साल 2020-21 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 67 हजार क्विंटल गेहूं नागरिक आपूर्ति निगम का सिरदर्द बन गया। दो बार टेंडर जारी होने के बाद भी 12.89 करोड़ रुपए में खरीदे गए इस गेहूं को खरीदने कोई सामने नहीं आया। नागदा-उन्हेल के बीच ग्राम पिपलिया मोलू के ओपन कैप में रखा गेहूं पूरी तरह सड़कर खराब हो गया। फिर से सैम्पल परीक्षण करवाकर विभाग ने कैटल फीड, पोल्ट्री या खाद आदि के लिए कैटेगरी बनाकर अब इस गेहूं को खपाने की तैयारी की है। 6 साल से ऐसे ही बरसाती के सहारे रखा गेहूं धूप और आंधी-बारिश झेल रहा है। बरसाती फटने से कई बार गेहूं बारिश में भीग गया। स्थिति यह है कि ये गेहूं अब मवेशियों को खिलाने के लायक भी नहीं बचा। इसे अब पोल्ट्री, खाद या शराब बनाने आदि उपयोग में ही लिया जा सकता है। यही वजह है कि मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक-एक कर दो बार टेंडर निकाले, लेकिन इसके बाद भी कोई खरीदार नहीं मिला। ऐसे में विभाग ने तीन कैटेगरी में गेहूं की औसत मात्रा निकालते हुए री-टेंडर कर दिया है। तत्कालीन अफसरों की गलती से सड़ा गेहूं : खरीदी खत्म होने के बाद ओपन कैप में रखे गेहूं का परिवहन कराने के लिए वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर विनोद शर्मा ने ध्यान नहीं दिया। न ही मप्र स्टेट सिविल सप्लाई के तत्कालीन अफसरों ने इसकी जानकारी ली। अफसर चाहते तो उक्त गेहूं का जल्दी उठाव करा देते और करोड़ों के गेहूं को सड़ने से बचा लेते। वर्तमान ब्रांच मैनेजर अंकित सिसौदिया गेहूं परिवहन के लिए कई बार मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (नॉन) को पत्र भेज चुके हैं। हर माह 35 हजार खर्च : 67 हजार क्विंटल सड़े गेहूं की रखवाली के लिए वेयर हाउस कॉर्पोरेशन को यहां दो चौकीदार रखना पड़े। इसके अलावा बरसाती फटने पर बदलने और मॉनीटरिंग का खर्च मिलाकर 30-35 हजार रुपए प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। 6 साल में विभाग ने सड़े गेहूं की रखवाली पर 25 लाख खर्च किए। ऐसे जहां भी गेहूं रखा है, उनकी जांच करवाकर बेचने की प्रक्रिया शुरू करवा रहे हैं। उज्जैन में यदि 12 करोड़ से ज्यादा कीमत का गेहूं खुले में रखा है तो इसे प्राथमिकता से दिखवाएंगे, ताकि रखरखाव पर हो रहे अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सके। – डॉ. केपी यादव, अध्यक्ष मप्र स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड मप्र शासन भोपाल
