नर्मदापुरम में किसानों का आंदोलन सोमवार को सड़क पर उतर आया। आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने का वक्त तीन बार तय हुआ, तीनों बार टल गया। संयुक्त किसान मोर्चा के हजारों किसान भोपाल कूचकर मुख्यमंत्री आवास घेरने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। 40 से ज्यादा नेताओं को हिरासत में ले लिया। अब प्रदर्शनकारी नेताओं की रिहाई की मांग पर अड़े हुए हैं। किसान इतने नाराज क्यों हैं, मुलाकात आखिर टली क्यों और अब आगे क्या होगा; समझते हैं आज के एमपी एक्सप्लेनर में। सवाल 1: किसान अचानक सड़क पर क्यों उतर आए? जवाब- इस आंदोलन की जड़ में 2 अलग-अलग मुद्दे हैं, जो मिलकर किसानों की नाराजगी बढ़ा रहे हैं। 1. मूंग की MSP खरीदी: केंद्र सरकार के नियम के मुताबिक, तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीदी हो सकती है, लेकिन मूंग जैसी बाकी फसलों की खरीदी अनुमानित उत्पादन के सिर्फ 25% तक ही सीमित है। इस साल मूंग का समर्थन मूल्य ₹8,768 प्रति क्विंटल तय है। चूंकि सिर्फ एक चौथाई उपज ही इस भाव पर बिक पाती है, बाकी 75% किसानों को खुले बाजार में महज ₹6,000-7,000 प्रति क्विंटल पर बेचनी पड़ती है- यानी हर क्विंटल पर सीधा घाटा। मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से यह कोटा 25% से बढ़ाकर 40% करने की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग को खारिज कर दिया। उनका तर्क है- 16 जुलाई तक राज्य में स्वीकृत 4,54,580 मीट्रिक टन कोटे में से सिर्फ 7,947 मीट्रिक टन, यानी महज 2% ही खरीदी की जा सकी है, जिससे अब तक केवल करीब 12,000 किसानों को फायदा मिला है। केंद्र का कहना है कि जो मात्रा पहले से मंजूर है, वही जब पूरी नहीं खरीदी जा रही तो कोटा बढ़ाने पर विचार का सवाल ही नहीं उठता। यानी किसानों की नाराजगी सिर्फ केंद्र के नियम तक सीमित नहीं, राज्य सरकार की खरीद की सुस्त रफ्तार पर भी है। 2. खाद का ई-टोकन सिस्टम: सरकार ने लाइन और भीड़ कम करने के लिए ई-टोकन व्यवस्था शुरू की थी। किसानों का आरोप है कि खाद वितरण के लिए बनाई गई ई-टोकन व्यवस्था में कई खामियां हैं। सर्वर अक्सर ठप रहता है और कई बार पोर्टल पर किसान की लोकेशन ही गलत दिखा देता है। इसे ऐसे समझते हैं- जैसे भोपाल के किसान का टोकन कटनी के डिपो के नाम पर जनरेट हो गया, जिससे उसे खाद के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। कई जिलों में डिपो की संख्या भी किसानों की तादाद के मुकाबले बहुत कम है। यह मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में भी विपक्ष उठा चुका है। सवाल 2: मुख्यमंत्री से मुलाकात क्यों नहीं हो पाई, क्या वे मिलना नहीं चाहते हैं? जवाब- यह पक्के तौर पर कहना मुश्किल है, क्योंकि सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से अब तक यह नहीं बताया गया कि मुलाकात तीन बार क्यों टली? सवाल 3: किसानों को भोपाल जाने से रोका क्यों गया? जवाब- मुलाकात नहीं हो पाने से नाराज संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार से नर्मदापुरम के सेठानी घाट से भोपाल तक पैदल मार्च का ऐलान कर दिया। इसे रोकने के लिए प्रशासन रविवार रात से ही सक्रिय हो गया था। सवाल 4: किसान हनुमान चालीसा, सत्यनारायण कथा क्यों करने लगे? जवाब- रोके जाने के बाद किसानों ने प्रदर्शन के परंपरागत तरीकों से हटकर कई अनोखे तरीके अपनाए। नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए सत्यनारायण भगवान की कथा कराई और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हैं। चाहे एक दिन बैठें या चार दिन। डोलरिया में रोके गए कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया, तो नर्मदापुरम में नेताओं को नजरबंद किए जाने पर किसानों ने 2 मिनट का मौन रखकर फिर हनुमान चालीसा पढ़ी। राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष राकेश गौर ने यहां तक कह दिया कि अगर किसी किसान को हाथ लगाया गया, तो वे नर्मदा नदी में कूद जाएंगे या जहर खा लेंगे। वहीं, क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के हरपाल सिंह सोलंकी ने कहा कि एमपी के इतिहास में ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं देखा, जिसके गांव-गांव में पुतले फूंके गए हों, फिर भी उसका जमीर नहीं जागा। सवाल 5: किसान अब आगे क्या करेंगे? जवाब- संयुक्त किसान मोर्चा की योजना के मुताबिक, 27 जुलाई से शुरू हुई यह पदयात्रा बुधनी, बरखेड़ा, ओबेदुल्लागंज और मंडीदीप होते हुए 29-30 जुलाई तक भोपाल पहुंचेगी। किसान मिसरोद, बाग सेवनिया, रानी कमलापति, बोर्ड ऑफिस, रोशनपुरा और पॉलीटेक्निक चौराहे से होते हुए सीधे मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालेंगे। किसान अपने साथ ट्रैक्टर-पिकअप में भोजन और राशन भी लेकर चलेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हुई या मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं आया, तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा। इसके साथ ही ओबेदुल्लागंज-मिसरोद के बीच रेल मार्ग बाधित करने की भी योजना है। एमपी एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… ‘नामर्दों के प्रदेश-मध्य प्रदेश’ वाली टी-शर्ट कैसे वायरल हुई? दिल्ली के जंतर-मंतर में CJP के प्रोटेस्ट में पहुंचे कुछ युवाओं ने एक टी-शर्ट पहनी, जिस पर लिखा था- ‘नामर्दों के प्रदेश मध्य प्रदेश से भी आए हैं मर्द।’ कुछ यूट्यूबर्स ने इनका इंटरव्यू लिया और वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया। इसके साथ ही प्रदेश में हुए पटवारी घोटाले से लेकर सिरप कांड तक कई मुद्दे फिर चर्चा में आ गए। पढ़ें पूरी खबर…
