सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच शिप्रा नदी के शुद्धीकरण का मुद्दा अब संत समाज ने उठाया है। मंगलवार को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर दास के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक संत उज्जैन से देवास पहुंचे। उन्होंने नागधम्मन नदी और शिप्रा में मिलने वाले दूषित नालों का निरीक्षण किया। हवनीखेड़ी में संतों ने नागधम्मन नदी में बहते काले और दूषित पानी को देखा। इस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सिंहस्थ से पहले शिप्रा को हर हाल में स्वच्छ करना होगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर दास ने बताया कि वे पहले भी यहां आ चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब शिप्रा में दूषित पानी का मिलना हर हाल में बंद कराया जाएगा। बोले- ट्रीटमेंट के बाद भी पीने योग्य नहीं
डॉ. दास ने कहा, “यह पानी इतना दूषित है कि ट्रीटमेंट के बाद भी पीने योग्य नहीं है। ऐसे जहरीले पानी से जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि उज्जैन में 13 नालों को लेकर भी संत समाज लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन या सड़क जाम करना संतों का कार्य नहीं है, लेकिन प्रशासन से समाधान करवाना उनकी जिम्मेदारी है। यदि आवश्यकता पड़ी तो मुख्यमंत्री से भोपाल में व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इस विषय को उठाया जाएगा। डॉ. रामेश्वर दास ने दो टूक कहा कि यदि शिप्रा स्वच्छ नहीं हुई तो मुख्यमंत्री को भी यहां लाकर वास्तविक स्थिति दिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हमारे उज्जैन के हैं, इसलिए कार्रवाई क्यों नहीं होगी, हम खुद जाकर मिलेंगे और उन्हें यहां लाएंगे। श्रद्धालुओं को शुद्ध जल से स्नान करना हमारी जिम्मेदारी
निरीक्षण के बाद संतों का दल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, जहां प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शिप्रा शुद्धीकरण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद डॉ. रामेश्वर दास ने बताया कि प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि फैक्ट्री के ट्रीटमेंट किए गए पानी को भविष्य में शिप्रा में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि कृषि कार्य के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की जा रही है, जिसे जल्द मंजूरी दिलाई जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मई-जून 2027 से पहले शिप्रा में यह दूषित पानी मिलना पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। संतों ने कहा कि सिंहस्थ में देशभर से आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का स्नान शुद्ध जल में कराना उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए प्रशासन और सरकार के साथ समन्वय बनाकर हर संभव प्रयास किए जाएंगे। निरीक्षण के बाद संत सन फार्मा कंपनी पहुंचे। प्रारंभ में उन्हें कुछ समय तक बाहर इंतजार करना पड़ा, जिस पर स्थानीय रहवासियों ने भी नाराजगी व्यक्त की। बाद में कंपनी प्रबंधन ने संतों को ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण कराया।
