का सिस्टम सवालों के घेरे में सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय में करीब 480 कोर्स की परीक्षाएं आयोजित होती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर किसी छात्र संगठन को सूचना देनी पड़े, तब जाकर फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा जाए, तो विश्वविद्यालय की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि अब परीक्षा में प्रवेश के लिए केवल एडमिट कार्ड नहीं, बल्कि आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया है। उन्होंने माना कि पहले व्यवस्था में गड़बड़ी की गुंजाइश थी। कुलगुरु ने यह भी कहा कि परीक्षा ड्यूटी में बड़ी संख्या में गेस्ट फैकल्टी लगाई जाती है। कई बार विवाद से बचने या दबाव के कारण वे सख्ती नहीं कर पाते। अब उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी दबाव में आए बिना पहचान सत्यापन सुनिश्चित करें। काॅमर्स का पेपर, सॉल्वर बीटेक की छात्रा मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बीकॉम की छात्रा ने अपनी जगह बीटेक छात्रा को परीक्षा देने भेजा। जबकि दोनों पाठ्यक्रमों का सिलेबस पूरी तरह अलग है। कामर्स में बिजनेस, अकाउंटिंग और फाइनेंस आधारित विषय होते हैं, जबकि बीटेक तकनीकी और इंजीनियरिंग आधारित कोर्स है। कुलगुरु बोले- अब किसी परीक्षा में नहीं बैठ पाएगी छात्रा कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई होगी कि संबंधित छात्रा भविष्य में विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेगी। जहां भी सिस्टम में खामी मिलेगी, वहां सुधार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब आधार कार्ड सत्यापन के बिना किसी छात्र को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई होगी। टीआई बोले- पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहे माधवनगर थाना टीआई गजेंद्र पचोरिया ने बताया कि दोनों छात्राओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब ऋषभ से पूछताछ की जा रही है। उसके मोबाइल की जांच के साथ पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय से पुरानी कॉपियां मांगी गई हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पहले भी किसी और ने परीक्षा दी थी या नहीं। फौजी की जगह परीक्षा देते पकड़ा गया दोस्त माधव साइंस कॉलेज में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया। यहां बीएससी थर्ड ईयर फिजिक्स की परीक्षा के दौरान वीक्षक डॉ. रत्नेश शर्मा को एक छात्र पर शक हुआ। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह अपने दोस्त ब्रजपाल की जगह परीक्षा देने आया था। टीआई पचोरिया के मुताबिक, ब्रजपाल की नौकरी सेना में लग चुकी है और वह ड्यूटी पर था। उसकी जगह उसका दोस्त राजेश, जो महाकाल मंदिर में सिक्योरिटी गार्ड है, परीक्षा देने पहुंचा था। दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई को लेकर क्रेडिट वॉर भी शुरू सपना प्रकरण में कार्रवाई के श्रेय पर विश्वविद्यालय प्रशासन और एनएसयूआई आमने-सामने आ गए हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि उनकी सूचना के बाद कार्रवाई हुई, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन खुद लंबे समय तक मूकदर्शक बना रहा।
जयेश परिहार ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्राचार्य, वीक्षक, प्रोफेसर और फ्लाइंग स्क्वॉड जैसी पूरी व्यवस्था है। फिर भी फर्जी परीक्षार्थी क्यों नहीं पकड़ में आए? 2023 में भी पकड़ा गया था फर्जी परीक्षार्थी ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2023 में माधव आर्ट्स कॉलेज में भी सेकंड ईयर के छात्र की जगह दूसरा युवक परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। उस समय पूछताछ में उसने स्वीकार भी कर लिया था कि वह किसी और के स्थान पर परीक्षा देने आया है, लेकिन कार्रवाई से पहले ही मौके से फरार हो गया। उस मामले में न तो पुलिस शिकायत दर्ज हुई और न ही विश्वविद्यालय स्तर पर गंभीर जांच की गई। अब लगातार सामने आ रहे मामलों ने विश्वविद्यालय की परीक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ये खबर भी पढ़ें… बीकॉम की परीक्षा दे रही थी बीटेक की छात्रा उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में सोमवार को बीकॉम परीक्षा के दौरान फर्जी तरीके से परीक्षा दिलाने का मामला सामने आया। एक छात्रा की जगह दूसरी छात्रा परीक्षा देती पकड़ी गई। इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। पढ़ें पूरी खबर…

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