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12 साल के हेम के 2 हत्यारों को उम्रकैद:गर्लफ्रेंड की शादी कहीं और होने से बौखलाकर की थी उसके भाई की हत्या

ग्वालियर सेशन कोर्ट ने सोमवार को 12 वर्षीय मासूम हेमसिंह राजपूत की निर्मम और रूह कंपा देने वाली हत्या के दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार की अदालत ने मुख्य आरोपी शिवम उर्फ तोता कुशवाह (23 वर्ष) और उसके साथी अमन गोस्वामी उर्फ योगी (21 वर्ष) को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया। दोनों पर भारी अर्थदंड भी लगाया। कोर्ट ने इस हत्याकांड को बेहद क्रूर माना। महज 19 महीने के भीतर डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी साबित किया गया। शादी से इनकार किया तो भाई को मार डाला
अदालत के समक्ष पेश अभियोजन और पुलिस के साक्ष्यों के अनुसार, यह पूरी खौफनाक कहानी प्रतिशोध की आग से जुड़ी थी। मुख्य आरोपी शिवम कुशवाह का मृतक हेम की बड़ी बहन नंदनी के साथ प्रेम-प्रसंग था। दोनों के परिवार पहले शादी के लिए राजी थे, लेकिन नंदनी के सौतेले पिता विजय सेन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। बाद में परिजनों ने नंदनी की शादी शेरू नाम के युवक से कर दी। अपनी प्रेमिका की दूसरी जगह शादी होने से बौखलाए शिवम ने नंदनी के सौतेले पिता को सबक सिखाने और बदला लेने के लिए उसके छोटे भाई हेम की हत्या की साजिश रच डाली। मेला दिखाने के बहाने बुलाया, फिर पत्थरों से तोड़ा जबड़ा
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 29 जुलाई 2024 को हेम की मां कमलेश ने बेटे को गुप्तेश्वर महादेव का मेला देखने के लिए घर से ऑटो में बैठाकर रवाना किया था। रास्ते में आरोपी शिवम ने हेम को फोन किया और मेला दिखाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने पास बुला लिया। इसके बाद वह अपने साथी अमन गोस्वामी के साथ उसका अपहरण कर देव खो रोड (तिघरा थाना क्षेत्र) स्थित सुनसान जंगल की झाड़ियों में ले गया। वहां आरोपियों ने पहले शराब पी और फिर हेम पर भारी पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में बच्चे का जबड़ा पूरी तरह टूट गया और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को भारी पत्थरों के नीचे दबा दिया। डिजिटल सबूतों ने खोला राज, ऐसे पकड़े गए कातिल
वारदात के अगले दिन 30 जुलाई 2024 को तिलकुंडा नरिया के पास जंगल में एक चरवाहे ने पत्थरों के बीच मक्खियां भिनभिनाते देखीं। पास जाकर देखा तो बच्चे की उंगलियां बाहर निकली हुई थीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और साइबर टीम ने आधुनिक तकनीक की मदद से इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाई। कोर्ट की टिप्पणी- मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला अपराध कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि ‘मासूम और बेकसूर बच्चे की इस प्रकार पत्थरों से कुचलकर हत्या करना मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला कृत्य है। प्रेम-प्रसंग या पारिवारिक असहमति का बदला 12 वर्षीय बच्चे की जान लेकर पूरा करना समाज में किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे अपराधियों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाता है।’

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