लता मंगेशकर की जन्मभूमि इंदौर में सोमवार शाम आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। लता मंगेशकर सभागार में सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा को राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान-2026 से अलंकृत किया गया। उन्हें सम्मान स्वरूप 5 लाख रुपए की करमुक्त राशि और प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की गई। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली जुड़े। शान्तनु मोइत्रा भारतीय सिनेमा के प्रमुख संगीतकार और बैकग्राउंड स्कोर कम्पोजर हैं। ‘परिणीता’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘लगे रहो मुन्नाभाई’, ‘3 इडियट्स’, ‘मद्रास कैफे’, ‘पीकू’, ‘अक्टूबर’ और ‘12वीं फेल’ जैसी फिल्मों में उनके संगीत को पहचान मिली। वर्ष 2014 में तेलुगु फिल्म ‘ना बंगारू तल्ली’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। राष्ट्रीय लता अलंकरण सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध संगीत निर्देशक शांतनु मोइत्रा ने सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि लता जी के साथ काम करने और उनके साथ गाना गाने की उनकी बहुत इच्छा थी, लेकिन जब तक वे फिल्म इंडस्ट्री में आए, तब तक लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना काफी कम कर दिया था। इंदौर में सम्मान समारोह के दौरान मोइत्रा ने बताया कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें लता मंगेशकर समेत देश के दिग्गज प्लेबैक सिंगर्स के साथ मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि लता जी से मिलने की उत्सुकता इतनी थी कि मुलाकात से एक रात पहले वे सो ही नहीं पाए थे और स्टूडियो में निर्धारित समय से करीब दो घंटे पहले पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि स्टूडियो पहुंचने के बाद लता जी आईं और बंगाली में उनसे कहा, “नमस्कार, केमोन आछे?” इसके बाद दोनों के बीच काफी देर तक बंगाली में बातचीत हुई। मोइत्रा ने उनसे पूछा कि उन्हें इतनी अच्छी बंगाली कैसे आती है। इस पर लता जी ने बताया कि जिस दौर में उन्होंने गाना शुरू किया था, उनके कई सह-कलाकार, गायक, संगीत निर्देशक और फिल्म निर्देशक बंगाली थे। चार लाइन गाने के बाद भी संतुष्ट नहीं थीं लता जी शांतनु मोइत्रा ने बताया कि एक अवसर पर लता मंगेशकर ने उनके लिए चार लाइनें गाईं। इसके बाद जो हुआ, वह उनके लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गया। उन्होंने कहा कि लता जी ने उनसे फोन पर कहा कि उन्होंने पिछली रात काफी देर तक सोचा और उन्हें लगा कि तीसरी लाइन वे इससे बेहतर गा सकती थीं। इसके बाद उन्होंने पूछा कि “मैं फिर से आकर गाऊं?” मोइत्रा ने कहा कि उन्होंने लता जी से कहा कि अगर वे कह रही हैं तो वे जरूर आकर गाएं, हालांकि उन्हें रिकॉर्डिंग बिल्कुल सही लगी थी। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए इसलिए भी अविश्वसनीय था, क्योंकि जिस कलाकार ने अपने जीवन में हजारों महान गीत गाए, वह केवल चार पंक्तियों को लेकर भी उतनी ही गंभीर और सजग थीं। लता जी से सीखा- महानता के पीछे वर्क एथिक्स और इंटीग्रिटी मोइत्रा ने कहा कि हम अक्सर सोचते हैं कि ऐसी प्रतिभा भगवान का दिया हुआ वरदान होती है, लेकिन उनके पीछे वर्क एथिक्स, इंटीग्रिटी और अपने काम के प्रति प्रेम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर चार लाइन गा रही हों या कोई महाकाव्य रच रही हों, उनके काम के प्रति दृष्टिकोण में कोई अंतर नहीं था। वे पूरी श्रद्धा, गंभीरता और तैयारी के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती थीं। मोइत्रा ने कहा कि लता जी जैसा बनना किसी के लिए संभव नहीं है, लेकिन अगर उनके आसपास भी पहुंचना है तो उनके वर्क एथिक्स, इंटीग्रिटी और काम के प्रति प्रेम को अपनाना जरूरी है। हर गाना बनाते समय याद आती हैं लता जी शांतनु मोइत्रा ने कहा कि जब भी वे कोई गाना बनाते हैं, उनके मन में यह सवाल आता है कि अगर लता जी इसे गातीं तो किस तरह गातीं और क्या उन्हें यह गाना पसंद आता। उन्होंने कहा कि वे आज भी मन में लता जी की कल्पना करते हैं और सोचते हैं कि वे उनके बनाए गीत को मंजूरी देतीं या नहीं। मोइत्रा ने बताया कि उनके द्वारा तैयार किया गया पहला महिला आवाज वाला गीत भी लता मंगेशकर को समर्पित था। उन्होंने समारोह में उस गीत की कुछ पंक्तियां गाईं और मौजूद लोगों से भी उनके साथ गाने का आग्रह किया। लता