Homeमध्यप्रदेश8 साल बाद ज्येष्ठ माह में पड़ेगा अधिकमास:17 मई से 15 जून...

8 साल बाद ज्येष्ठ माह में पड़ेगा अधिकमास:17 मई से 15 जून तक शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों पर रोक

करीब 8 वर्ष बाद इस बार जेष्ठ माह में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार 17 मई से अधिकमास मास की शुरुआत होगी, जो 15 जून तक चलेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अधिकमास के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, तीर्थ यात्रा, सत्संग, कल्पवास, जप-तप, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के मुताबिक हिंदू पंचांग की गणना विक्रम संवत पर आधारित होती है और वर्तमान में विक्रम संवत 2082 चल रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकमास तब बनता है, जब पूरे चंद्र मास के दौरान सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता। 2 से 3 वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है दरअसल, चंद्र मास और सौर मास की गणना में होने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए हर 2 से 3 वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में किए गए व्रत, जप, तप और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार जेष्ठ माह को हिंदू पंचांग में विशेष प्रभावशाली माना गया है और इसका संबंध जेष्ठा नक्षत्र के पक्षीय अनुक्रम से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 1988, 1999, 2007 और 2018 में जेष्ठ अधिकमास पड़ा था, जबकि अब 2026 में यह विशेष संयोग बन रहा है। धर्माचार्यों का कहना है कि अधिकमास आत्मचिंतन, साधना और धार्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु की विशेष आराधना कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अधिकमास में ग्रहों का नक्षत्र राशि परिवर्तन भी होगा भगवान पुरुषोत्तम की साधना करें हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ का काल लगभग 58 से 59 दिनों तक होगा। मई वैसे ही सबसे बड़ा माह माना जाता है। अधिकमास में भगवान पुरुषोतम की साधना की जाती है। इसलिए पुरुषोतम माह भी कहा जाता है। जिसे विशेष धार्मिक कर्मों और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि अधिकमास में धर्म से संबंधित मांगलिक कार्य (विवाह और गृह प्रवेश, मुंडन आदि छोड़कर) तीर्थ यात्रा, भागवत, भजन, पूजन, कीर्तन, ब्राह्मणों को दान और एक माह तक पवित्र नदियों में स्नान करें। शिप्रा नदी में स्नान के बाद महाकालेश्वर मंदिर में पूजन अर्चन कर पितरों का तर्पण करने की भी परंपरा है। कितने दिन का होगा अधिकमास
साल 2026 में ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 22 मई से होगा और यह 29 जून तक चलेगा। अधिमास का आगमन 17 मई रविवार को होगा और 15 जून 2026 सोमवार को समापन होगा।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here