इलेक्ट्रिक वाहन के 36 गुना बढ़ने के बाद भी मप्र की सड़कों से पेट्रोल-डीजल की पकड़ ढीली नहीं हुई है। 2020-21 में प्रदेश में सिर्फ 4,387 इलेक्ट्रिक वाहन (EV+BOV) रजिस्टर्ड हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 1,58,955 हो गए यानी 36 गुना से ज्यादा तेजी से ईवी बढ़े और नए वाहनों में ईवी की हिस्सेदारी 0.4% से बढ़कर 9.3% हो गई, लेकिन हर 10 नए वाहनों में अब भी करीब 9 पेट्रोल-डीजल वाले ही हैं। यही 4 वजह है कि इसी दौरान पेट्रोल की बिक्री 1,461 से बढ़कर 2,072 (41.8%) टीएमटी यानी हजार मैट्रिक टन और डीजल की 3,369 से बढ़कर 4,625 टीएमटी (37.3%) हो गई।
पेट्रोल-डीजल की संयुक्त बिक्री भी 4,830 से बढ़कर 6,697 टीएमटी पहुंची, यानी 38.7% का उछाल आया। साफ है कि मध्य प्रदेश में ईलेक्ट्रिक वाहन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन फिलहाल पेट्रोल-डीजल वाहनों से लोगों का मोह छुड़ा पाने में अभी पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए हैं।
