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सीसीटीवी कैमरे दिखावा बनकर न रहें, एक्टिव रखे जाएं:डीजीपी बोले, प्रदेश में एक लाख एआई बेस्ड कैमरे लगाकर अलग-अलग काम में करें उपयोग

डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा है कि जिलों में लगाए गए सीसीटीवी दिखावटी बन कर न रहें, उनको चालू रखा जाए और अपराध नियंत्रण में उपयोग किया जाए। एआई बेस्ड एक लाख कैमरे प्रदेश भर में लगाए जाकर उनका उपयोग अलग-अलग प्रबंधन में किया जाए। इसके साथ ही पुलिस अमले के स्वास्थ्य, सुरक्षा को लेकर भी अधिकारी गंभीरता से काम करें। विभागीय जांच और कोर्ट के मामलों के निराकरण में हीला हवाली करने के बजाय इसे तेजी से निपटाया जाए ताकि समय पर लाभ मिल सके। डीजीपी मकवाणा ने ये बातें पुलिस मुख्यालय में हुई जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोन की दो दिवसीय समीक्षा बैठक के समापन बैठक कार्यक्रम में कहीं। पु लिस महानिदेशक मकवाणा ने इस मौके पर प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही तय करने को लेकर कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े। कोर्ट के पेंडिंग मामलों का जल्द निराकरण करें डीजीपी मकवाणा ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत पेश कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए। विभागीय जांच जल्द पूरी करें, पुलिस अमले को प्रोत्साहित करें डीजीपी ने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए। डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके। सीसीटीवी कैमरे दिखावटी न रहें, चालू रहें, एआई बेस्ड कैमरे लगाएं पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए। सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके। पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का प्रबंधन ठीक करें डीजीपी ने उपलब्ध मानव संसाधनों के समुचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देशित किया कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर पर पदस्थापना की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार संसाधनों का पुनर्विन्यास किया जाए। उन्होंने पुराने अभिलेख एवं आदेशों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी जिलों को पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का व्यवस्थित जिलेवार प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने तथा वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य डीजीपी मकवाणा ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी प्रकार अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह अभियान केंद्र सरकार एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध रूप से “ड्रग फ्री जोन” बनाने के निर्देश दिए। पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य जांच पर फोकस करें, सिविल सर्जन के साथ हर माह मीटिंग करें एसपी डीजीपी ने निर्देशित किया कि हर जिले में पुलिस कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण हेतु जिला पुलिस अधीक्षक प्रतिमाह सिविल सर्जन के साथ बैठक आयोजित करें। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए तथा चिन्हित अस्पतालों के साथ एमओयू कर उपचार एवं भर्ती की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाया जाए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण और क्रम से निराकरण सुनिश्चित करने तथा नियमित जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित कर समीक्षा बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। अपराध नियंत्रण की हुई समीक्षा दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल जोन के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती तथा मॉबलिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की स्थिति का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण किया गया। अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों एवं आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा हुई। बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विगत छह माह में की गई कार्रवाई, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई, बॉर्डर मीटिंग्स एवं नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि 10 महत्वपूर्ण प्रकरणों में लगभग 53 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है।

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