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8 गाड़ियों का हिसाब मांगा तो मंत्री को आया गुस्सा:एसपी ने बढ़ा दी पतियों की टेंशन; अब सिंधिया ने चाय बागान में तोड़ी पत्तियां

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। काफिले पर सवाल पूछा तो मंत्री झल्लाए
दमोह में मंत्री इंदर सिंह परमार एक पत्रकार पर भड़क गए। पत्रकार ने मंत्री से उनकी गाड़ियों के काफिले को लेकर सवाल पूछ लिया था। इस पर मंत्री थोड़ा झल्ला गए। फिर पत्रकार को हल्का सा धकियाते हुए कहा- ‘अपने जरा दिमाग को थोड़ा ठीक ढंग से सोचने की जरूरत है।’ मंत्री सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इससे पहले वे बीजेपी कार्यालय गए थे। इसी को लेकर पत्रकार ने उनसे पूछा कि आप बीजेपी कार्यालय में मीटिंग में गए थे, आपके काफिले में 8 गाड़ियां थीं। इस पर मंत्री पलटे और थोड़ा सख्त लहजे में कहा- ‘हमारे काफिले में केवल दो गाड़ियां थीं, पायलट की गाड़ी और एक हमारी गाड़ी, ठीक है।’ इतना कहकर मंत्री आगे बढ़ने लगे। तभी पत्रकार ने पूछा- ‘तो बाकी गाड़ियां?’ इस पर मंत्री ने जवाब दिया- ‘कलेक्टर को मीटिंग में जाना था, वो नहीं आएंगे गाड़ी से क्या?’ इसके बाद मंत्री ने भले ही झल्लाते हुए, लेकिन सभी गाड़ियों का हिसाब दे दिया। हालांकि जिस लहजे में जवाब दिया, उसकी अब जमकर चर्चा हो रही है। सिंधिया ने चाय के बागान में तोड़ी पत्तियां
सिक्किम के दौरे पर गए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने पीठ पर डलिया लटकाई और चाय बागान में चाय की पत्तियां तोड़ने लगे। इस दौरान उन्होंने चाय बागान में काम कर रहीं महिलाओं से भी बातचीत की। सिंधिया ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किया। उन्होंने लिखा- आज सिक्किम के नामची में स्थित हरे-भरे, धुंध से भरे तेमी चाय बागानों में सैर की। आज चाय बागानों में मेहनती चाय तोड़ने वालों और बागान कर्मचारियों के साथ समय बिताया और उनसे बात की। सिंधिया ने आगे कहा- मैंने खुद भी चाय तोड़ने का प्रयास किया और बहुत जल्दी ही महसूस किया कि इसमें कितनी कुशलता, गति और मेहनत लगती है। मैं उन चाय तोड़ने वालों के कौशल और समर्पण के प्रति हार्दिक सम्मान व्यक्त करता हूं, जो इसमें अपना दिलो-जान लगा देते हैं। खरी बात ये है कि सिंधिया कहीं शिवराज सिंह की राह पर तो नहीं चल पड़े। दरअसल, असम चुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान भी चाय बागान पहुंचे थे, जहां उन्होंने चाय की पत्तियां तोड़ी थीं और तस्वीरें भी खिंचवाई थीं। उस दौरान उनके आगे-पीछे कैमरों की लंबी फौज भी नजर आई थी। घुड़सवारी करते दिखे पंडित प्रदीप मिश्रा कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा एक बार फिर अपने अलग अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वे पारंपरिक कथा मंच से हटकर स्टाइलिश लुक में नजर आए। चेहरे पर काला चश्मा, भगवा वस्त्र और घुड़सवारी का आनंद लेते पंडित प्रदीप मिश्रा का अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है। खास बात यह रही कि पंडित प्रदीप मिश्रा ने खुद अपने इस खास पल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरों में वे पूरी तरह रिलैक्स और अलग अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर लोग भी इस नए रूप को लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कह रहे हैं कि ये तो आध्यात्म और स्टाइल का अनोखा संगम है। एसपी ने महिलाओं को बताया ‘घरेलू कानून’ गुना में एसपी हितिका वासल ने महिलाओं को ऐसा ‘घरेलू कानून’ बता दिया, जिसे सुनकर कई पतियों की टेंशन बढ़ गई होगी। उन्होंने कहा कि अगर पति नशे में धुत होकर घर आए तो उसे खाना मत दो। इसी तरह, अगर पति हेलमेट पहनकर नहीं जाए तो उससे कह दो कि आज रोटी नहीं दूंगी। एसपी बमोरी क्षेत्र के मंदोल गांव में जन चौपाल को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं पूरे घर का वातावरण तय करती हैं। उन्होंने लोगों को हेलमेट पहनने और जिम्मेदारी से वाहन चलाने के लिए भी जागरूक किया। हालांकि, मजाकिया लहजे में एसपी ने यह भी कहा कि आज सारे पुरुष मुझसे नाराज हो जाएंगे और बोलेंगे कि मैडम हमारी महिलाओं को गलत सिखाकर चली गईं। उनकी इस बात पर चौपाल में जमकर ठहाके भी लगे। अब लोग कह रहे हैं कि मैडम का मकसद तो अच्छा था, लेकिन फॉर्मूला थोड़ा अजीब बता गईं। इनपुट सहयोग – आशीष रघुवंशी (गुना), कैलाश दुबे (दमोह), महेंद्र ठाकुर (सीहोर) ये भी पढ़ें – मोदी की नहीं मानी, भाजपा के दो नेताओं को सजा: पूर्व मंत्री के आने से बिगड़ी व्यवस्था, कथावाचक ने सुनाई खरी-खोटी चलती कथा में माहौल किसी राजनीतिक रैली जैसा हो गया तो कथावाचक गुस्सा हो गए। उन्होंने मंच से ही श्रद्धालुओं को खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कहा- आप लोग कथा में बैठना सीखिए। आप किसी नौटंकी में नहीं बैठे हैं। दरअसल, कथा में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आने से कुछ समय के लिए व्यवस्थाएं बिगड़ गई थी। पूरी खबर पढ़ें

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