कांग्रेस की भूमिका पूरी तरह राजनीतिक अवसरवाद से प्रेरित है। यदि पड़ोसी के घर बच्चा पैदा हो जाए और कांग्रेस ढोल बजाने लगे, तो उसमें उसकी क्या भूमिका होगी? जिस आंदोलन का हवाला दिया जा रहा है, उसमें छात्रों ने आंदोलन किया और पुलिस की कार्रवाई भी हुई, लेकिन कांग्रेस बाद में राजनीतिक लाभ लेने के लिए मैदान में उतर आई। यह बात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में शनिवार रात धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस द्वारा निकाले गए विरोध जुलूस पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह निराश हो चुका था और उसे इस मुद्दे में राजनीति की एक नई संभावना दिखाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इस पूरे घटनाक्रम में कोई वास्तविक योगदान नहीं था। उन्होंने कहा राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पहले समझना चाहिए। उनके अनुसार यदि आरएसएस नहीं होती तो इस देश की स्थिति क्या होती?, इसकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज देश जिस व्यवस्था और अनुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे आरएसएस के स्वयंसेवकों की वर्षों की मेहनत है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान अनुशासित कार्यकर्ता हैं धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली की सराहना करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि वे उन्हें विद्यार्थी परिषद के समय से जानते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान जिस जिम्मेदारी को भी संभालते हैं, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाते हैं। आंदोलन शुरू होते ही प्रधान ने पार्टी नेतृत्व से स्वयं कहा था कि यदि पार्टी उचित समझे तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। बाद में पार्टी के सामूहिक निर्णय के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। विजयवर्गीय ने कहा कि यही एक सच्चे और अनुशासित कार्यकर्ता की पहचान होती है कि वह पद से बड़ा संगठन और देश को मानता है। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन सभी विदेशी ताकतों के मंसूबों पर पानी फिर गया, जो भारत में हिंसा और अस्थिरता फैलाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहती थीं, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। विजयवर्गीय ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कदम से उन ताकतों की साजिशों को विफल कर दिया है और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।