मंगेशकर की स्मृति और उनके संगीत योगदान को याद करते हुए मोइत्रा ने कहा कि उनके लिए यह सम्मान सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस महान कलाकार के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर भी है। न्यूयॉर्क के अनुभव साझा किए संगीतकार शांतनु मोइत्रा ने कहा कि संगीत और लता मंगेशकर की आवाज दुनिया को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने अपना एक अनुभव साझा करते हुए बताया एक दिन मैं न्यूयॉर्क में टैक्सी में बैठा था। टैक्सी ड्राइवर ने मुझसे पूछा कि आप कहां से आए हैं? मैंने कहा- इंडिया से। इसके बाद वह मुझसे लता मंगेशकर के बारे में बात करने लगा। उसने कहा कि वह लता जी का बहुत बड़ा फैन है और उनकी आवाज उसे बहुत पसंद है। उस पल मुझे महसूस हुआ कि लता मंगेशकर की आवाज और संगीत की कोई सीमा नहीं है, वह पूरी दुनिया के लोगों को जोड़ता है। कार्यक्रम में एमपी के मंत्री तुलसीराम सिलावट और सांसद शंकर लालवानी मौजूद रहे। रात को गायक सचेत और परंपरा ने भी मंच पर अपनी प्रस्तुति दी। सीएम बोले-लताजी की जन्म्स्थली एमपी होना गौरव की बात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि भारत रत्न लता मंगेशकर के नाम पर स्थापित यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित सम्मानों के समान है। लता जी की जन्मस्थली इंदौर होना पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर को देश-दुनिया ने केवल गायिका नहीं, बल्कि संगीत की महान विभूति के रूप में स्वीकार किया, जिनके सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति थी। भक्ति से देशभक्ति और प्रेम से विरह तक हर भाव को दिया स्वर मुख्यमंत्री ने कहा कि लता जी ने भक्ति, देशभक्ति, दोस्ती, प्रेम और विरह सहित जीवन के हर भाव को अपनी आवाज से अमर किया। उन्होंने 30 से अधिक भाषाओं और बोलियों में हजारों गीत गाए। शास्त्रीय, सुगम, भक्ति और लोक संगीत में उनकी गायकी की विविधता अद्भुत थी। राष्ट्रीय पर्वों पर उनके देशभक्ति गीत और गणेश उत्सव व नवरात्रि में उनके भजन आज भी लोगों के बीच विशेष स्थान रखते हैं। शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान से सम्मानित शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा से देश के संगीत जगत को समृद्ध किया है। उन्होंने मोइत्रा की चर्चित रचनाओं और शिव तांडव स्तोत्र व राम-सिया भजन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली कलाकारों का सम्मान मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है। मालवा की धरती हमेशा कला और प्रतिभाओं को सम्मान देती रही है। कला और प्रतिभा की समृद्ध परंपरा डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती महाकवि कालिदास और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान रचनाकारों की परंपरा से समृद्ध रही है। साहित्य, संगीत, कला और फिल्म जगत की अनेक प्रतिभाओं का संबंध प्रदेश से रहा है। राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान समारोह इसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। पहले दिन ‘अमर लता हमारी लता’ में गूंजे लता के गीत समारोह के पहले दिन रविवार को ‘अमर लता हमारी लता’ संगीत संध्या आयोजित हुई। इंदौर के कलाकारों ने लता मंगेशकर के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियां देकर उन्हें सुरमयी श्रद्धांजलि दी। अलग-अलग दौर के गीतों ने श्रोताओं को लता जी की यादों से जोड़ा। संगीत संध्या से पहले राज्य स्तरीय लता मंगेशकर सुगम संगीत प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें प्रदेश के नौ संभागों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जूनियर वर्ग में संजोत सिंह गंभीर प्रथम, अमोदिता राय द्वितीय और तीर्थ झांसीवाले तृतीय रहे। सीनियर वर्ग में मानसी पांडे प्रथम, गोविंद तिवारी द्वितीय और अभय आहूजा तृतीय रहे। 1984 में हुई थी सम्मान की शुरुआत मध्यप्रदेश शासन ने सुगम संगीत के क्षेत्र में कलात्मक श्रेष्ठता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 1984 में राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान की शुरुआत की थी। यह सम्मान बारी-बारी से संगीत निर्देशन और गायन के क्षेत्र में दिया जाता है। अब तक देश की कई प्रमुख संगीत हस्तियां इससे सम्मानित हो चुकी हैं। पिछले वर्ष संगीत निर्देशन के लिए शंकर-एहसान-लॉय और पार्श्व गायन के लिए सोनू निगम को सम्मान दिया गया था।
