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विस्थापन के 5 महीने बाद भी सुविधाएं अधूरी:न घर मिला, न स्कूल; सांप-बिच्छुओं के बीच जिंदगी काट रहे 800 परिवार

“बड़े-बड़े वादे किए गए थे। कहा गया था कि विस्थापन के बाद सड़क होगी, पानी मिलेगा और बच्चों के लिए स्कूल होगा। अधिकारी आज आकर देखें कि हम कैसे जानवरों जैसी जिंदगी जी रहे हैं। रोज मौत से सामना होता है।” यह दर्द जबलपुर मेडिकल कॉलेज के पास से विस्थापित होकर तेवर गांव में बसाए गए परिवारों का है। करीब पांच महीने पहले प्रशासन और नगर निगम की टीम ने 800 से अधिक परिवारों को करीब 15 किलोमीटर दूर तेवर में शिफ्ट किया था। उस समय उन्हें सड़क, पानी, बिजली, मकान और बच्चों की पढ़ाई जैसी सुविधाएं देने का भरोसा दिया गया था। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की बातों पर भरोसा कर वे यहां आ तो गए, लेकिन इसके बाद अधिकारी पलटकर देखने तक नहीं आए। सबसे पहले देखिए विस्थापन की 3 तस्वीरें… क्यों किया गया विस्थापन? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अक्टूबर 2023 को जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती के अवसर पर करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले ‘वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक और उद्यान’ का भूमि पूजन और शिलान्यास किया था। 21 एकड़ में बनने वाले इस परिसर में भव्य संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। इसमें रानी दुर्गावती के शौर्य और गोंडवाना के इतिहास के साथ जनजातीय कला, संस्कृति और जीवनशैली को प्रदर्शित किया जाएगा। बारिश के साथ बस्ती में आ जाते हैं सांप-गोह नगर निगम ने विस्थापित परिवारों को तेवर गांव से लगे मैदान में बसाया है। यहां सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था होने का दावा किया गया था। दैनिक भास्कर की टीम जब बस्ती में पहुंची तो रहवासियों ने अलग ही तस्वीर बताई। राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि यहां सांप और गोह आए दिन नजर आते हैं। दो दिन पहले काम से लौटे तो घर के पास बिजली नहीं थी। गेट खोलते समय पैर सांप के ऊपर पड़ गया। गनीमत रही कि सांप ने काटा नहीं। उनका कहना है कि बीमारी या इमरजेंसी में रात के समय बस्ती से बाहर निकलना भी मुश्किल है। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ही सबसे बड़ा सहारा है। ढाई लाख में घर का वादा, फिर योजना बंद होने की बात सोनू केवट ने बताया कि विस्थापन से पहले अधिकारियों और नेताओं ने घर बनाने के लिए ढाई लाख रुपए तक की मदद, स्कूल, साफ पानी और चौड़ी सड़क जैसी सुविधाओं का भरोसा दिया था। योजना का लाभ देने के लिए फार्म भी भरवाए गए, लेकिन बाद में बताया गया कि जिस योजना का लाभ मिलना था, वह बंद हो गई है। सोनू का कहना है कि पानी के लिए सैकड़ों परिवारों के बीच एक बोर और टंकी की व्यवस्था है। उनका आरोप है कि इससे गंदा पानी निकलता है और मजबूरी में वही पानी पीना पड़ रहा है। छह बांस, छह बल्ली और पन्नी से घर बनाने को कहा रहवासियों के मुताबिक, नगर निगम ने घर के नाम पर छह बांस, छह बल्ली और एक पन्नी दी है। बारिश में पन्नी के घरों में पानी भर जाता है। ऐसे में परिवारों को रात जागकर गुजारनी पड़ती है। स्कूल दूर हुआ तो बच्चों की पढ़ाई छूटी विस्थापन का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। मेडिकल कॉलेज के पास रहते समय बच्चे रोज स्कूल जाते थे, लेकिन अब 15 किलोमीटर दूर तेवर आने के बाद कई बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। मयंक नामदेव ने बताया कि मेन रोड तक पैदल जाना पड़ता है। इसके बाद ऑटो या बस से स्कूल पहुंचते हैं, जिससे अक्सर देर हो जाती है। स्कूल से लौटते-लौटते अंधेरा हो जाता है। बस्ती में स्कूल नहीं होने के कारण कई बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। बस्ती में ही मंदिर में लग रही बच्चों की क्लास बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए किरण केवट ने बस्ती के छोटे से मंदिर में क्लास शुरू की है। उनका कहना है कि कई बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है, इसलिए मंदिर में रोज दो से तीन घंटे निशुल्क पढ़ाया जाता है। कई परिवार बस्ती छोड़कर शहर लौटे बस्ती के हालात से परेशान कई परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। कुछ परिवारों की झोपड़ियां अभी तेवर में हैं, लेकिन वे शहर में किराए के मकान में रहने लगे हैं। रज्जू यादव का कहना है कि परिवार की सुरक्षा जरूरी है। यहां सांप और अन्य जीव-जंतुओं का डर बना रहता है, इसलिए शहर में किराए का मकान लेकर रहना बेहतर है। लाइट-पानी है, लेकिन व्यवस्था सवालों में रहवासियों का कहना है कि कच्ची सड़क बनाई गई है और बिजली के खंभे भी लगाए गए हैं, लेकिन बारिश में सड़क पर पानी भर जाता है। इससे ऑटो और दूसरे वाहन फंसने या पलटने की स्थिति बन जाती है। लोगों के मुताबिक, रात में वोल्टेज की समस्या रहती है और बल्ब की रोशनी भी बेहद कम हो जाती है। मोबाइल टॉयलेट भी खराब, खुले में जाने की मजबूरी सैकड़ों परिवारों के लिए मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही वह खराब हो गया। अब लोग बस्ती से बाहर जंगल की तरफ खुले में जाने को मजबूर हैं। यहां भी सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता है। मोहन का कहना है कि बिजली और सड़क से पहले सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि अभी भी लोगों को खुले में जाना पड़ रहा है। नगर निगम कमिश्नर बोले- अधिकारियों को मौके पर भेजेंगे जबलपुर नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि यह समस्या अभी उनके संज्ञान में आई है। अधिकारियों को मौके पर भेजा जा रहा है। रहवासियों द्वारा बताई गई समस्याओं को नोट कराया जाएगा। बारिश समाप्त होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।

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