मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट प्रेस (शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग) में रद्दी कागज की बिक्री से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर की जांच में सरकारी प्रेस, टेंडर लेने वाली कंपनी और तौल कांटे के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर हुए इस खुलासे से अनुमान है कि पूरे टेंडर के दौरान सरकार को करीब 1.34 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। जांच के दौरान दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने आधी रात रद्दी से लदे ट्रकों का पीछा कर उस धर्मकांटे तक पहुंचकर तस्वीरें और वीडियो जुटाए, जहां उनकी तुलाई हुई थी। पड़ताल में पता चला कि वास्तविक तुलाई की पर्चियां सरकारी रिकॉर्ड से गायब थीं। मूल रिकॉर्ड में दोनों ट्रकों में करीब 29.7 टन रद्दी दर्ज थी, जबकि सरकारी फाइलों में केवल 6.82 टन दिखाई गई। इस तरह करीब 23 टन रद्दी के रिकॉर्ड में अंतर मिला। अधिकारियों ने पूछे जाने पर रिकॉर्ड की दोबारा जांच की बात कही। आखिर इस पूरे घोटाले को किस तरह अंजाम दिया गया? पढ़िए रिपोर्ट… इन्वेस्टिगेशन पार्ट-1: आधी रात को ट्रकों का पीछा, कैमरे में कैद सबूत 1. भोपाल की फर्म को मिला 60 मीट्रिक टन रद्दी उठाने का ठेका शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग ने 16 नवंबर 2025 को ई-टेंडर क्रमांक 958 जारी कर सरकारी प्रेस से 60 मीट्रिक टन रद्दी कागज उठाने का ठेका निकाला। टेंडर में जरूरत के अनुसार रद्दी की मात्रा बढ़ाने का प्रावधान था। यह ठेका भोपाल की फर्म मैसर्स मां ट्रेडर्स (35, नेहरू रोड, बेलदारपुरा) को मिला। ठेकेदार को एक महीने में पूरी रद्दी उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रोसेस की मॉनिटरिंग के लिए 25 मई 2026 को विभाग के कंट्रोलर ने प्रभारी लेखा अधिकारी भवेशकांत सिन्हा की अध्यक्षता में स्पेशल कमेटी गठित की। 2. कंपनी ने विभागीय खाते में जमा किए 2 लाख रुपए मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग (साइबर ट्रेजरी) के ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार, मैसर्स मां ट्रेडर्स ने डिप्टी कंट्रोलर सेंट्रल प्रेस, भोपाल के विभागीय खाते में दो चालानों से कुल 2 लाख रुपए जमा किए। पहला चालान 29 जून 2026 और दूसरा 30 जून 2026 को एक-एक लाख रुपए का जमा किया गया। 3. सरकारी प्रेस से निकले ट्रकों का भास्कर टीम ने किया पीछा 30 जून 2026 को दिनभर सरकारी प्रेस में रद्दी लोड की गई। रात 11:29 बजे ट्रक क्रमांक RJ 11 GA 8824 और RJ 05 GA 8663 प्रेस के मुख्य गेट से निकले। पहले से मौजूद भास्कर टीम ने दोनों ट्रकों का पीछा किया। रात करीब 11:45 बजे दोनों ट्रक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट नंबर 9 और 10 स्थित ‘संजय स्केल्स’ धर्मकांटे पर पहुंचे, जहां उनकी तुलाई हुई। भास्कर रिपोर्टर ने पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड किया। इस दौरान सरकारी निगरानी समिति के सदस्य धर्मकांटे पर मौजूद रहने के बजाय पास की कार में बैठे रहे। कुछ देर बाद धर्मकांटे के केबिन से निकले कर्मचारी ने तौल पर्चियां उन्हें कार में ही सौंप दीं। इन्वेस्टिगेशन पार्ट-2: सरकारी रिकॉर्ड और तौल पर्चियों में बड़ा अंतर 1. धर्मकांटे से निकाली डुप्लीकेट तौल पर्चियां 2 जुलाई 2026 को दैनिक भास्कर का रिपोर्टर गोविंदपुरा स्थित संजय स्केल्स धर्मकांटे पहुंचा। ट्रकों के नंबर और तुलाई के समय के आधार पर दोनों ट्रकों की डुप्लीकेट तौल पर्चियां प्राप्त की गईं। इनसे सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक तुलाई के बीच अंतर के शुरुआती प्रमाण मिले। संजय स्केल्स धर्मकांटे के रिकॉर्ड के अनुसार दोनों ट्रकों का कुल नेट वेट 29,775 किलो (करीब 29.7 टन) दर्ज था। 