उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से बिजली लाइन शिफ्टिंग का काम किया जा रहा है। दैनिक भास्कर ने इस काम में कथित गड़बड़ियों का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि ठेकेदारों के बजाय सहायक यंत्री रविकांत मालवीय खुद काम करवा रहे थे। भास्कर ने उज्जैन पश्चिम संभाग की 75 लाइनों में से तीन की पड़ताल की। इनमें जहां 100% नए खंभे लगाए जाने थे, वहां केवल 20% नए पोल मिले। बाकी 80% खंभे 15-20 साल पुराने, जंग लगे या जले हुए थे। आरोप है कि इन पर सिल्वर पेंट करके दोबारा इस्तेमाल किया गया। 28 और 29 सितंबर को पब्लिश्ड खबरों के बाद विभाग ने छह लोगों पर कार्रवाई की। हालांकि, मॉनिटरिंग, एस्टिमेट तैयार करने और सामग्री का हिसाब रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में वरिष्ठ अधिकारियों से संबंधित कर्मचारियों के संपर्क और महाकाल मंदिर में VIP दर्शन की व्यवस्था संभालने के दावे भी सामने आए हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। महाकाल दर्शन कराने का ईई कुमरावत को वीआईपी फायदा? ‘मालवीय एंड एसोसिएट्स’ नाम के इस सिंडिकेट के मुख्य किरदारों में सबसे ऊपर नाम आता है उच्च दाब उज्जैन वेस्ट जोन के कार्यपालन यंत्री (EE) सतीश कुमरावत का। सूत्रों के मुताबिक, सतीश कुमरावत की पोस्टिंग महाकाल मंदिर क्षेत्र में है। विद्युत कंपनी के एमडी से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, उनके परिवारों और रिश्तेदारों को जब भी महाकाल मंदिर दर्शन के लिए आना होता है, तो वीआईपी प्रोटोकॉल और दर्शन की पूरी व्यवस्था कुमरावत ही संभालता है। अफसरों को खुश रखने का यही ‘वीआईपी प्रोटोकॉल’ अब उसके लिए ढाल बन चुका है। इसी वजह से गंभीर गबन और शिकायतों के बावजूद वरिष्ठ अधिकारी उसके खिलाफ एक्शन लेने से कतरा रहे हैं। खुलासे के बाद अब रात के अंधेरे में बदले जा रहे पोल भास्कर इन्वेस्टिगेशन का पार्ट-2 सामने आते ही विभाग ने आनन-फानन में छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को शांत करने की कोशिश की। अब विभाग चुपचाप तीन प्रमुख लाइनें- सदावल हेलीपैड, मंगलनाथ मंदिर से कमेड़ ग्रिड और केडी गेट से तीन इमली तक लगाए गए पुराने पोल और तारों को रातों-रात हटाकर नए पोल लगा रहा है। जो 15-20 साल पुराने जंग लगे खंभे पहले स्टोर में जमा नहीं किए जा रहे थे, अब उन्हें ट्रकों में भरकर क्षेत्रीय स्टोर में पहुंचाया जा रहा है।
21 मई की जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का जिक्र, कार्रवाई पर सवाल भास्कर को पता चला कि इस घोटाले की शिकायत पिछले साल नवंबर के महीने में की गई थी। इस साल मई में अतिरिक्त मुख्य अभियंता आशीष आचार्य और अधीक्षण अभियंता (सतर्कता) बृजेंद्र कुमार यादव ने पूरे मामले की जांच की। कॉरपोरेट कार्यालय इंदौर को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि की थी। 1. रजिस्टर और रिकॉर्ड गायब: मटेरियल रिकॉर्ड से संबंधित (MAS) रजिस्टर गायब मिला। क्षेत्रीय भंडार से सामग्री निकासी का कोई व्यवस्थित गेट पास या रिकॉर्ड नहीं था। 2. ढाबे में शराब और सरकारी पोल: विभागीय जांच में सामने आया कि आउटसोर्स कर्मचारी राहुल कुमार और कार्यालय सहायक सौरभ कुशवाहा उर्फ लकी ‘लकी ढाबा’ पर बैठकर शराब पी रहे थे। उस ढाबा परिसर में सरकारी बिजली के पोल रखे मिले। 3. निजी गोडाउन में मिला सामान: शिकायतों के बाद जब निजी ठिकाने पर छापा मारा गया, तो सीमेंट कंक्रीट मशीन, पोल बनाने के सांचे और लोहे के पोल बरामद हुए। स्थानीय निवासियों ने पुष्टि की कि कुछ दिन पहले ही यहां से भारी मात्रा में तांबे का तार उठाया गया था। 