रोज इंदौर व आसपास की मंडियों में बेच रहे फ्रूट विदेशी फल ड्रेगन फ्रूट की खेती अब उज्जैन के ताजपुर में भी हो रही है। मुख्य रूप से यह मैक्सिको और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) क्षेत्रों का मूल फल माना जाता है। ताजपुर के विष्णु पाटीदार ने रायपुर में इसकी खेती देख अपने यहां भी इसकी शुरुआत की। वे रोजाना इंदौर सहित आसपास की मंडियों में ड्रैगन फ्रूट बेच लाखों रुपए कमा रहे हैं। खास बात यह कि पाटीदार ने ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को लेकर अधिकांश जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त की। विष्णु के पुत्र विशाल बताते है कि शुरुआत 50 पौधों से की थी। उत्पादन व मुनाफा होता देख 7-8 बीघा में पौधे लगाए। पौधे भी ऑनलाइन ही मंगवाए। सरपंच मांगीलाल मालवीय ड्रैगन फ्रूट की खेती को मां की बगिया अभियान का हिस्सा करार देते हैं। उनका कहना है कि खेती किसानी के इस नवाचार को देखने व समझने के लिए दूर-दूर से किसान आ रहे हैं। इस खेती को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन जनपद सीईओ संदीप यादव का भी ग्रामीणों को मार्गदर्शन मिल रहा है। वर्षभर में 6 बार उत्पादन, 150 रुपए किलो बिक रहा
पाटीदार का कहना है कि जून में पौधे लगाए थे। अब फल आने लगे हैं। एक वर्ष में एक पौधे में से 5-6 बार फल लिए जा सकते हैं। औसतन प्रति बीघा में एक से दस क्विंटल से अधिक उत्पादन होता है। मंडी में ड्रेगन फ्रूट की कीमत 150 रुपए किलो मिल रही है। ड्रैगन फ्रूट मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका और अल सल्वाडोर का मूल पौधा है। इसे पिटाया या पिटाहया तथा भारत में कमलम भी कहा जाता है। वर्तमान में यह वियतनाम, थाईलैंड, चीन और भारत सहित दुनिया के कई गर्म देशों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। पाचन, कम इम्युनिटी, डायबिटीज सहित कई बीमारियों में फायदेमंद है ड्रेगर फ्रूट
ड्रैगन फ्रूट मुख्य रूप से डायबिटीज (मधुमेह), पाचन संबंधी समस्याओं (कब्ज) और कम इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) जैसी स्थितियों में फायदेमंद माना जाता है। डॉ. अंतरसिंह चौधरी कहते हैं कि ड्रैगन फ्रूट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें मौजूद फाइबर खून में शुगर की रफ्तार को अचानक बढ़ने से रोकता है। इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है। यह पेट को साफ रखता है और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषित करता है। इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देते हैं।
