मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। NSUI नेताओं ने लगाए ‘नरेंद्र मोदी… जिंदाबाद’ के नारे
मोदी सरकार का विरोध कर रहे थे। फिर ‘नरेंद्र मोदी… जिंदाबाद’ के नारे लगा दिए। ये मिस्टेक भोपाल में छात्र संगठन NSUI के नेताओं से हो गई। इसका वीडियो भी सामने आया है। अब लोग इसे चटकारे लेकर शेयर कर रहे हैं। दरअसल, दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले में प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में भोपाल में NSUI के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। नारे लगाने की धुन ऐसी लगी कि अचानक मोदी भक्ति का स्वर फूट पड़ा। ‘नरेंद्र मोदी… जिंदाबाद’ का नारा लग गया। हालांकि, फौरन समझ भी आ गई और तुरंत ट्रैक चेंज कर लिया। लेकिन NSUI नेताओं का ये ‘स्लिप ऑफ टंग’ कैमरे में कैद हो गया। विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का धरना-प्रदर्शन
उधर, दिल्ली में पीएम आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया… इधर, भोपाल में कांग्रेस नेता सदन से लेकर सड़क तक विरोध-प्रदर्शन पर उतर आए। विधानसभा में कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान एक दिलचस्प वाकया भी देखने को मिला। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना दे रहे कांग्रेस विधायकों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाने की कोशिश की। इस दौरान कांग्रेस विधायकों और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच हल्की-फुल्की बहस भी हुई। विजयवर्गीय जब वहां से जाने लगे तो धरने पर बैठे छिंदवाड़ा जिले के सौसर से विधायक विजय चौरे को ‘प्यार भरा थप्पड़’ मार गए। राजभवन पर डटे जीतू पटवारी को पुलिस ने उठाया
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपनी पार्टी के नेताओं के साथ राजभवन के सामने धरने पर बैठ गए। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। जब वे नहीं माने तो पुलिस ने गिरफ्तारी शुरू कर दी। जीतू पटवारी को भी पुलिस ने जबरन उठाकर पुलिस वाहन में बैठा दिया। कुछ-कुछ उसी अंदाज में, जिस तरह दिल्ली में पुलिस राहुल गांधी को अपने साथ ले गई थी। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते रहे। हालांकि, राजभवन के सामने धरने की अपील करते हुए जीतू पटवारी से भी एक गलती हो गई। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि ‘राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं’। जबकि राहुल गांधी संसद में नहीं, बल्कि पीएम आवास के सामने धरने पर बैठे थे। अब लोग जीतू पटवारी की इस गलती पर भी चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि नेता जी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं और उन्हें ये भी पता नहीं कि उनके नेता धरना देने कहां बैठे हैं। हालांकि, इसे जुबान की फिसलन भी कहा जा सकता है। विधानसभा में कांग्रेस ने किया विरोध का ‘नाटक’
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निर्देशन में लगातार दूसरे दिन विरोध का अनोखा ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस ने भाजपा, RSS और ABVP को ‘मुर्दा’ बताते हुए एक नाटक का मंचन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि ये ऐसे ‘मुर्दे’ हैं, जो युवाओं के रोजगार, OBC वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने, किसानों और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सोए रहते हैं। लेकिन राम मंदिर, हिंदू-मुस्लिम और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर तुरंत जाग जाते हैं। कांग्रेस के इस प्रदर्शन को भाजपा ने नौटंकी करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के पास सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं है, इसलिए पब्लिसिटी के लिए इस तरह का नाटक कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने तो कांग्रेस नेताओं को मुंबई जाकर फिल्मों में काम करने की सलाह तक दे डाली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता, नेता कम और अभिनेता ज्यादा हैं। अगर इतना ही शौक है नौटंकी करने का, तो मुंबई जाकर फिल्मों में काम करना चाहिए। और अब अंदर की बात.. फुटबॉल की दीवानगी ने साहब को करा दिया लेट
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ‘सरकार’ और मंत्री तो समय पर सदन पहुंच गए। लेकिन पुलिस विभाग के एक सीनियर अधिकारी लेट हो गए। इस पर मंत्री और अफसरों के बीच चर्चा होने लगी कि आखिर साहब अब तक आए क्यों नहीं। आखिरकार देरी से ही सही, साहब विधानसभा पहुंच ही गए। ‘सरकार’ ने जब उनसे लेट होने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि रात में फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मैच देखते रहे। फुटबॉल की खुमारी ऐसी चढ़ी कि सुबह जल्दी नींद ही नहीं खुली। वैसे, इन साहब के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। हाल ही में ‘सरकार’ ने इन्हें एक मीटिंग के लिए बुलाया था, लेकिन साहब खुद नहीं पहुंचे और अपने अधीनस्थ अधिकारी को भेज दिया। वजह थी पासिंग परेड… यानी उस वक्त साहब ने सरकारी मीटिंग से ज्यादा तरजीह पासिंग परेड को दी। अबकी बार फुटबॉल प्रेम जाग गया… तो साहब विधानसभा पहुंचने में ही लेट हो गए। अब सवाल ये है कि साहब का रिटायरमेंट करीब है, इसलिए क्या सरकारी कामकाज में उनकी दिलचस्पी भी धीरे-धीरे रिटायर हो रही है? इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल) ये भी पढ़ें –
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