अगस्त की विदाई के साथ मध्य प्रदेश में फिर से बाढ़ के हालात बन गए हैं। शनिवार को छतरपुर, पन्ना, सतना और टीकमगढ़ में बाढ़ आ गई। चित्रकूट में गोरगी बांध फूट पड़ा तो मंदाकिनी नदी 30 फीट उफान पर रही। सतना में रेलवे ट्रैक और थाने तक डूब गए। वहीं, पन्ना में कई गांव टापू बन गए। रविवार को भी 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक, प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की वजह से सिस्टम स्ट्रॉन्ग हो गया है। इस वजह से शनिवार को नदी-नाले उफान पर रहे। गोरगी बांध फूटने के बाद कई इलाकों में पानी भर गया है। सतना-चित्रकूट मार्ग 3 जगहों से बंद हो गया है। मंदाकिनी नदी में करीब 30 फीट ऊंची बाढ़ है। तेज बहाव में रामघाट का बड़ा पुल बह गया। कई मोहल्लों में नाव चली। रामघाट और भरतघाट पूरी तरह जलमग्न हैं। घाट किनारे करीब 400 दुकानें डूब गई हैं। बाढ़ का पानी नयागांव राजमहल के अंदर तक पहुंच गया है। लोग घरों और होटलों में फंसे रहें। SDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटी रहीं। सतना के मझगवां में रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया। आनंद विहार से रीवा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन कई घंटों तक खड़ी रही। नागौद में थाने और पेट्रोल पंप में पानी घुस गया। कोठी में मकान गिरने से 4 भैंस दब गईं, जिनमें 2 की मौत हो गई। पन्ना में गांव टापू बन गए। शनिवार को बानसुजारा बांध के 8 गेट खोलकर धसान नदी में 792 घन मीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ा गया। देखिए, शनिवार को सतना-चित्रकूट के हालात… आज भी भारी बारिश का अलर्ट
रविवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। अब तक 27 इंच बारिश
IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 694.5 मिमी यानी, 27 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 30 इंच (762.3 मिमी) की तुलना में 2.7 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 9 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। 39 जिलों में 1% से 50% तक कम बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 1% से 50% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 51% कम पानी गिरा है। 16 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून के बाद जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई का कोटा तो फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड
भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं। इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी
इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बनाया था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है। ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। इस महीने की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है। जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी
जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी, वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी। जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो साल 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश
उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।
