दूध से बने पनीर की जगह कम लागत वाले एनालॉग पनीर के इस्तेमाल को लेकर मध्यप्रदेश सरकार सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मंगलवार को इंदौर में कहा कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि इस संबंध में जल्द फैसला लिया जा सकता है। पूरी तरह दूध से नहीं होता तैयार एनालॉग पनीर देखने और पकाने में सामान्य पनीर जैसा ही नजर आता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसमें वेजिटेबल ऑयल, फैट, स्टार्च और प्लांट प्रोटीन जैसे गैर-डेयरी घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका पोषण प्रोफाइल भी पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग होता है। कम कीमत के कारण बढ़ा इस्तेमाल एनालॉग पनीर का इस्तेमाल बढ़ने की एक बड़ी वजह इसकी कम लागत बताई जाती है। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कम कीमत के कारण इसका उपयोग किया जा सकता है। वहीं, ग्राहक को सामान्य पनीर और एनालॉग पनीर देखने में लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वजह है कि सबसे बड़ा सवाल उपभोक्ता की जानकारी को लेकर उठता है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो ग्राहक को इसकी स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वह यह तय कर सके कि वह क्या खरीद रहा है या खा रहा है। असली और एनालॉग पनीर में अंतर असली पनीर दूध के प्रोटीन और फैट से तैयार होता है, जबकि एनालॉग पनीर में गैर-डेयरी वसा और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों की शक्ल और उपयोग समान होने के कारण सामान्य उपभोक्ता के लिए अंतर करना आसान नहीं होता। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत एनालॉग पनीर को अलग उत्पाद के रूप में लेबल करना आवश्यक है। ऐसे में इसकी बिक्री या उपयोग के दौरान उपभोक्ता को सही जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल में घी के 27 में से 13 नमूने असुरक्षित दूध, घी और दूध से बने उत्पादों में मिलावट न हो, इसलिए खाद्य एवं औषधि विभाग पूरे प्रदेश में अभियान चला रहा है। इस दौरान मिलावटखोरी के आंकड़े चौंका रहे हैं। विभाग के अनुसार, घी के कुल 27 सुरक्षित नमूनों में 13 भोपाल, 8 इंदौर के है। इन्हें लेकर अब आगे की कार्रवाई की जा रही है।पूरी खबर पढ़ें
