इंदौर के स्टार्टअप्स ने देश की सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां के तीन स्टार्टअप्स ने मिलकर हाईटेक ड्रोन ‘नागपाश’ डेवलप किया है। यह भारतीय रक्षा तकनीक की नई ताकत बनकर उभर रहा है। यह देश का पहला ‘एयर टू एयर जैमिंग सिस्टम’ है, जो हवा में उड़कर दुश्मन के ड्रोन को निशाना बनाता है और उसके नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय कर हवा में ही गिरा देता है। कंपनी का दावा है कि ‘नागपाश’ अपनी निर्धारित सीमा में आने वाले किसी भी ड्रोन को भ्रमित कर उसे दुर्घटनाग्रस्त कर सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसके प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी तकनीक बताया है। कंपनी के COO दुर्गेश शुक्ला का दावा- अब तक दुनिया में उपलब्ध अधिकांश जैमर स्थिर यानी जमीन पर लगाए जाने वाले होते हैं, जबकि ‘नागपाश’ उड़ान भरते हुए दुश्मन के ड्रोन तक पहुंचकर उसे वहीं निष्क्रिय कर देता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। रक्षामंत्री ने बताया सेना के लिए उपयोगी तकनीक हाल ही में प्रयागराज में आयोजित ‘नॉर्थ टेक 2026’ कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ‘नागपाश’ का प्रेजेंटेशन दिखाया गया। कंपनी के CEO और CTO अभिषेक मिश्रा ने बताया कि रक्षा मंत्री ने इसे भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि अब केवल हमले का इंतजार करने के बजाय ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ यानी हमला होने से पहले ही दुश्मन की क्षमता को खत्म करना जरूरी है। ‘नागपाश’ इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छह महीने पहले मिला अप्रूवल
कंपनी की CPO रोशनी शुक्ला के मुताबिक ‘नागपाश’ को अप्रैल 2026 में रक्षा उपयोग के लिए ‘नॉर्थ टेक’ के फोकस ग्रुप-6 की आकलन (Assessing) टीम से अप्रूवल मिला है। यह सिस्टम विशेष रूप से रक्षा सेवाओं के लिए डेवलप किया है। कंपनी लंबे समय से डिफेंस एजेंसियों, रिसर्च सेंटरों और ट्रेनिंग सेंटरों के साथ काम कर रही है। इसी कारण इसकी मंजूरी प्रक्रिया में कोई बड़ी बाधा नहीं आई। मध्य प्रदेश सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में ट्रायल
‘नागपाश’ का उपयोग मध्य प्रदेश के सागर, ग्वालियर, भोपाल और महू सहित कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। इसके अलावा राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, लेह और अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी इसके ट्रायल चल रहे हैं। ट्रायल सफल रहने के बाद इसे बड़े स्तर पर तैनात करने की तैयारी है। 700 से ज्यादा ड्रोन सेना को दिए
कंपनी का दावा है कि वह अब तक भारतीय सेना को अलग-अलग उपयोग के 700 से अधिक ड्रोन उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा 2 हजार से ज्यादा सैनिकों और अधिकारियों को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कंपनी देशभर में 25 से अधिक एडवांस ड्रोन लैब भी स्थापित कर चुकी है। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना है। पुराने जैमर और ‘नागपाश’ में अंतर
एक्सपर्ट्स के अनुसार पहले उपयोग होने वाले जैमर मुख्य रूप से मिसाइल और विमान जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए बनाए जाते थे। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद छोटे ड्रोन युद्ध का नया हथियार बनकर सामने आए हैं। छोटे आकार के ड्रोन को रडार से पहचानना बेहद कठिन होता है, क्योंकि वे कई बार पक्षियों जैसे दिखाई देते हैं। ऐसे में ‘नागपाश’ जैसी तकनीक सीधे ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निशाना बनाकर उन्हें निष्क्रिय करती है। भारत की रक्षा तकनीक में नया अध्याय
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंदौर में डेवलप ‘नागपाश’ भारत की रक्षा तकनीक में नया अध्याय साबित हो सकता है।
