एमपी की राजधानी भोपाल के आसपास के जिलों से मूंग उत्पादक किसान सरकारी खरीदी न होने से नाराज होकर आंदोलित हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से किसान पैदल भोपाल पहुंचे और राजधानी में सीएम हाउस तक आंदोलन कर सरकार से मूंग की सौ फीसदी खरीदी कराने की मांग कर रहे हैं। इस बीच एमपी सरकार की ओर से 60 प्रतिशत मूंग खरीदे जाने की किसानों की मांग भी मान ली। एमपी सरकार की ओर से केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को तीन बार पत्र लिखकर एमपी की मूंग खरीदी का कोटा 25 फीसदी से बढ़ाकर 40% करने का अनुरोध कर चुकी है। एमपी सरकार को केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाबी पत्र लिखकर ये कहा है कि एमपी को मिले कोटे की 16 जुलाई तक मात्र दो फीसदी मूंग खरीदी हुई है। केन्द्र ने एमपी से साफ कहा है कि पहले अपने कोटे की मूंग खरीदी करो उसके बाद कोटा बढ़ाने पर विचार करेंगे। केन्द्र और एमपी के बीच चल रहे लेटर वॉर की पड़ताल करने पर ये समझ आया कि आखिर मूंग उत्पादक किसान इस बार क्यों इतने आक्रोशित हैं? और सरकार की मूंग खरीदी व्यवस्था इस बार क्यों गड़बड़ाई हुई है? देश में सबसे ज्यादा मूंग MP खरीदता है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश को 3346 करोड़ रुपए की चपत लगी है। देखिए ऐसे चला लेटर वॉर… कोटे से ज्यादा खरीदी पर हर साल 1153 करोड़ का नुकसान एमपी सरकार को कोटे से ज्यादा मूंग खरीदी पर हर साल साढे़ 11 सौ करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केन्द्र से तय कोटे से ज्यादा मूंग खरीदी करने पर मप्र सरकार को उसकी खरीदी से लेकर उसके परिवहन, वेयर हाउस में भंडारण और बाजार में बेचने के बाद भी नुकसान उठाना पड़ता है। कुल 3346 करोड़ की हानि का अनुमान दस्तावेज के अनुसार तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के कारण सरकार को कुल 3,346 करोड़ रुपए की हानि हुई या होने का अनुमान है। यानी औसतन हर साल करीब 1,115 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। दूसरे राज्यों का कोटा एमपी में शिफ्ट कराने की मांग मप्र सरकार ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से राज्य की मूंग खरीदी का कोटा 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके पीछे एमपी सरकार का तर्क है कि सबसे ज्यादा मूंग खरीदी एमपी में होती है जिन राज्यों में मूंंग की खरीदी कम होती है उन राज्यों का कोटा एमपी को शिफ्ट कर दिया जाए। ऐसे में केन्द्र का देश भर से खरीदी के कोटे की लिमिट नहीं बढ़ेगी। एमपी देश में सबसे ज्यादा मूंग खरीदने वाला राज्य केंद्र सरकार के प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत मूंग खरीदी के तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग खरीदने वाला राज्य है। प्रदेश में हर साल उत्पादन का करीब 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, जबकि राजस्थान में यह हिस्सा 5 से 10 प्रतिशत के बीच है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिकांश वर्षों में खरीदी का प्रतिशत 3 प्रतिशत से भी कम या शून्य रहा। दस्तावेज के अनुसार राज्यों के लिए हर वर्ष केंद्र सरकार खरीदी का लक्ष्य (स्वीकृत मात्रा) तय करती है। मध्य प्रदेश के लिए यह लक्ष्य लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2023-24 में 2.76 लाख मीट्रिक टन, 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन और 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी की अनुमति दी गई। इसके मुकाबले वास्तविक खरीदी क्रमशः 2.76 लाख, 2.90 लाख और 4.20 लाख मीट्रिक टन रही। यानी 2025-26 में प्रदेश ने स्वीकृत लक्ष्य से भी अधिक मूंग खरीदी। इसके विपरीत राजस्थान में खरीदी का लक्ष्य अधिक होने के बावजूद वास्तविक खरीदी उत्पादन के 10 प्रतिशत के आसपास ही रही। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई वर्षों में स्वीकृति मिलने के बावजूद या तो खरीदी नहीं हुई या बहुत कम हुई। ये खबर भी पढ़ें… शिवराज बोले- केंद्र ने मूंग खरीदी का टारगेट नहीं दिया मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम रद्द करने समेत 3 मांगों को लेकर भोपाल में किसानों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी है। समाधान निकालने के लिए मंत्रालय में 3 मंत्रियों और सीनियर अधिकारियों के साथ किसानों के 15 प्रतिनिधियों की बैठक हो रही है। 2 घंटे की बैठक बेनतीजा रही।पूरी खबर पढ़ें
