सतना जिले के मझगवां विकासखंड में कुपोषण से एक बच्ची की मौत हो गई। मामला सुरांगी गांव का है जहां चार माह के जुड़वा बच्चों में से मासूम बहन सुप्रांशी की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसका भाई नैतिक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। गंभीर हालत को देखते हुए बुधवार को उसे हायर सेंटर रीवा रेफर किया गया है। इस घटना ने सरकारी योजनाओं और जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं मीडिया के सवालों से बचने के लिए अफसरों द्वारा फोन तक रिसीव नहीं किए जा रहे हैं। झोलाछाप के भरोसे इलाज, बिगड़ी हालत15 दिन झोलाछाप से कराया इलाज जानकारी के मुताबिक, जुड़वा बच्चे पिछले लगभग 15 दिनों से बुखार और डायरिया से पीड़ित थे। परिजन उन्हें उपस्वास्थ्य केंद्र चौबेपुर या सीएचसी मझगवां ले जाने के बजाय जुगुलपुर गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। 15 दिनों में वे 5 बार उस डॉक्टर के पास गए। जब बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो 21 अप्रैल को शाम 5 बजे उन्हें मझगवां सीएचसी लाया गया। वहां से गंभीर कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जांच में सामने आया गंभीर कुपोषण (SAM) जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड में भर्ती करने के बाद जांच में सामने आया कि दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण (SAM श्रेणी) से ग्रसित थे। उनका वजन सामान्य से बेहद कम पाया गया। इलाज के दौरान बुधवार शाम बहन सुप्रांशी ने दम तोड़ दिया, जबकि भाई नैतिक की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। मां का दूध नहीं मिला, बकरी-गाय का दूध पिला रहे थे जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों को मां का दूध नहीं मिल रहा था। उन्हें बकरी और गाय का दूध पिलाया जा रहा था, जो इस उम्र में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। समय पर सही पोषण और उचित चिकित्सा न मिलने के कारण बच्चों की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। चार साल में कई मौतें फिर भी नहीं बदले हालात मझगवां क्षेत्र में कुपोषण से मौत का यह पहला मामला नहीं है। चार साल पहले सोमवती नाम की बच्ची की भी कुपोषण से मौत हो चुकी है। वहीं अब सुप्रांशी की जान चली गई। इसके अलावा करीब 20 दिन पहले 11 माह 20 दिन की एक अन्य बच्ची की भी मौत हो चुकी है। बावजूद इसके हालात में सुधार नहीं होना चिंताजनक है। आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल परिवार गांव में ही निवासरत होने के बावजूद बच्चों की स्थिति पर न तो आंगनवाड़ी केंद्र और न ही स्वास्थ्य विभाग की कोई सक्रिय निगरानी नजर आई। परिजनों का कहना है कि टीकाकरण के अलावा उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला और न ही आशा कार्यकर्ता द्वारा नियमित रूप से संपर्क किया गया। घटना सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। मीडिया द्वारा संपर्क करने पर कई अधिकारियों ने फोन रिसीव करना तक बंद कर दिया, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिर खड़े हुए बड़े सवाल हाल ही में इसी विकासखंड में कुपोषण से एक अन्य बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था, बल्कि पोषण योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या वाकई कुपोषण के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं। वजन सिर्फ 2.8 से 2.9 किलो सुरांगी निवासी विमला प्रजापति और नत्थू प्रजापति के इन जुड़वा बच्चों का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में हुआ था। बच्चों में बालक नैतिक का वजन 2 किलो 953 ग्राम और बालिका सुप्रांशी का वजन 2 किलो 862 ग्राम है। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि सामान्यतः 4 माह के बच्चे का वजन 4 से 5 किलो होना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, जन्म से 6 माह तक बच्चे को केवल स्तनपान कराना चाहिए, जिससे उसे पूरा पोषण मिलता है। मां विमला ने बताया कि वे बच्चों को गाय-भैंस का दूध पिला रही थीं। स्तनपान न होने के कारण ही बच्चों की यह स्थिति हुई है। 4 साल पहले भी गांव में कुपोषण से हुई थी बच्ची की मौत मामले को लेकर महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अभय द्विवेदी ने बताया कि यह जांच की जाएगी कि जुड़वा बच्चे सुरांगी गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत थे या नहीं। उल्लेखनीय है कि सुरांगी गांव में कुपोषण का यह पहला मामला नहीं है। लगभग 4 वर्ष पहले सितंबर 2022 में भी इसी गांव में सोमवती मवासी नामक एक बच्ची की कुपोषण के कारण मौत हो चुकी है।
