टीकमगढ़ में हायर सेकंडरी स्कूल की महिला प्रभारी प्राचार्य को रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। प्रभारी प्राचार्य ने अतिथि शिक्षक से नियुक्ति के लिए पांच हजार रुपए मांगे थे। इसका ऑडियो भी सामने आया था। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय की जांच रिपोर्ट और जिला शिक्षा अधिकारी की पुष्टि के बाद कार्रवाई की है। सागर संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किया। टीकमगढ़ से 50 किलोमीटर जरुवा स्थित सरकारी स्कूल में गायत्री कुशवाह बतौर प्रभारी प्राचार्य पदस्थ हैं। वहीं, प्रवेश कुमार शिवहरे को अतिथि शिक्षक वर्ग 2 के रूप में जॉइन करना था। इसके लिए गायत्री कुशवाह ने पांच हजार रुपए मांगे। उन्होंने जॉइन भी करवा दिया, लेकिन रुपए नहीं मिले। बाद में दोनों की बातचीत प्रवेश ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर ली। करीब एक हफ्ते पहले ऑडियो वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद कमिश्नर के आदेश पर जांच समिति गठित की गई। कलेक्टर ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट के अनुसार गायत्री कुशवाह ने सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षक अंतराम सेन से भी पैसे मांगे थे। उनसे पांच हजार रुपए लिए थे। वह रुपयों के लिए दबाव बना रही थी। प्रभारी प्राचार्य और अतिथि शिक्षक के बीच की बातचीत अतिथि शिक्षक: हमने बोल तो दिया था सर से कि हम आपको दे दें। प्रभारी प्राचार्य: नहीं, तो हमें… उससे क्या मतलब कि हम जुलाई में या एक महीने में, दो महीने बाद… कि वेतन डल जाए, तब-तब का भी सब्र किया। वेतन को भी तो तुम्हारे दो महीने हो गए। हमने वेतन की भी कहा था, वेतन डल जाए तब को… तब तक भी देखा था। अतिथि शिक्षक: अरे नहीं, पैसे बचे नहीं थे, ₹100 रह गए थे हम… प्रभारी प्राचार्य: तो उससे थोड़े न हमें मतलब है … अतिथि शिक्षक: अरे, आपके पैसा नहीं जाएंगे कहीं, पैसा मिल जाएंगे। प्रभारी प्राचार्य: नहीं… प्रभारी प्राचार्य: नहीं, हमने जितना को-ऑपरेट किया था जिस तरीके से… क्योंकि मतलब हम मैडम, आप तो हमें जानो। और जैसे अनंतराम सर बीच में पड़े थे कि मैडम, आप तो हमें जानो। अतिथि शिक्षक: नहीं,… आपको पैसा कौन आपका मरने गया, पैसा मिल जाए आपको। पैसा मिल जाए, पैसा की आप काहे चिंता कर रहे? हमने सर से पहले ही कह दी थी कि मैडम को हम दे दें, वही जुलाई में दे दें। प्रभारी प्राचार्य: जुलाई से क्या मतलब है फिर? अतिथि शिक्षक: कैसे, जुलाई से? प्रभारी प्राचार्य: कि जुलाई में दे दें। जुलाई में क्या आपको तनख्वाह मिल रही जुलाई में? वेतन थोड़ी ना मिल रहा जुलाई में? अतिथि शिक्षक: अरे, सो वेतन अब जो आए नहीं हो गए। पैसा बचे नहीं थे, वहां लग गए थे। सो अब रह गए थे। प्रभारी प्राचार्य: तो अगर वेतन भी मिलेगा तो वो तो अगस्त में मिलेगा ना अतिथि शिक्षक: नहीं, सो पैसा आपका जुलाई में मिल जाए। पहले ही पहले मिल जाए। प्रभारी प्राचार्य: जुलाई में क्या पता हम यहां रहे कि नहीं रहे, उससे क्या मतलब है कि? अतिथि शिक्षक: आप तो कहीं भी रहो, आपको जाने के पहले, अगर आप चली भी जाओ, तो पैसा आपको… पैसा मिल जाएगा। प्रभारी प्राचार्य: चलो, देख लेंगे। अतिथि शिक्षक: हां, पैसा आपको पहले ही मिल जाए, आप पैसों की टेंशन न लो। वो तो हमने सर से पहले ही कह दी थी। प्रभारी प्राचार्य: नहीं, तो बहुत वेट कर लिया न हमने भी। मतलब, आप कह रहे कि तनख्वाह आ जाएगी, यह हो जाएगा। हमने शुरू से एक भी बार नहीं कहा आपसे, एक भी बार, इसके लिए। अतिथि शिक्षक: नहीं, पैसा… काहे, पैसा बचा नहीं था बिल्कुल। 35 हजार रुपए वहीं का वहीं खर्च, इसलिए रह गए थे। प्रभारी प्राचार्य: हम तो यही वेट कर रहे, मैंने कहा चलो अपने आप… मतलब ये समझें, अपने आप समझें। लेकिन वो तो कहनी ही पड़ी हमें, आपने अपने आप नहीं समझी तो। नहीं तो हमने आपसे आज तक इस बारे में कहा को कभी भी? अतिथि शिक्षक: चलो, हम हफ्ते तक में करा दे रहे। दो ही चार दिन में करा देंगे। प्रभारी प्राचार्य: ठीक। चलो सर। सबूत पेश नहीं कर सकीं प्राचार्य जांच के दौरान प्रभारी प्राचार्य गायत्री कुशवाह ने ऑडियो में अपनी आवाज स्वीकार की, लेकिन पैसों को निजी उधार बताया। हालांकि, वे जांच अधिकारी के समक्ष बचाव में ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सकीं। इसके बाद कमिश्नर ने इसे गंभीर कदाचरण और सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय टीकमगढ़ तय किया है।
