रतलाम के डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना की ईडब्ल्यूएस (EWS) मल्टी में रहने वाले 208 परिवारों से फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई बुधवार सुबह शुरू हो गई। नगर निगम की टीम प्रशासन और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान कई परिवारों का सामान घरों से बाहर निकालकर मकानों पर ताला लगाकर सील किया गया। वहीं, रहवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। नगर निगम की टीम ने फ्लैटों से सामान निकालकर लोडिंग वाहनों में रखना शुरू किया। महिलाएं अपने बच्चों को लेकर घरों के बाहर बैठ गईं और कार्रवाई का विरोध करती रहीं। कई रहवासी अपने घरों में ताला लगाकर कलेक्ट्रेट की ओर भी रवाना हुए। ऐसे चला पूरा घटनाक्रम: पुलिस और कांग्रेस नेता पारस सकलेचा के बीच हाईवोल्टेज ड्रामा सड़क पर लेटे पारस सकलेचा, बोले- “यहीं मर जाऊंगा” पीएम आवास योजना की ईडब्ल्यूएस मल्टी में 208 परिवारों को खाली कराने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेता पारस सकलेचा मौके पर पहुंचे और नगर निगम की कार्रवाई का विरोध शुरू किया। सकलेचा ने कार्रवाई रुकवाने की मांग करते हुए लोडिंग वाहन/ऑटो के सामने खड़े होकर उसे रोकने का प्रयास किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश के मौसम में गरीब परिवारों को बेघर करना गलत है। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने विरोध जारी रखा। इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। विरोध के दौरान सकलेचा सड़क पर बैठ गए और फिर लेट गए। मौके पर मौजूद महिला पुलिस अधिकारी ने उन्हें उठाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने साफ कहा, “मैं नहीं उठूंगा।” समर्थकों ने उनके समर्थन में “भाजपा सरकार मुर्दाबाद”, “गरीबों पर अत्याचार बंद करो” और “गरीबों की लड़ाई हम लड़ेंगे” जैसे नारे लगाए। पूरे परिसर में काफी देर तक नारेबाजी होती रही। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल और एम्बुलेंस बुला ली गई। आसपास मौजूद लोग पूरे घटनाक्रम का मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। इसी दौरान कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सलीम बागवान ने भी कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस ने उन्हें पकड़कर मौके से हटा दिया। विरोध जारी रहने पर पुलिस ने पारस सकलेचा को हटाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने जमीन पर बैठकर और लेटकर प्रतिरोध जारी रखा। कुछ देर बाद सकलेचा की तबीयत बिगड़ गई। मेडिकल स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभाला और एम्बुलेंस तक पहुंचाया। एम्बुलेंस के अंदर उन्हें स्ट्रेचर पर बैठाकर प्राथमिक चिकित्सा दी गई। मेडिकल स्टाफ और पुलिसकर्मी लगातार उनकी निगरानी करते रहे। इसके बाद पारस सकलेचा को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर निगम की फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई जारी रही, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता और रहवासी लगातार विरोध और नारेबाजी करते रहे। आरोप- बिना उचित इंतजाम दबाव बनाया
रहवासियों ने आरोप लगाया है कि बिना उचित व्यवस्था के फ्लैट खाली कराने का दबाव नगर निगम द्वारा बनाया जा रहा है। इधर, नगर निगम का कहना है कि 31 जुलाई को मल्टी में रहने वाले 208 लोगों को फ्लैट की बकाया राशि जमा करने का नोटिस दिया था। 4 अगस्त तक सभी को 1.80 लाख रुपए जमा कराना था। नोटिस की अवधि खत्म होने पर फ्लैट से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की गई है।
महिलाओं ने बच्चों के साथ किया विरोध नगर निगम की टीम ने लोगों के घरों से सामान निकालकर बाहर रख दिया और मकानों को सील करना शुरू कर दिया। सामान लोडिंग वाहनों में रखा गया। कई महिलाएं छोटे बच्चों को लेकर घरों के बाहर बैठीं रहीं और कार्रवाई का विरोध करती नजर आईं। रहवासियों का आरोप- बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कराया जा रहा बेघर रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें फ्लैट खाली करने के लिए मजबूर कर रहा है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। वहीं, नगर निगम का कहना है कि 31 जुलाई को 208 लोगों को फ्लैट की बकाया राशि जमा करने का नोटिस दिया गया था। उन्हें 4 अगस्त तक 1.80 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। स्लम बस्ती से कराया गया था पुनर्वास जावरा रोड स्थित शिवशंकर कॉलोनी और प्रकाश नगर स्लम बस्ती, जो रेलवे की भूमि पर बसी थी, वहां के रहवासियों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डोसी गांव में पुनर्वास किया गया था। सर्वे के बाद 396 हितग्राहियों की सूची तैयार की गई थी। वर्ष 2020-21 में रेलवे द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तत्कालीन कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और शहर विधायक चेतन्य काश्यप की पहल पर इन परिवारों को डोसी गांव के आवासों में शिफ्ट कराया गया था। 208 हितग्राहियों ने नहीं लिया लोन नगर निगम के अनुसार, 396 हितग्राहियों में से 166 ने बैंक से ऋण लिया, जबकि 20 ने एकमुश्त राशि जमा कर दी। शेष 208 हितग्राहियों ने ऋण नहीं लिया। निगम का कहना है कि ऋण लेने वाले कई हितग्राहियों ने भी समय पर किस्तें जमा नहीं कीं, जिससे उनके खाते एनपीए हो गए और अन्य लोगों के ऋण भी स्वीकृत नहीं हो सके। छह साल में छह नोटिस नगर निगम का दावा है कि पिछले छह वर्षों में 208 कब्जाधारियों को छह बार नोटिस दिए जा चुके हैं। अवैध बिजली और पानी कनेक्शन के कारण निगम को लाखों रुपये का नुकसान भी हुआ है। 31 जुलाई को नोटिस तामील कराने गई निगम टीम के साथ विवाद और पथराव की घटना भी हुई थी। वहीं, दूसरी ओर रहवासियों ने निगम कर्मचारियों पर महिलाओं और पुरुषों के साथ मारपीट के आरोप लगाए थे, जिसके वीडियो भी सामने आए थे। जनसुनवाई में जाने से पहले रोके गए थे रहवासी मंगलवार को रहवासी जनसुनवाई में अपनी बात रखने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम तरुण जैन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में रहवासियों ने बताया कि वे कई वर्षों से इन आवासों में रह रहे हैं और नगर निगम द्वारा पानी, साफ-सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा आज तक पूरा नहीं किया गया। उन्होंने निगम कर्मचारियों पर महिलाओं के साथ अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग भी की।
