विदिशा के पूर्व विधायक शशांक भार्गव एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनका कोई बयान या आंदोलन नहीं, बल्कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट है। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भाजपा से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट हटने के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे भाजपा से संभावित दूरी या नई राजनीतिक रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, शशांक भार्गव ने इन अटकलों को फिलहाल कोई तूल नहीं दिया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं और उन्हें भाजपा से संबंधित पोस्ट हटने की कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस से भाजपा तक का राजनीतिक सफर शशांक भार्गव ने 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विदिशा सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु और पूर्व मंत्री सुरेश पचौरी के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा में शामिल होने के बाद माना जा रहा था कि उन्हें संगठन या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद वे किसानों के मुद्दों, स्थानीय समस्याओं और जनहित के मामलों को लेकर लगातार सक्रिय बने रहे। आंदोलन, केस और फिर सुप्रीम कोर्ट से राहत अप्रैल 2026 में किसानों की समस्याओं को लेकर उन्होंने आंदोलन किया था। इसी दौरान एक किसान की आत्महत्या के मामले में उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ। केस दर्ज होने के बाद वे लगभग 90 दिनों तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद उनकी सक्रियता बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन इसी बीच उनके सोशल मीडिया अकाउंट से भाजपा से जुड़ी अधिकांश पोस्ट हटने की जानकारी सामने आई, जिसने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया। समर्थकों ने उठाए सवाल शशांक भार्गव के समर्थक देवेंद्र कुमार का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के अगले ही दिन भाजपा में शामिल होने के बाद की अधिकांश तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट अकाउंट से हट चुकी थीं। वहीं, कांग्रेस के समय की कई पुरानी पोस्ट अब भी मौजूद हैं। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल सोशल मीडिया का तकनीकी बदलाव है या फिर किसी बड़े राजनीतिक फैसले की भूमिका तैयार की जा रही है। फिलहाल सिर्फ अटकलें, कोई आधिकारिक संकेत नहीं हालांकि, अभी तक शशांक भार्गव या भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में भाजपा से दूरी या किसी नए राजनीतिक कदम को लेकर लगाए जा रहे सभी कयास फिलहाल अटकलों तक ही सीमित हैं। आने वाले दिनों में शशांक भार्गव की राजनीतिक गतिविधियां इन चर्चाओं की दिशा तय कर सकती हैं।
