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100 किमी दूर सड़क किनारे बोरी में फेंकी लाश:7 महीने बाद फ्रिज के कार्टन पर लिखे मोबाइल नंबर से सुलझी हत्या की गुत्थी

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार कहानी शिवपुरी के एक ऐसे हत्याकांड की, जिसकी गुत्थी सुलझाने में पुलिस को करीब एक साल लग गए। सड़क किनारे मिली लाश के पास फ्रिज के कार्टन और उस पर लिखा एक मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ लगा। पहली नजर में लगा कि कातिल तक पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा, लेकिन हर नया सुराग जांच को एक नए मोड़ पर ले जाता रहा। पांच जिलों में गुमशुदा लोगों के रिकॉर्ड खंगाले गए। कई लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन मृतक की पहचान नहीं हो सकी। करीब 10 महीने बाद झांसी में दर्ज एक गुमशुदगी की रिपोर्ट ने केस की दिशा बदल दी। क्या हत्या की वजह संपत्ति और नौकरी का विवाद था? और जिस मोबाइल नंबर के सहारे पुलिस जांच कर रही थी, वह आखिर किस हत्यारे तक पहुंचाने वाला था? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 18 जून 2018 | सुबह 7 बजे | शिवपुरी
जून की उस सुबह शिवपुरी के दिनारा इलाके में बरकुआं गांव के पास हनुमान मंदिर के नजदीक सड़क किनारे खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान एक मजदूर की नजर झाड़ियों के पास पड़ी पीले रंग की प्लास्टिक की बोरी पर गई। बोरी के करीब पहुंचते ही उसकी चीख निकल गई। उसमें से एक इंसानी हाथ बाहर लटक रहा था। शव सड़ चुका था। मजदूरों ने गांव के कोटवार छोटेलाल को सूचना दी। दो बोरियों में बंद शव, पास में फ्रिज के कार्टन पुलिस ने बोरी खोली तो उसके अंदर एक और बोरी मिली। उसमें क्रीम रंग की चादर में लिपटा युवक का शव था। हाथ-पैर पीठ के पीछे बंधे थे। शरीर पर धारदार और नुकीले हथियार से हमले के निशान थे। चेहरा पूरी तरह सड़ चुका था। शुरुआती जांच में पुलिस को लगा कि हत्या कहीं और की गई और शव यहां लाकर फेंका गया। मृतक की पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन शव के पास पड़े बिस्किट और फ्रिज के तीन गत्ते के कार्टन ने पुलिस को एक सुराग दे दिया। कार्टन के कोने पर हरे पेंट से अंग्रेजी में ‘Sanuary’ लिखा था। नीचे एक मोबाइल नंबर था- 99xxxxxx47। मोबाइल नंबर से शुरू हुई जांच, हर बार मिला नया सिरा पुलिस ने नंबर की कॉल डिटेल और सर्विलांस से पड़ताल की। जांच में केशव नाम के व्यक्ति का नंबर सामने आया। पूछताछ में केशव ने बताया कि कार्टन पर लिखा नंबर उसके भाई पंकज का है। पंकज ने भी नंबर अपना होने की बात स्वीकार की, लेकिन कार्टन पर नंबर कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी होने से इनकार कर दिया। पूछताछ में सोनू नाम के एक व्यक्ति का पता चला, जो झांसी में ठेकेदारी करता था। उसने बताया कि उसके जीजा को बंटवारे में झांसी में एक कमरा मिला था। उसे बेकरी के काम के लिए किराए पर देना था। नई दीवार की तराई और पुताई के दौरान उसने पंकज से उसका मोबाइल नंबर लिया था। फोन नहीं होने के कारण नंबर एक गत्ते पर लिख लिया था। पांच जिलों में तलाश, लेकिन पहचान नहीं पुलिस झांसी पहुंची और कमरे की तलाशी ली। सोनू के जीजा से भी पूछताछ हुई, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे कमरे का शिवपुरी में मिले शव से संबंध साबित हो सके। कार्टन का सुराग पुलिस को झांसी तक ले आया था, लेकिन मृतक की पहचान अब भी नहीं हुई थी। गुमशुदगी की रिपोर्ट से बदली जांच जनवरी 2019 में शिवपुरी से करीब 100 किलोमीटर दूर झांसी में राधारमण भारद्वाज अपने छोटे बेटे रोहित की शादी की तैयारियों में जुटे थे। रेलवे से रिटायर राधारमण की पहली पत्नी से बड़ा बेटा रिंकू था। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी की थी, जिससे एक बेटा और एक बेटी थे। रिंकू पत्नी हेमलता के साथ पिता के दिए अलग मकान में रहता था। वह ड्राइवर था और अकसर दो-तीन महीने के लिए ट्रिप पर बाहर चला जाता था। परिवार में संपत्ति और रेलवे की नौकरी को लेकर विवाद भी रहता था। हेमलता ने दर्ज कराई गुमशुदगी की शिकायत रोहित ने हेमलता को शादी में आने के लिए कहा और बच्चों के कपड़े खरीदने के लिए पैसे देकर लौट गया। 23 जनवरी 2019 को हेमलता ने प्रेमनगर थाने में रिंकू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दो दिन बाद वह बच्चों के साथ रोहित की शादी में शामिल हुई। शादी के बाद परिवार ने रिंकू की तलाश शुरू की। रिश्तेदारों ने उसकी तस्वीर फेसबुक पर अपलोड कर जानकारी मांगी। झांसी में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट की जानकारी चार महीने बाद शिवपुरी पुलिस तक पहुंची। करीब 11 महीने से अटकी जांच को पहली बार एक ठोस दिशा मिली। तस्वीरों से हुई मृतक की पहचान पुलिस ने राधारमण और रोहित को शिवपुरी बुलाया। उनके सामने अज्ञात शव की तस्वीरें और मौके से मिले कपड़े, जूते, बेल्ट और चादर रखी गई। तस्वीरें देखते ही राधारमण भावुक हो उठे। कपड़े देखकर रोहित भी रो पड़ा। सड़क किनारे बोरी में मिला शव रिंकू का था। जिस रिंकू के बारे में परिवार को लगता रहा कि वह काम के सिलसिले में बाहर गया होगा, उसकी हत्या करीब सात महीने पहले हो चुकी थी। अब इन सवालों के जवाब तलाशने थे- – रिंकू की हत्या कहां और कैसे हुई?
– कार्टन पर लिखा नंबर किसके घर तक पहुंचाने वाला था?
– हेमलता ने पति के लापता होने के इतने महीनों बाद रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई?
– हत्या के पीछे क्या मकसद था? इन सवालों के जवाब कल मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के अगले पार्ट में पढ़िए-

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