मध्य प्रदेश के राजगढ़ के खिलचीपुर में जलझूलनी ग्यारस की तैयारी के दौरान बड़ा हादसा हो गया। गाड़गंगा नदी में पुल के नीचे पटिया लगाते वक्त पानी के अंदर पटियों के बीच उनकी गर्दन फंस गई। करीब 15 फीट गहरे पानी में करीब 2 घंटे फंसे रहने से उनकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान बीरम मोगिया (28) के रूप में की गई है। बीरम खिलचीपुर के वार्ड-6 स्थित थावरिया बाजार का रहने वाला था। वह मजदूरी करता था। बिना सुरक्षा किट के पटिया लगाने नदी में उतारा था। हादसे से जुड़ी तस्वीरें देखिए… सुबह करीब 8 बजे घर से निकला था युवक मृतक के बड़े भाई लक्ष्मीनारायण उर्फ पीरू मोगिया ने बताया- बीरम सुबह करीब 8 बजे घर से निकला था। उसे गाड़गंगा नदी के छोटे पुल के नालों में पटिए लगाने का काम मिला था। नदी में पटिया लगाने का काम कर रहा था। लगभग लगा ही दिया था। उन्होंने बताया- करीब साढ़े 10 बजे परिवार को बीरम के नदी में बहने की सूचना मिली। इसके बाद परिजन नदी पर पहुंचे। वहां पुल पर पहले से लोगों की भीड़ जमा थी। बीरम की भाभी भगवती बाई और भतीजियों का रो-रोकर बुरा हाल था। रस्सी-बांस की मदद से निकालने की कोशिश फेल हादसे की सूचना पर एसडीओपी, एसडीएम, टीआई, नायब तहसीलदार सहित पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआत में रस्सी और बांस की मदद से बीरम को निकालने की कोशिश की गई। रस्सी-बांस से रेस्क्यू की कोशिश इस दौरान टीआई ने खुद रस्सी पकड़कर मजदूर को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन नदी के तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद जेसीबी की मदद से पुल के ऊपर लगे पटिए तोड़े गए। मुकेश मोगिया और एसडीआरएफ का एक जवान पुल के अंदर उतरे। तलाश के दौरान बीरम की गर्दन दो पटियों के बीच फंसी मिली। मुकेश मोगिया ने बीरम के पैर में रस्सी बांधी, लेकिन इसके बावजूद उसका शरीर बाहर नहीं निकाला जा सका। इसके बाद जेसीबी से पटिए तोड़कर हटाए गए। पटिए हटाते ही 50 फीट दूर मिला शव पटिए हटाए जाने के बाद पानी के तेज बहाव के साथ बीरम का शव बह गया। करीब 50 फीट दूर खरेड में शव मिला। इसके बाद शव को नदी से बाहर निकाला गया। करीब 12 बजे शव नदी से बाहर निकाला गया। इसके बाद एंबुलेंस से बीरम को खिलचीपुर सिविल अस्पताल ले जाया गया। बालाजी कंस्ट्रक्शन को मिला था काम गाड़गंगा नदी के छोटे पुल के नालों से बह रहे पानी को रोकने के लिए नगर पालिका ने बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को पटिए लगाने का काम दिया था। कुछ दिन पहले कंपनी को इसका वर्क ऑर्डर जारी हुआ था। जलझूलनी ग्यारस के आयोजन से पहले मंगलवार को मजदूरों से नदी के नालों में पटिए लगवाए जा रहे थे। मौके पर नगर पालिका की टीम और ठेकेदार नहीं थे स्थानीय लोगों ने बताया- जिस समय मजदूर नदी में पटिए लगाने का काम कर रहे थे, उस समय मौके पर न तो नगर पालिका की टीम थी और न ही ठेकेदार मौजूद था। उन्हें सुरक्षा किट भी नहीं दी गई थी। वह बिना लाइफ जैकेट के ही नीचे उतरा था। एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग हादसे के बाद बीरम के परिजन ने शव लेने से इनकार कर दिया। परिवार की मांग है कि पहले ठेकेदार को मौके पर बुलाया जाए। मजदूरों की सुरक्षा को लेकर जवाब लिया जाए। परिजन ने बीरम के परिवार के लिए एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग भी रखी है। बता दें कि नगर पालिका सीएमओ देव नारायण दांगी के पास खिलचीपुर और जीरापुर दोनों नगर पालिकाओं का चार्ज है। घटना के समय वे जीरापुर में थे। हादसे की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद वे नदी पर पहुंचे।
