‘बच्चे की मौत की खबर सुन अंतरात्मा कांप गई है। ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र के लिए ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। आखिर, मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन है? अफसरों पर FIR होनी चाहिए। कड़ी सजा मिलना चाहिए।’ यह कहते हुए ओंकारेश्वर संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी के चेहरे पर गुस्सा था। 24 जुलाई को खंडवा जिले के ओंकारेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग में खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से तीन साल के तनुष उसराठे की मौत हो गई थी। वह परिवार के साथ नागपुर से दर्शन के लिए आया था। बच्चे के पिता कैलाश उसराठे ने बताया कि मेरी आंखों के सामने बेटा गड्ढे में समा गया। परिवार बेटे के शव को लेकर नागपुर चला गया और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। उन्होंने रविवार को सीएम हेल्पलाइन में 181 नंबर पर भी शिकायत की है। घटना के बाद संत-महंत, स्थानीय लोग और दर्शन के लिए आ रहे श्रद्धालु भी गुस्से में हैं। दैनिक भास्कर ने उन 9 जिम्मेदारों के नाम तलाशे, जिनकी लापरवाही से तनुष की मौत हो गई। साथ ही देखा कि उन्होंने क्या लापरवाही बरती। 25 दिन से खुला पड़ा था सेप्टिक टैंक जिस सेप्टिक टैंक में बच्चा गिरा, वह लोढ़ा-लौवंशी धर्मशाला परिसर का था। यह टैंक 8 बाय 10 फीट का और 10 फीट गहरा था। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के चलते 29 जून 2026 को नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान धर्मशाला का हिस्सा तोड़ा था। लोगों का कहना है कि करीब 25 दिन से टैंक खुला पड़ा था। किसी ने ध्यान नहीं दिया। घटना के बाद प्रशासन ने इसे बंद कर दिया। वे चेहरे, जो ड्यूटी निभाते, तो जिंदा होता तनुष उदय मंडलोई- नायब तहसीलदार वजह- 29 जून 2026 को अतिक्रमण हटवाने की जिम्मेदारी इन्हीं के पास थी। पूरा काम इन्हीं की देखरेख में हुआ। अतिक्रमण हटाने के बाद खुले सैप्टिंक टैंक की सुरक्षा के निर्देश नहीं दिए। दोबारा देखने की भी जहमत नहीं उठाई। मोनिका पारधी- सीएमओ, नगर परिषद लापरवाही- कार्रवाई के बाद खामोश रहीं। जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा। अब कहती हैं- जब अतिक्रमण हटाया, तब टैंक सुरक्षित था। धर्मशाला वाले इसका लोहा निकाल ले गए। कहती हैं- संबंधित कार्य का तकनीकी दायित्व लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर सुरेशचंद पाटीदार के पास है। रमेश देवड़ा- धर्मशाला के ट्रस्टी वजह- सैप्टिक टैंक धर्मशाला का है। वर्षों से इसका इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन बाउंड्री से बाहर होने के बाद बैरिकेडिंग नहीं कराई। सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए और प्रशासन को भी जानकारी नहीं दी। सुरेशचंद पाटीदार- इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी वजह- अतिक्रमण हटाने के बाद तकनीकी जिम्मेदारी विभाग के पास थी। सुरक्षा के उपाय नहीं किए। खुले सैप्टिक टैंक गड्ढे की जानकारी होने पर उसे तत्काल ढंकवाना, बैरिकेडिंग कराना और संबंधित एजेंसी को निर्देश देना था। जितेंद्र गोहे- राजस्व निरीक्षक जिम्मेदारी– अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नायब तहसीलदार की निगरानी में कराई। वजह- कार्रवाई के बाद स्थल को सुरक्षित स्थिति में संबंधित विभाग को सौंपना और संभावित खतरे की जानकारी देना इनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। गोहे का कहना है कि मुझे उस वक्त राजस्व निरीक्षक का चार्ज नहीं मिला था। दुर्गेश चौधरी–देवेंद्र चौहान- नगर परिषद के इंजीनियर जिम्मेदारी– ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र और नगर में हो रहे कार्यों की देखरेख इन्हीं के जिम्मे है। वजह – अतिक्रमण हटाए जाने के बाद निरीक्षण करने नहीं गए। सैप्टिंक टैंक की रिपोर्ट विभाग को नहीं दी। करना क्या था- सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराने चाहिए थे। चंपाबाई वर्मा- पार्षद, वॉर्ड नंबर 7 सैप्टिक टैंक इन्हीं के वार्ड में है। जन प्रतिनिधि के नाते नगर परिषद को जानकारी देनी थी। किसी भी स्थिति में सुरक्षा के इंतजाम या टैंक को मिट्टी-गिट्टी डालकर बंद कराना था। चंपाबाई वर्मा ने कहा कि जब भी नगर परिषद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करती है, तो पार्षद की सहमति नहीं ली जाती। मनीषा ओमप्रकाश परिहार- अध्यक्ष, नगर