मध्य प्रदेश में 10 साल बाद हुई पदोन्नति प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो गया। इसके बाद अब दूसरे और तीसरे चरण के लिए होने वाली डीपीसी में सरकार से गलतियां सुधारने का आग्रह किया जा रहा है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने कहा है कि सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में प्रस्तावित डीपीसी में अर्हताकारी सेवा के नियम में पूर्णतः छूट प्रदान की जानी चाहिए ताकि नियमों में विसंगति के चलते तीस साल से सेवा दे रहे और दस साल पहले से सेवा दे रहे कर्मचारियों अधिकारियों की पदोन्नति का कैडर सही हो सके। क्या है मौजूदा नियम मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि मौजूदा नियम यह है कि किसी पद पर न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा कर लेने के उपरांत ही कोई अधिकारी कर्मचारी अगले पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना जाता है। प्रशासनिक शब्दावली में इसे अर्हताकारी सेवा कहा जाता है। साथ ही यह प्रावधान भी है कि उचित कारण विद्यमान होने पर कैबिनेट इस न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा में छूट प्रदान कर सकती है यानी 5 वर्ष से कम सेवा होने पर कैबिनेट के अनुमोदन से अगले पद पर पदोन्नति दी जा सकती है। नायक के अनुसार चूंकि इस समय प्रदेश में असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हुई है। बिना किसी विधिसम्मत कारण के 10 वर्ष तक पदोन्नतियां बंद रहीं और बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी रिटायर होते जा रहे हैं। 10 साल पहले प्रमोट होने वाले 10 साल बाद पदोन्नत हुए
नायक ने कहा कि जो अधिकारी कर्मचारी 10 वर्ष पहले पदोन्नति के लिए पात्र थे, वे 10 वर्ष बाद पदोन्नत हुए हैं। 10 वर्ष सीनियर अधिकारी कर्मचारी अपने से 10 वर्ष जूनियर अधिकारी कर्मचारी के साथ-साथ पदोन्नत हुआ है। यह एक ऐसी स्थिति है जो पहले कभी उत्पन्न नहीं हुई थी। जो अधिकारी कर्मचारी अभी 2026 में पदोन्नत हुए हैं वे अगली डीपीसी (सितंबर 26 एवं जनवरी 27) के समय तक 5 वर्ष की अर्हताकारी सेवा के दायरे में न आने के कारण विचारण क्षेत्र में नहीं आयेंगे और उन्हें ऐसी हानि उठानी पड़ेगी जिसके लिए वे दोषी नहीं हैं। CM और CS से कर्मचारी हित में फैसला करने आग्रह
नायक ने कहा कि जो परिस्थितियां बनी हैं, उसे देखते हुए मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अनुरोध करता है कि प्रदेश की असामान्य परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सभी अधिकारियों कर्मचारियों को एक बार के लिए कैबिनेट के अनुमोदन से अगली पदोन्नति के लिए विचारण क्षेत्र में शामिल करने का निर्णय लिया जाए। इस निर्णय से 10 वर्ष तक पदोन्नतियां बंद रहने से हुई हानि की कुछ हद तक भरपाई संभव हो सकेगी। साथ ही इस निर्णय से निचले पद रिक्त होने की संख्या बढ़ जायेगी जिस पर शासन सीधी भर्ती कर सकेगा, जिसका लाभ प्रदेश के बेरोजगारों को मिलेगा।
