मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण मामले को लेकर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें दायर की गई 86 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फाइनल हियरिंग के लिए दो बैच में याचिकाओं को बांट दिया है। 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में याचिकाओं के लिए दो बैच बनाए गए हैं। हाईकोर्ट पहले 27% आरक्षण को चुनौती देने वालों की ओर से सुनवाई करेगी। इसके बाद फिर दूसरे बैच को सुना जाएगा। मंगलवार को 11:00 बजे से 1:30 तक के बीच ओबीसी आरक्षण से संबंधित मामले की सुनवाई के लिए समय तय किया गया है। आरक्षण बढ़ाने के खिलाफ में सीनियर एडवोकेट प्रदीप सचिन सचेंती जिरह करेंगे, जबकि राज्य सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज पक्ष रखेंगे। सोमवार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में ओबीसी आरक्षण से संबंधित 86 याचिकाएं सूचीबद्ध थी, उक्त याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दोपहर 12:30 से सुनवाई करने का आदेश पारित किया गया था, लेकिन आज दो डिवीजन बैंचो के अवकाश पर होने के कारण ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों की सुनवाई 12:30 बजे से नहीं हो सकी, और प्रकरणों की सुनवाई शाम 4:35 से 5:10 तक मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा एवं माननीय न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा की गई। सुनवाई में खंडपीठ द्वारा सभी पक्षों के अधिवक्ताओं से कितने समय बहस में कंज्यूम किए जाएंगे की अंडरटेकिंग ली गई, आज हाई कोर्ट ने निर्धारित किया की सर्वप्रथम ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध दायर याचिका कर्ताओ के अधिवक्ताओं को सुना जाएगा। तत्पश्चात मध्य प्रदेश शासन को इसके बाद ओबीसी पक्ष में दायर याचिकाओं मे अधिवक्ता को सुना जाएगा।
ओबीसी आरक्षण के पक्ष में दायर याचिकाओं मे याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर,शशांक रतनू, दिव्य वीर सिंह, परमानंद साहू, उदय साहू, अखिलेश प्रजापति रमेश प्रजापति काजल विश्वकर्मा पुष्पेंद्र शाह ने पक्ष रखा। मध्य प्रदेश शासन की ओर से विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर विनायक प्रसाद शाह, शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा ए.एस.ज़ी. के.एम नटराज तथा ओबीसी आरक्षण के विरोध में दायर याचिका कर्ताओं की ओर से आदित्य संगी, अंशुमान सिंह, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी एवं प्रदीप सांचेती ने रखा।
