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शिक्षकों की छंटनी के फैसले से एमपी में गुस्सा:पात्रता परीक्षा का विरोध बढ़ा; इस माह जिलेवार बैठकें भी, अप्रैल में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी

शिक्षकों में पात्रता परीक्षा लिए जाने और छंटनी के स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के बाद 1995 के बाद सिलेक्ट हुए साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों और उनके परिजनों में सरकार के एक्शन को लेकर गुस्सा है। इस मामले में शिक्षकों के संगठन पहले सरकार को फैसले पर पुनर्विचार करने और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए आग्रह करेंगे। सरकार ने नहीं सुनी तो शिक्षक खुद कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर। वे बताएंगे कि उनकी नियुक्ति सरकार के तब हुई भर्तियों के लिए प्रभावी नियमों के आधार पर ही हुई है। ई-अटेंडेंस के विरोध के बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पात्रता परीक्षा लिए जाने संबंधी आदेश जारी किए जाने के बाद अब शिक्षक बच्चों की परीक्षा खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार के फैसले के विरोध के चलते बच्चों की पढ़ाई और रिजल्ट पर असर न पड़े, लेकिन 15 मार्च के बाद इनके विरोध में तेजी आना तय बताया जा रहा है। सरकार से रिव्यू पिटीशन का आग्रह करेंगे
राज्य अध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश प्रसाद यादव कहते हैं कि प्रदेश के सभी जिलों में अध्यापक संघ के पदाधिकारियों की बैठक 15 मार्च को होगी। इसमें आगामी रणनीति तय करने के साथ मार्च के अंत तक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यादव कहते हैं कि 2009 में केंद्र सरकार द्वारा आरटीई लागू होने के बाद एमपी सरकार ने 2011 से यह कानून लागू किया है। इसके बाद जो भी परीक्षाएं हो रही हैं वह आरटीई के आधार पर ही हो रही हैं। इसके पहले जो कानून और व्यवस्था तय थी। सरकार ने उसी के आधार पर भर्तियां की हैं। यादव ने कहा कि यूपी, जम्मू कश्मीर समेत देश के पांच से छह राज्यों ने इस मामले मे रिव्यू पिटीशन दायर कर स्थगन लिया है। ऐसे में एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर उनसे रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए कहा जाएगा। अगर सरकार की ओर से पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में नहीं लगती है तो संघ की ओर से पिटीशन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पात्रता परीक्षा का नियम लागू करने से प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षकों के साढ़े चार लाख परिजन प्रभावित होंगे। 12 अप्रैल को भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन
राज्य शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष भरत पटेल कहते हैं कि संघ की ओर से 12 अप्रैल को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मिलकर आग्रह किया जाएगा कि शिक्षकों और उनके परिवारजनों को हित को देखते हुए सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन लगाए। पटेल ने कहा कि पुलिस में भर्ती होने के बाद कोई भी पुलिसकर्मी बार-बार शारीरिक परीक्षा थोड़े ही देता है जो शिक्षकों के साथ ऐसा किया जा रहा है। सरकार के जनप्रतिनिधि जनता के पालक होते हैं और पालक के हितों का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मार्च में परीक्षा खत्म होने और अप्रेल के पहले सप्ताह में एडमिशन की कार्यवाही के बाद संघ ने 12 अप्रैल को प्रदर्शन का फैसला किया है। इसलिए बढ़ रहा शिक्षकों और परिजन में आक्रोश
दरअसल इसी माह स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने से पहले हुई थी। उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य होगा। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी। टेस्ट के लिए 2 साल की समय सीमा तय
स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर जारी निर्देश में कहा है कि संबंधित शिक्षकों को आदेश जारी होने की तारीख से दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय सीमा में टीईटी पास नहीं करता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है। संचालनालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की सूचना दें। शिक्षा विभाग के अनुसार टीईटी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित करने का प्रस्ताव है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति या पदोन्नति के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भी टीईटी पास होना अनिवार्य रहेगा। ये खबर भी पढ़ें… एमपी के डेढ़ लाख शिक्षकों की छंटनी हो सकती है मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने से पहले हुई थी। उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य होगा।पूरी खबर पढ़ें

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