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विदेश से शक्कर बुला रहे, एमपी की मिलों पर ताले:6 फैक्ट्रियां सालों से बंद, कर्ज में डूबीं; क्यों मुश्किल में प्रदेश के चीनी कारखाने

देश में चीनी की कीमतें बढ़ने के बीच सरकार ने बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए 10 लाख टन चीनी आयात करने का फैसला किया है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश की कई चीनी मिलें वर्षों से बंद हैं और उनकी मशीनरी व परिसंपत्तियां जर्जर हो रही हैं। मुरैना की कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय के आमरण अनशन ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया। सरकार के आश्वासन के बाद अनशन खत्म हो गया, लेकिन किसानों और कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है। संडे स्टोरी में समझिए कि चीनी महंगी होने की वजहें क्या हैं और MP की मिलें बंद क्यों हुईं… पहले जानिए एमपी में शुगर मिल का मुद्दा कैसे गर्माया ये मुद्दा मुरैना की कैलारस शुगर मिल से गर्माया, जो करीब 15 साल से बंद है। इसे दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने आमरण अनशन शुरू किया। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी अनशन स्थल पर पहुंचे, जबकि राहुल गांधी ने आंदोलन को समर्थन दिया। विधायक ने मुरैना बंद की चेतावनी दी, जिसे क्षेत्र के कई किसान और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। सरकार के आश्वासन के बाद अनशन खत्म हो गया। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि कैलारस शक्कर मिल को दोबारा शुरू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, विधायक और संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। वजह यह है कि मिल को शुरू करने के लिए सरकार 2017 के बाद दो बार प्रयास कर चुकी है, लेकिन दोनों बार मामला कागजी प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाया। 15 साल में 6 शुगर फैक्ट्रियां बंद हो गईं… कैलारस मिल का मामला अकेला नहीं है। मध्य प्रदेश की छह बड़ी चीनी मिलें वर्षों से बंद हैं। इससे उनसे जुड़े किसान, कर्मचारी और स्थानीय कारोबार प्रभावित हुए हैं। 1. भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज, सीहोर (नवाबों के दौर की मिल) 2. डबरा शुगर मिल, ग्वालियर (सिंधिया रियासत की विरासत) 3. द मालवा सहकारी शक्कर कारखाना, बरलाई (इंदौर) 4. नारायणपुरा मिल, गुना (सहकारिता मॉडल की चुनौती) क्या MP की मिलें बंद होने से चीनी के दाम बढ़े? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, MP की मिलों के बंद होने को चीनी की मौजूदा कीमतों की सीधी वजह नहीं माना जा सकता। कीमतों पर मौसम, एक्सपोर्ट पॉलिसी और त्योहारों की मांग जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर है। व्यापारी संघ के पदाधिकारी विवेक साहू के मुताबिक “एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से गन्ने का एक हिस्सा चीनी उत्पादन से हट रहा है। वहीं सरकार के अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गया है। इसलिए एथेनॉल डायवर्जन को कीमत बढ़ने की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता। सरकार का डैमेज कंट्रोल: उठाए 4 बड़े कदम चीनी की कीमतों पर नियंत्रण और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 अगस्त 2026 को चार फैसले लिए।

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