2. सरकारी फाइल में अलग धर्मकांटे की पर्चियां मिलीं भास्कर रिपोर्टर ने अपने सूत्रों से सरकारी फाइल में लगाई गई तौल पर्चियों की कॉपी हासिल की। इसमें गोविंदपुरा स्थित संजय स्केल्स धर्मकांटे की पर्चियां मौजूद नहीं थीं। उनकी जगह करीब 15 किलोमीटर दूर मिसरौद स्थित ‘भवानी धर्मकांटे’ की तौल पर्चियां संलग्न थीं। इन पर्चियों पर निगरानी समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर थे। दोनों धर्मकांटों के रिकॉर्ड में दर्ज वजन में बड़ा अंतर सामने आया। 3. तौल पर्चियों के समय पर भी उठे सवाल तौल पर्चियों की जांच में समय दर्ज होने को लेकर भी सवाल सामने आए। रिकॉर्ड के अनुसार 30 जून की रात दोनों धर्मकांटों पर ट्रकों की तुलाई कुछ ही मिनटों के अंतराल में दर्ज की गई है। गोविंदपुरा और मिसरौद के बीच करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी है। पर्चियों में दर्ज समय के आधार पर दोनों स्थानों पर ट्रकों की तुलाई कुछ ही मिनटों के अंतराल में होना सवाल खड़े करता है। इसके अलावा भवानी धर्मकांटे की दोनों पर्चियों के सीरियल नंबर अलग थे, लेकिन वाहन नंबर का शुरुआती हिस्सा ‘RJ11GA’ समान था। केवल अंतिम अंक (8824 व 8663) अलग थे। इन तथ्यों के आधार पर दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठते हैं। भास्कर एनालिसिस: सरकार को ₹1.34 करोड़ का अनुमानित नुकसान? टेंडर 60 मीट्रिक टन (60,000 किलो) रद्दी कागज के डिस्पोजल के लिए जारी किया गया था। मौजूदा दस्तावेजों के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में अब तक केवल 6 टन रद्दी की बिक्री दर्ज है, जबकि जांच में ट्रकों में इससे कहीं अधिक रद्दी लोड होने के सबूत मिले। टेंडर की शर्तों के अनुसार कागजों पर अभी भी 54 मीट्रिक टन रद्दी बिकना बाकी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार प्रति ट्रक औसतन करीब 3 टन रद्दी दर्शाई गई है। इस आधार पर 60 टन रद्दी के डिस्पोजल के लिए लगभग 20 ट्रकों की जरूरत होगी। समिति अध्यक्ष से सवाल-जवाब: दावों और रिकॉर्ड में विरोधाभास नियमों के अनुसार स्क्रैप का भंडारण, तुलाई और डिस्पोजल डिप्टी कंट्रोलर के प्रशासनिक नियंत्रण में होता है, जबकि रद्दी विक्रय समिति के अध्यक्ष भवेशकांत सिन्हा पर तुलाई प्रोसेस की मॉनिटरिंग और नियमों के पालन की जिम्मेदारी थी। दैनिक भास्कर ने भवेशकांत सिन्हा से मामले से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनके जवाब में विरोधाभास नजर आया। सवाल: रद्दी उठाने का टेंडर किस कंपनी को मिला?
जवाब: मां ट्रेडर्स को टेंडर मिला था। कुल 60 मीट्रिक टन रद्दी बेची जानी थी और अब तक तीन ट्रक भेजे गए हैं। सवाल: तीनों ट्रकों में कुल कितना वजन था?
जवाब: तौल पर्चियां डिप्टी कंट्रोलर कार्यालय में जमा हैं। मुझे सटीक आंकड़ा याद नहीं है। सवाल: ट्रकों की तुलाई किस धर्मकांटे पर हुई थी?
जवाब: तुलाई का विवरण पर्चियों में दर्ज होगा। मुझे अभी याद नहीं है। संभवतः मिसरौद के 11 मील स्थित धर्मकांटे पर तुलाई हुई थी। सवाल: जांच में ट्रकों की तुलाई गोविंदपुरा के संजय धर्मकांटे पर मिली। ऐसे में मिसरौद की पर्चियां कैसे आईं?
जवाब: मेरे अनुसार तुलाई 11 मील (मिसरौद) पर हुई थी। गोविंदपुरा की जानकारी मुझे नहीं है। मैं समिति के सदस्यों से चर्चा करूंगा। भास्कर फैक्ट चेक: 29 जून को ट्रक निकले ही नहीं मौजूदा दस्तावेजों के मुताबिक 29 जून 2026 को मिसरौद के धर्मकांटे पर ट्रकों की तुलाई का रिकॉर्ड नहीं मिला। उस दिन कंपनी ने विभागीय खाते में पेमेंट जमा किया था। जांच में जुटाए गए वीडियो और अन्य रिकॉर्ड के मुताबिक ट्रकों की लोडिंग और तुलाई 30 जून की रात गोविंदपुरा स्थित संजय स्केल्स धर्मकांटे पर हुई। समिति के सदस्य गोविंदपुरा के संजय स्केल्स धर्मकांटे पर मौजूद थे। इसका पुख्ता वीडियो सबूत दैनिक भास्कर के पास सुरक्षित है। सरकार का पक्ष: उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई का भरोसा दैनिक भास्कर ने जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को उपलब्ध कराए। मंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