700-800 किलो कॉपर वायर चोरी: गबन हुआ, पर न FIR हुई न एक्शन आंतरिक जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि सिंडिकेट के रविकांत मालवीय ने कार्यालय परिसर में सुरक्षित रखे विभाग के 700 से 800 किलोग्राम भारी तांबे के तार (कॉपर कंडक्टर) को चुराकर बेच दिया। जब ऑडिट में माल कम पड़ा, तो कागजों में दर्ज कर दिया गया कि ‘अज्ञात चोरों ने तांबा चुरा लिया है।’ जांच अधिकारियों ने इस आपराधिक गबन की पुष्टि की थी। इसके बावजूद EE सतीश कुमरावत ने न तो पुलिस में FIR दर्ज कराई, न ही स्टोर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और न ही कोई विभागीय कार्रवाई की। ‘अफ़सरों और ठेकेदारों के दबाव में दबाया गया मामला’ इस पूरे मामले की जांच करने वाले अधीक्षण अभियंता (DE) बृजेंद्र यादव से जब भास्कर ने बात की तो उन्होंने कहा -मैंने और मेरे बॉस ने रविकांत मालवीय वाले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके विभाग को रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन उनके ऊपर कोई एक्शन नहीं हुआ। जब मैं इस मामले की जांच कर रहा था, तब मेरे ऊपर बड़े-बड़े लोगों के फोन आ रहे थे। ऊपरी दबाव बनाया जा रहा था और ठेकेदारों से कॉल करवाए जा रहे थे। तीन बड़े सवाल, जिनके जवाब बाकी हैं दैनिक भास्कर एप पर ये खबरें पब्लिश हुई थीं….. 28 सितंबर को पब्लिश पार्ट-1 पढे़… सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में घोटाला…250 करोड़ का खेल:पुराने खंभों पर चांदी का रंग, 40 ट्रांसफॉर्मर गायब; अफसरों ने ठेकेदार बनकर की गड़बड़ी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 5 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य हो रहे हैं। इसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर हैं। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में 75 लाइनों की शिफ्टिंग चल रही है। दैनिक भास्कर ने इनमें से 3 लाइनों की पड़ताल की तो गड़बड़ी सामने आई। जहां नए पोल लगाए जाने थे, वहां सिर्फ 20% नए पोल लगाए गए। 80% पुराने पोल को सिल्वर पेंट कर दोबारा इस्तेमाल किया गया। पढ़ें पूरी खबर… 29 सितंबर को पब्लिश पार्ट-2 पढे़… सिंहस्थ के 250-करोड़ के काम में ‘मालवीय सिंडिकेट’ का खेल?:ड्राइवर 3 करोड़ की पोल फैक्ट्री का प्रोपराइटर; स्टिंग में बोला- अफसर मैनेज, टेस्ट रिपोर्ट पास दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-1 में आपने पढ़ा और देखा कि उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में बिजली लाइन शिफ्टिंग के करीब ₹250 करोड़ के काम में गड़बड़ी की गई। पड़ताल में बिजली विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के संकेत मिले। अब भास्कर की पड़ताल में विभागीय गलियारों में ‘मालवीय एंड एसोसिएट्स’ के नाम से चर्चित कथित सिंडिकेट की भूमिका सामने आई है। भास्कर रिपोर्टर ने ठेकेदार बनकर स्टिंग किया तो सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने अफसरों के साथ मिलकर काम ‘मैनेज’ करने की बात कही। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर इम्पैक्ट… सिंहस्थ के 250 करोड़ के घोटाले में 6 पर एक्शन:सहायक यंत्री रविकांत मालवीय और श्रीराम पटेल सस्पेंड, दो आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त, दो का ट्रांसफर सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में बिजली लाइन शिफ्टिंग में हुए बड़े घोटाले के खुलासे के बाद मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया, एक सहायक इंजीनियर और एक लाइनमैन को सस्पेंड कर दिया और दो कर्मचारियों का तबादला कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