परिषद नगर में हो रहे विकास कार्यों पर नजर रखनी थी। जब अतिक्रमण तोड़े जा रहे थे, तो इलाके का निरीक्षण करना चाहिए था। समस्याओं को लेकर प्रशासन से बात करनी चाहिए थी। जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, FIR की जाए ओंकारेश्वर संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी कहते हैं- यहां तीर्थ यात्री श्रद्धा और प्रेम से आते हैं। जब किसी परिवार के साथ ऐसी घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन है? चतुर्थ ज्योतिर्लिंग के नाम पर तीर्थ यात्रियों को आमंत्रित करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जिम्मेदार का ट्रांसफर या उसे सस्पेंड कर दिया जाए। उस पर तो एफआईआर होनी चाहिए और सख्त सजा मिलनी चाहिए। वहीं, दर्शन के लिए ओंकारेश्वर आए हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के वरिष्ठ अधिवक्ता रामस्वरूप साहू कहते हैं कि बच्चे की मौत के मामले में जिम्मेदारों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो सकता है। इसमें पांच साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा, पुलिस जांच और पीएम रिपोर्ट के बाद अन्य धाराएं भी लगेंगी। जब से ये घटना सुनी है, मन व्यथित है। मैं चाहता हूं कि बच्चे की ओर से मैं से केस अदालत में बिना फीस लिए लड़ूं। पिता बोले- धार्मिक यात्रा जिंदगी भर का दुख दे गई मूल रूप से बालाघाट के रहने वाले कैलाश उसराठे नागपुर में प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। कैलाश ने बताया कि शुक्रवार सुबह अपनी ससुराल से सीधे इकलौते बेटे तनुष और पत्नी के साथ ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुए थे। तनुष को रातभर बस में गोदी में लिए बैठे रहे। सुबह करीब 5 बजे ब्रह्मपुरी पार्किंग पहुंच गई। गाड़ी से उतरते समय तनुष की नींद खुल गई। उसने गोद से उतरने की जिद की। नीचे उतरते ही दौड़ लगा दी और देखते ही देखते सैप्टिक टैंक में गिर गया। मेरे तो हाथ–पांव फूल गए। कुछ समझ नहीं आया। उसे बचाने के लिए मैं भी टैंक में कूद गया। गहरे टैंक से बमुश्किल उसे बाहर निकाला। तब तक बड़ी मात्रा में उसके शरीर में गंदा पानी जा चुका था। गंभीर हालत में तनुष को ओंकारेश्वर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां से सनावद रेफर कर दिया गया। यहां रात में इलाज के दौरान मौत हो गई। शनिवार को परिजन पोस्टमॉर्टम के बाद तनुष का शव लेकर बालाघाट चले गए। कैलाश कहते हैं कि यह धार्मिक यात्रा जिंदगी भर का दुख दे गई। इकलौते बेटे को हमेशा के लिए खो दिया। सनावद हॉस्पिटल के डॉ. सुभाष मोरी कहते हैं- तनुष को बचाने की हरसंभव कोशिश की। उसके पेट में काफी ज्यादा मात्रा में सीवेज चला गया था। संक्रमण तेजी से शरीर में फैला। उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। ऑक्सीजन सपोर्ट, अन्य उपचार किए, लेकिन बचा नहीं पाए। सीएम बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कलेक्टर को जवाबदेही तय करने, जांच शुरू करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वालों को बर्खास्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन ने अतिक्रमण नोडल अधिकारी व उपयंत्री सुरेश चंद्र पाटीदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। घाटों और खतरनाक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और नगर परिषद को घाटों पर गंदगी और सीवेज का पानी रोकने की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खतरनाक जगह बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, पुलिस और होमगार्ड की तैनाती की जाए। उन्होंने सीवर चैंबरों का सर्वे कर टूटे-फूटे ढक्कन तत्काल बदलने और मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए। ये खबर भी पढ़ें… अंधेरे में खुले सेप्टिक टैंक में गिरा बच्चा, मौत खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग में खुले पड़े सेप्टिक टैंक में गिरने से घायल 3 वर्षीय मासूम तनुष की इलाज के दौरान मौत हो गई। महाराष्ट्र के नागपुर निवासी कैलाश उसराठे अपने परिवार के साथ दर्शन के लिए ओंकारेश्वर आए थे। पढ़ें पूरी खबर… स्कूल के सामने गड्ढे में डूबे दो छात्र, मौत दमोह जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र के सेमरा गांव में सोमवार दोपहर पानी से भरे 15 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने गांव के ही एक व्यक्ति पर गड्ढा खुदवाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर
